Thursday, September 25, 2014

आशिक़ की आरजू

          आशिक़ की आरजू

रात को आते हो अक्सर,ख्वाबगाह में मेरी ,
        एक झलक अपनी दिखाते ,और जाते हो चले
हमने बोला,छोड़ दो यूं ,आना जाना ख्वाब में ,
        बहुत है हमको सताते ,इस तरह के सिलसिले
ये भी कोई बात है ,जब बंद आँखें हमारी ,
       तब ही मिल पाता हमें है,आपका दीदार  है
खोलते है  आँख जब हम  ,नज़र तुम आते नहीं,
             बीच में मेरे तुम्हारे ,पलक की दीवार है
ना तो तुमको छू सकें ना भर सकें आगोश में,
        दूर मुझसे इतने रहते, नज़र आते पास हो      
भला ये भी इश्क़ करने का तरीका है कोई,
              उड़ा देते नींद मेरी,बढ़ा देते प्यास हो
इसतरह से आओ अब वापस कभी ना जा सको,
            रूबरू अहसास तुम्हारा करूं  मैं  रात दिन
अब तो शिद्दत हो गयी है,तुम्हारे इन्तजार की,
           आओ ना आजाओ बस  अब ,मन लगे ना आप बिन

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

सीताफल

सीताफल

बाहर से कितनी आँखे पर बंधे हुए हम ,
बहुमुखी प्रतिभा वाला है यक्तित्व हमारा
हरेक आँख का अपना गूदा ,अपनी गुठली ,
किन्तु साथ है,तब ही है अस्तित्व हमारा
भीतर से हम मीठे है ,स्वादिष्ट ,रसीले,
बाहर हरे भरे ,आकर्षक दिखलाते है
सीताजी जैसे नाजुक हम सीताफल है,
भरी शराफत,तभी शरीफा कहलाते है
सीताफल जैसा ही भारत देश हमारा ,
अलग अलग है धर्म,आस्था अलग अलग है
किन्तु साथ में बंधे हुए है ,इक दूजे से,
मीठे और शरीफ ,चाहता सारा जग है
घोटू

सीताफल     बाहर से कितनी आँखे पर बंधे हुए हम ,   बहुमुखी प्रतिभा वाला है यक्तित्व  हमारा   हरेक आँख का अपना गूदा ,अपनी गुठली ,  किन्तु साथ है,तब ही है अस्तित्व हमारा   भीतर से हम मीठे है ,स्वादिष्ट ,रसीले,  बाहर हरे भरे ,आकर्षक दिखलाते है   सीताजी जैसे नाजुक हम सीताफल है,  भरी शराफत,तभी शरीफा कहलाते है   सीताफल जैसा ही भारत देश हमारा ,  अलग अलग है धर्म,आस्था अलग अलग है   किन्तु साथ में बंधे हुए है ,इक दूजे से,  मीठे और शरीफ ,चाहता सारा   जग है   घोटू
सीताफल
बाहर से कितनी आँखे पर बंधे हुए हम ,
बहुमुखी प्रतिभा वाला है यक्तित्व हमारा
हरेक आँख का अपना गूदा ,अपनी गुठली ,
किन्तु साथ है,तब ही है अस्तित्व हमारा
भीतर से हम मीठे है ,स्वादिष्ट ,रसीले,
बाहर हरे भरे ,आकर्षक दिखलाते है
सीताजी जैसे नाजुक हम सीताफल है,
भरी शराफत,तभी शरीफा कहलाते है
सीताफल जैसा ही भारत देश हमारा ,
अलग अलग है धर्म,आस्था अलग अलग है
किन्तु साथ में बंधे हुए है ,इक दूजे से,
मीठे और शरीफ ,चाहता सारा जग है
घोटू

Wednesday, September 24, 2014

              कमजोरी (A )
बहुत दिन में वो मिले ,हमने कहा,तुम हे कहाँ,
        लग रहे बीमार से ,मुख पर उदासी  छा गयी
न बोला कुछ दिनों को ,गए हम 'थाईलैंड' थे,
        'थाइराइड' से वहां  पर ,कमजोरी है आ गयी

                    राज-मस्ती का (A )
मस्तियाँ मन में हिलोरें ले रही है ,
                  प्यार का सागर उछालें भर रहा है
न बसंती रुत न सावन का महीना ,
                  आज मन इतना प्रमुदित क्यों हुआ है
तड़फता है आज को ये मन मिलन को,
                  पिय मिलान का आज मन में जलजला है
ओह!अब समझे ,पजामे में हमारे , 
                  उनके पेटीकोट का नाड़ा डला है
      
घोटू            

   
             
          शरारती कविता (A )

एक दिन उनकी ब्रा का हुक ,मेरे बनियान से बोला ,
               कहा ,होते बड़े ही बेरहम ये हुस्नवाले है
सुबह से शाम तक हम करते है मेहनत कुली जैसे,
        बोझ उनकी जवानी का ,सदा रहते संभाले है
कभी उनके उभारों को,ढलकने हम नहीं देते ,
       तभी जलवा जवानी का,लोग  सब देख लेते  है
नज़र है सबकी ललचाती ,उन्हें पाने को है लेकिन,
      मिलन की घड़ियों में हमको,खोल कर फेंक देते है
गुफ्तगू ,सुन रहा था उनके पेटीकोट का नाड़ा ,
       कहा भैया है जो भी तुम,बड़े तक़दीरवाले  हो
सदा चिपके तो रहते हो,बदन पे उनके नाजुक से ,
       तरसते लोग छूने को ,और तुम रहते सम्भाले हो
हमारी ओर देखो क्या ,तुम्हे बदमाश दिखते हम,
      हमें जो बाँध कर के सारा दिन ही है रखा  जाता
कमर के नीचे या ऊपर ,न जाने की इजाजत है,
      मिलन में,खोल कर के फेंक हमको है दिया जाता 
रात दिन करते पहरेदारी उनकी लाज की हम है ,
       बुरी नज़रों से दुनिया की ,उन्हें महफूज है  रखते
 भला दुनिया में हम से बढ़,कौन सा होगा  बदकिस्मत,
      मज़ा ले लेती है दुनिया ,मगर हम छू नहीं सकते

घोटू
    

Tuesday, September 23, 2014

ऊधौ ,जाओ तुम्हे हम जाने

          घोटू के पद
  ऊधौ ,जाओ तुम्हे हम जाने

ऊधौ (उद्धव),जाओ तुम्हे हम जाने
कान्हा दूत ,बने आये थे,देने ज्ञान,हमें समझाने
अब मथुरा के सिंहासन के , लगे तुम्हे हैं,सपने आने
हठ के कारण,गति कंस की,तुमभी जानो,हम भी जाने
रोटी हित  जब ,लड़े बिल्लियाँ,बन्दर पाये ,रोटी खाने
आधी छोड़,धाये  पूरी को,मुश्किल हो आधी भी पाने
छब्बे बनने के चक्कर में,चौबेजी ,दुब्बे रह जाने
पुत्र प्रेम में ,गयी सोनिया,तुमहु लगे ,वो ही पथ जाने
सत्ता भूत उतार न पांयें ,कोई तांत्रिक और सयाने
'घोटू' समझदार, रहता है ,गठबंधन में ,बंधे पुराने

घोटू

Monday, September 22, 2014

वादा तो निभाया

           वादा तो निभाया

नेताजी ने वोट मांगे ,दे के सबको ये वचन ,
      बिजली की और पानी की वो व्यवस्था करवाएंगे
और जब  वो चुन के आये,उनने था वादा किया ,
        अपने हर एक काम मे वो,'ट्रांसपरेन्सी 'लाएंगे  
नेताजी तो बन मिनिस्टर ,लगे अपने काम में,
         वादे   बेटी  ने  निभाये , एक   नए अंदाज में
'ट्रांसपरेन्सी 'का था वादा उसके  पापा ने किया ,
          'ट्रांसपरेन्सी 'ले के आई ,अपने वो   लिबास में
इस कदर  के पारदर्शी वस्त्र थे धारण किये ,
         देख  कर उसका  खुलापन  ,गिरी सब पर बिजलियाँ
लोग मारे शर्म के सब ,पानी पानी हो गए,
            बिजली और पानी का  वादा ,इस तरह पूरा किया

मदन मोहन बाहेती'घोटू'