Monday, October 20, 2014

वो बात अब न रही

             वो बात अब न रही

जी तो करता है मेरा ,ये भी करू,वो भी करू,
         मगर मैं क्या करूं ,ये उम्र साथ अब न रही
न तो हम में ही रहा जोश वो जवानी का,
           तुम्हारे जलवों में वैसी बात अब न रही 
फ़ाख़्ता मारते थे जब मियां ,वो दिन न रहे,
           सितारे तोड़ के लाने की उमर बीत गयी,
अब तो अखरोट भी हम तोड़ नहीं पाते है,
          रंगीले दिन और सुहानी वो रात अब न रही
ज़माना वो भी था जब हम पतंग उड़ाते थे,
          माशुका  हाथ में चरखी ले ढील देती  थी,
 हम खुद ही हो गए है इस कदर ढीले ,
           वक़्त की डोर भी तो अपने हाथ अब न रही
बहुत ही चौके और छक्के जड़े  जवानी में ,
            समय के आगे मगर हुए 'कैच आउट'हम
अब तो हम 'पेवेलियन'छोड़ कर जाने वाले ,
           हमारे  बल्ले में वो करामात अब न  रही
कभी डंका हमारे नाम का भी बजता था,
         हमारी आरती भी लोग उतारा करते ,
ज़माना करता नमस्कार चमत्कारों को ,
        हमारे जादू में भी वैसी बात अब न रही

मदन मोहन बाहेती'घोटू'      

विदेशी हूर-स्वाद भरपूर

           विदेशी हूर-स्वाद भरपूर

'पीज़ा'की तरह चीजी है चेहरा ये तुम्हारा ,
             टॉपिंग बदल के  कितने ही मन को हो लुभा रही
ज्यूसी हो 'पास्ते'की तरह नास्ते में तुम,
           'बर्गर'की तरह टेस्ट  में हो हम को भा रही
हो 'ग्रिल्ड सेन्डविच'सी  ताज़ी,गरम गरम ,
                 स्वादिष्ट और हेंडी तुम 'फ्रेंच फ्राई'सी
लगती विदेशी हूर सी भरपूर स्वाद में ,
            'क्रीमी'हो 'पेस्ट्री की तरह ,मुझ पे छारही

घोटू

ब्यूटी चाइनीज-कितनी लजीज

  ब्यूटी चाइनीज-कितनी लजीज

लगती हो 'मंचूरियन 'जैसी,सॉफ्ट सॉफ्ट  तुम ,
               नूडल की तरह लटक रहे सर के बाल है    
नाइस सा प्यार स्वाद'फ्राइड राईस'की तरह,
               'स्प्रिंग रोल 'की तरह   तू  बेमिसाल  है
हो कभी 'चॉप्सी'की तरह लगती कुरमुरी ,
              'चिली पनीर' की तरह का   टेस्ट है कभी ,
तू है लजीज ,चाइनीज फ़ूड की तरह,
              'चिल्ली पोटेटो' की तरह  जलवा कमाल है

घोटू

Saturday, October 18, 2014

ऑरेन्ज काउंटी का नया 'स्पा'

     ऑरेन्ज काउंटी का नया 'स्पा'
                        १ 
पत्नी जी स्पा गयी,लाई रूप निखार
पतझड़ वाले पेड़ पर,आयी नयी बहार
आयी नयी बहार,बाल रंगवाये काले
'कर्लिंग कर्लिंग'प्यारे लेटेस्ट फैशनवाले
'घोटू'खुश है किस्मत उनपर हुई मेहरबां
पेंसठ की बीबी ,पेंतीस सी ' लगे है जवां
                        २
देखा कायाकल्प ये ,उनका निखरा रंग
फिर से दिखें जवान हम,मन में उठी उमंग
मन में उठी उमंग,जोश कुछ ऐसा आया
'स्पा'जा हमने 'पेडी मेनी क्योर'कराया
करा 'फेशियल 'मुंह की रंगत ,हुई सुहानी
और 'बॉडी मसाज'लाई फिर नयी जवानी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
 

Friday, October 17, 2014

दक्षिण भारतीय व्यंजन और हुस्न

         दक्षिण भारतीय व्यंजन और हुस्न

सुन्दर है प्यारा  चेहरा ,जैसे हो 'उत्तप्पम'
           'रस्सम 'के जैसी चटपटी ,'साम्भर 'सी स्वाद हो
'डोसे 'की तरह पूरी मसाले से भरी हो,
             'उपमा' हो कभी  और  कभी 'दही भात ' हो
'इडली'से नरम गाल ,जिनमे 'मेदूबड़े 'से,
             पड़ते है डिम्पल ,हंसती ,लगती  लाजबाब हो
हो 'केसरी हलवे'सी मीठी और रस भरी,
              जाने बहार  तुम  किसी  भूखे  का  ख्वाब हो

घोटू 

हुस्न या मिठाई की दूकान

          हुस्न या मिठाई की दूकान


सुन्दर तिकोनी नाक ज्यों  बर्फी बादाम की,
                  हो  टेढ़ीमेढ़ी  जलेबी या जैसे इमरती
है गाल भी गुलाबजामुन जैसे रसीले ,
                 रबड़ी के लच्छों की तरह बात तुम करती     
तन में भरे है  जैसे लड्डू मोतीचूर के,
                  मीठा है बड़ा स्वाद ,हर एक अंग तुम्हारा ,
लगता है तुम मिठाई की पूरी दूकान हो,
                   रसगुल्ले की तरह पूरी रस से टपकती

घोटू

हुस्न-चौके का

          हुस्न-चौके का

जुल्फों में काली ,उनका गोरा चेहरा लगे ,
          जैसे तवे पे सिक रही हो गर्म रोटियां
सुन्दर तिकोनी नाक लगती जैसे समोसा , 
      आँखें मटर सी ,जैसे करती ,मटरगश्तियां
सुन्दर से मुख पे खिलखिलाती उनकी ये हंसी ,
     अरहर की दाल में हो ज्यों छोंका लगा दिया
देखा जो उनका हुस्न ,हमें भूख लग गयी ,
         चौके में उनके रूप ने ,चौंका  हमें दिया

घोटू