Monday, November 17, 2014

तुम्हारे हाथों में

              तुम्हारे हाथों में

जो हाथ पकाते जब खाना ,तो गजब स्वाद भर जाता है
छू लेती जिन्हे हरी मेंहदी ,तो लाल रंग   रच जाता   है
जिन हाथों का कर पाणिग्रहण ,रिश्ता बंधता जीवन भर का
जिन हाथों की ही फुर्ती से ,चलता है काम सभी घर का
जो हाथ प्रेम से सहला कर ,पति मन में प्रेम जगाते है
जिन हाथों के ही बाहुपाश में ,दो प्रेमी बंध  जाते है
जिन हाथों में आ पैसा भी ,बहती गंगा बन जाता है
बस एक इशारा जिनका सब पतियों को खूब नचाता है
जिन हाथों में बेलन आता ,तो रोटी बना खिलाता है
गुस्से में पर वो ही बेलन ,हथियार बड़ा बन जाता है
रोता बच्चा खुश हो जाता है आकर के जिन हाथों में
अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में
 
मदन मोहन  बाहेती'घोटू'

Sunday, November 16, 2014

            कर्णधारों से

कितने ही ताले लगवा लो ,दरवाजे तुम बंद  करवा लो
सीमाओं पर तुम कितने ही ,काँटेवाले  तार लगालो 
लेकिन जब तक मुस्तैदी से,अगर चौकसी नहीं बढ़ेगी
तब तक इन दहशतगर्दों की ,आवाजाही  नहीं रुकेगी
ताले चोरी नहीं रोकते ,     उलटे चोरी करवाते है
जब सूनापन सा दिखता है,चोर दिवार  फांद आते है
कोई चौकीदार अकेला ,चोरी नहीं रोक पाता   है
हमें जागरूक वो करता है ,चोर तभी तो घबराता है
आमंत्रित कर रहे चोर को ,दरवाजे पर लटका ताला
किन्तु सुरक्षा के चक्कर में ,तुमने क्या निर्णय ले डाला
काश्मीर में बढ़ा सुरक्षा ,राजस्थानी सीमा सूनी
दुश्मन को आवाजाही की ,छूट मिला करती है दूनी
इससे ज्यादा बेहतर ये है ,बढे चौकसी और निगरानी
खुली रखें सब अपनी आँखें ,तभी सुरक्षित घर के प्राणी
 सीमा पर प्रहरी बढ़वाओ, अच्छा बंदोबस्त रहेगा
हो सतर्क हर एक नागरिक,तभी सुरक्षित देश रहेगा
कम जाते है चोर जहाँ पर ,चहल पहल रहती रौनक है
सीमा पर बढ़ जाए सजगता ,सबसे ज्यादा आवश्यक है
हमें सुरक्षा घरवालों की ,करना है देख भाल जरूरी 
बूढ़े,बच्चे ,महिलाओं की  ,दिक्कत का भी ख्याल जरूरी
लेकिन जब तक चौकीदारी और सुरक्षा ना सुधरेगी 
दरवाजे बंद करवाने से ,दहशतगर्दी  नहीं  रुकेगी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Friday, November 14, 2014

शिकायत-तकिये की

         शिकायत-तकिये की

एक तकिये ने अपनी मालकिन से की ये शिकायत ,
              अकेले छोड़ कर के  साहब को जब आप जाते है
आप तो चैन से मइके में जाकर मौज करते है,
                इधर दो रात मे ही निकल मेरे प्राण   जाते है
बदल जाता है मेरा हुलिया ,हालत बिगड़ती है,
                 मौन सहता हूँ सब कुछ ,बोल भी तो मैं नहीं  सकता,
कभी टेढ़ा ,कभी सीधा,कभी ऐसे ,कभी वैसे,
                  बड़ी बेरहमी से साहब जी, मुझको दबाते है

घोटू 

जाती बहार के फल

        जाती बहार के फल

खिलता है तो लगता है सुहाना और महकता ,
                मौसम में  हर एक फूल पर चढ़ता शबाब है
अनुभव की बात आपको लेकिन हम बताएं ,
                  गुलकंद बन ,अधिक मज़ा देता  गुलाब है
मौसम में तो मिलते थे हमें रोज ही खाने ,
                  अब मुश्किलों से मिलते है,वो भी कभी कभी,
खाकर के देखो आम तुम जाती बहार के ,
                    पड़ जाते नरम,स्वाद में पर लाजबाब है

घोटू

बढ़तीं उमर की रईसी

          बढ़तीं उमर की रईसी

हम हो गए रईस है इस बढ़ती उमर में,
         सर पर है चांदी और कुछ सोने के दांत है
किडनी में,गॉलब्लेडर में ,स्टोन कीमती,
         शक्कर का पूरा कारखाना ,अपने साथ है
अम्बानी के तो गैस के कुवें समुद्र में ,
         हम तो बनाते गैस खुद ही ,दिन और रात है
है पास में इतना बड़ा अनुभव का खजाना ,
         जिसको कि बांटा करते है हम ,खुल्ले हाथ है    

घोटू

पूजा और प्रसाद

         पूजा और प्रसाद

बाद शादी के पडी बस ये ही आदत
किया करते रोज पत्नी की इबादत
और खाने मिल रहे पकवान तर है
चैन से ये जिंदगी होती बसर  है
नहीं पत्थर की प्रतिमा पूजते हम
हुस्न की जीवित प्रतिमा पूजते हम
पूर्ण श्रध्दा ,आस्था की  भावना से
सर नमाते,प्रेम की हम  कामना से
देवी के श्रृंगार हित नव वसन  लाते
स्वर्ण आभूषणो से उसको सजाते
प्रेम की भर भावना और जोश तन में
रतजगा भी किया करते ,कीर्तन में
आरती में लीन  होते,लगन से हम
भोग का परशाद पाते है तभी हम

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

सर्दी जुकाम

           सर्दी  जुकाम

गमन आगमन पवन किया करती जिस पथ पर ,
                   उस पथ से अब बहती  गंगा जमुना  धारा
दबी पवन उद्वेलित होकर बड़े कोप से ,
                  छूट   तोप की तरह  ,गूंजा देती घर सारा
शीत  हो रही व्याप्त  और मौसम सिहरन  का ,
                  चली गयी है ऊष्मा फिर भी तप्त  बदन है
नहीं समझ में आता है क्या मुझे हुआ है ,
                   बैचैनी सी छाई ,तन में भारी पन  है
मुश्किल होती ,श्वासोच्छ्वास  मुझे  करने में ,
                   और चैन से सोना आज हराम होगया
अम्मा बोली,घुमा फिरा कर बातें मत कर ,
                  काढ़ा पी ले,तुझको सिर्फ  जुकाम होगया

घोटू