Wednesday, July 23, 2014

भविष्यवाणी

           भविष्यवाणी

 सभी चैनल पर है  पंडित जी कोई ना कोई ,आते
देख कर के चाल ग्रह की,सभी को है ,ये   बताते
आज दिन बीतेगा कैसे ,आपका भविष्य क्या है
एक दिन की बात ना है ,रोज का ये सिलसिला है
सिर्फ बारह राशियों में ,समय का है खेल चलता
'मेष' के घर क्लेश होगा,'कुम्भ'पायेगा सफलता
'मिथुन'वाले सुखी होंगे,मान कर पत्नी की बातें
'मीन'का है चन्द्र दुर्बल,रहें शिव पर जल चढ़ाते
'कर्क'पर शनि वक्र है ,हनुमानजी का करें पूजन
'बन रहा धन योग 'धनु' अचानक ही आएगा धन
और 'वृश्चिक',रहे निश्चित,शीध्र उनके दिन फिरेंगे
एक नरियल,बहते जल में,वो अगर जो बहा देंगे
संभल करके  रहे'कन्या'राशि,दुर्घटना घटेगी
और 'मकर'वालों सभी की,आज तो चांदी कटेगी
'सिंह' वाले ,क्रोध पर जो ,रखें काबू तो भला है
 मिला जुला रहेगा दिन, जिन्होंकी राशि 'तुला' है
और सब 'वृष'राशि वाले,भावना को रखे वश में
प्रभु का स्मरण करेंगे,वृद्धि होगी ,किर्ती,यश में
पास में आचार्य जी के ,हर एक विपदा की दवा है
जान ही अब गए होंगे , आपका भविष्य  क्या है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Tuesday, July 22, 2014

इन्तजार

           इन्तजार
थे बच्चे भूख जब लगती ,हम रोते और मचलते थे,
  दूध अम्मा पिलाएगी ,यही इन्तजार करते थे
बड़े होकर गए स्कूल,न मन लगता पढाई में ,
बजे कब छुट्टी की घंटी,यही इन्तजार करते थे
मोहब्बत की जवानी में,किसी के प्यार में डूबे,
हमेशा माशुका से मिलन का, इन्तजार करते थे
गृहस्थी का पड़ा जब बोझ,तो फिर मुश्किलें आई,
कभी आएंगे अच्छे दिन,यही इन्तजार करते थे
रहा इन्तजार जीवन भर,कभी इसका,कभी उसका ,
सिलसिला अब बुढ़ापे में ,भी वो का वो ही जारी है
जिंदगी के सफर का अब,अंत नजदीक आने को ,
न जाने मौत  कब आये,उसी की  इंतजारी है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

मोमबत्ती जल रही है

                मोमबत्ती जल रही है

आजकल इस देश में क्या हो रहा है,
          नहीं कोई की समझ में आ रहा है
लोग कहते हम तरक्की कर रहे है,
           रसातल पर देश लेकिन जा रहा है
दो बरस की नन्ही हो मासूम बच्ची ,
            या भले बुढ़िया पिचासी साल की है
हो रही है जबरजस्ती सभी के संग ,
              दरिंदों के हाथों ना कोई बची है
पाशविक अपनी पिपासा पूर्ण करके ,
               मार देते,पेड़ पर लटका रहे है
आजकल तो इसतरह के कई किस्से,
               रोज ही सबकी नज़र में आरहे है
कोई साधू कर रहा है रासलीला,
               कोई नेता ,लड़कियों को रौंदता है
और सुरक्षा के लिए तैनात है जो,
               पुलिसवाले ,थाने में करते खता है
नौकरी का देके लालच कोई लूटे,
              कोई शादी का वचन दे और भोगे
कोई शिक्षागृहों में कर जबरजस्ती,
              खेलता है नन्ही नन्ही बच्चियों से
 मामला जब पकड़ता है तूल ज्यादा,
               कान में सरकार के जूँ  रेंगती है
दे देती मुआवजा कुछ लाख रूपये ,
              अफसरों को ट्रांसफर पर  भेजती है
नेता करने लगते है बयानबाजी,
             देश है इतना बड़ा ,क्या क्या करें हम
अपराधी है अगर नाबालिग बचेगा,
             इस तरह अपराध क्या होंगे भला कम
आज ये हालात है अस्मत किसी की,
             किस तरह से भी सुरक्षित है नहीं अब
किस तरह इस समस्या का अंत होगा,
             किस तरह हैवानगी यह रुकेगी सब
रोज ही ये वारदातें हो रही है ,
             और मानवता सिसकती रो रही है
और नेता सांत्वना बस दे रहे है,
              सभी शासन की व्यवस्था सो रही है
देश के नेता पड़े कर बंद आँखें,
               जागरूक जनता प्रदर्शन कर रही है
किन्तु होता सिर्फ ये कि पीड़िता की,
                 याद में कुछ मोमबत्ती जल रही है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Monday, July 21, 2014

मिले है ऐसे प्रीतमजी

               मिले है ऐसे प्रीतमजी

बताएं क्या तुम्हे हम जी
मिले है ऐसे प्रीतम  जी
       पड़े रहते है ये घर पर
        करें ना काम रत्ती भर
        कभी ये लाओ,वो लाओ,
        चलाते हुक्महै दिन भर
तंग हो जाते है हम जी
मिले है ऐसे प्रीतम जी
      दिखाते है कभी पिक्चर
      कराते है डिनर बाहर
      तबियत के रंगीले है,
      सताते है हमें  जी भर
नहीं कोई से है कम जी
मिले है ऐसे प्रीतम जी
       प्यार पर जब दिखाते है
       बनाते   खूब    बातें है
        रात को करते है वादे,
        सवेरे  भूल  जाते है 
निकला करते है दम जी
मिले है ऐसे प्रीतम जी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

पुराने खिलाड़ी

            पुराने खिलाड़ी

न तो देखो धुला कुरता ,फटी बनियान मत देखो
          धड़कता इनके पीछे जो, दीवाना सा है दिल देखो
सफेदी देख कर सर की ,नहीं बिदकाओ  अपना मुंह,
            पुराने हम खलाड़ी है ,कभी हम से तो मिल देखो
       पुराने स्वाद चावल है ,अनुभव का खजाना है 
        चखोगे ,याद रख्खोगे ,माल परखा ,पुराना है
 नए नौ दिन,पुराने सौ दिनों तक काम आते है ,
       इस भँवरे का दिवानापन,कभी फूलों सा खिल देखो                 
'घोटू '

उम्र है मेरी तिहत्तर

       उम्र है  मेरी तिहत्तर

जिंदगानी के सफर में ,मुश्किलों से रहा लड़ता
आ गया इस मोड़ पर हूँ,कभी गिरता ,कभी पड़ता
ना किया विश्राम कोई,और रुका ना ,कहीं थक कर
                                           उम्र है मेरी तिहत्तर
जवानी  ने बिदा ले ली ,भले कुछ  मुरझा रहा तन
जोश और जज्बा पुराना ,है मगर अब तलक कायम
आधा खाली दिख रहा पर,भरा है आधा कनस्तर
                                           उम्र है मेरी तिहत्तर  
भले ही सर पर हमारे ,सफेदी सी छा रही  है
पर हमारे हौंसले की ,बुलंदी वो की  वो ही है
दीवारें मजबूत अब भी ,गिर रहा चाहे पलस्तर
                                       उम्र मेरी है तिहत्तर  
छाँव दी कितने पथिक को ,था घना मैं जब तरुवर
दिया पंछी को बसेरा और बहाई हवा शीतल
फल उन्हें भी खिलाएं है,मारा जिनने ,फेंक पत्थर
                                           उम्र मेरी है तिहत्तर
किसी से शिकवा न कोई ,ना किसी को कोसता हूँ
न तो कल को भूल पाता और न कल की सोचता हूँ
पा लिया मैंने बहुत कुछ,जैसा था मेरा मुकद्दर
                                      उम्र मेरी है तिहत्तर
बेसुरी सी हो रही है  उमर के  संग  बांसुरी है
लग गयी बीमारियां कुछ,किन्तु हालत ना बुरी है
ज़रा ब्लडप्रेशर बढ़ा है,खून में है अधिक शक्कर
                                         उम्र है मेरी तिहत्तर
कठिन पथ है ,राह में कुछ ,दिक्कतें तो आ रही है 
चाल है मंथर नदी की ,मगर बहती जा रही है
 कौन जाने कब मिलेगा ,दूर है कितना समंदर
                                        उम्र है मेरी तिहत्तर

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Saturday, July 19, 2014

बदपरहेजी

         बदपरहेजी

ये सच है मैं तुम्हारा हूँ,तुम्हारा ही रहूंगा पर,
   हुस्न बिखरा हुआ सब ओर है,दीदार करने दो
निमंत्रण दे रहे है फूल इतने,बाग़ में खिलते ,
    ज़रा सी छूट दे दो ,मुझको इनसे प्यार करने दो
यूं तो अक्सर ही तुम इंकार,मुझसे करती रहती हो,
   करोगी आज जो इंकार,  मानूंगा न मैं  हरगिज
रोज ही दाल रोटी, घर की खाता ,जैसी भी मिलती,
     परांठा मिल रहा है,खाऊंगा,मुझको चढ़ी है जिद
मुझे मधुमेह है,मिठाई पर पाबंदियां है पर,
      कब,कहाँ इसतरह मधु के छलकते जाम मिलते है
चार दिन ,चार गोली ज्यादा खा लूँगा दवाई की,
       हमेशा चूसने को कब, दशहरी  आम मिलते है
नहीं रोको तुम मुझे बस थोड़ी  बदपरहेजी करने दो ,
    बड़ी किस्मत से मिल पाते है,ये इतने हसीं  मौके
देखलो फिर बगावत पर ,उतर आऊंगा वर्ना मै ,
    आज पर रुक नहीं सकता ,भले कितना ,कोई रोके

घोटू