Tuesday, December 9, 2014

अपनी अपनी अर्जी

          अपनी अपनी अर्जी
                       १
       लड़की की अर्जी
प्रभु ऐसा पति दीजिये ,कृपा कीजिये आप
मनमोहन सिंह की तरह,सीधा और चुपचाप
सीधा और चुपचाप ,पास हो काफी पैसा
और कमाई में हो मुकेश अम्बानी जैसा
दीवाना मजनू  सा ,करे प्रेम से सेवा
और इशारों पर नाचे बन कर प्रभुदेवा
                      २
           लड़के की अर्जी
पत्नी ऐसी दिलाना,तुम हमको भगवान
ऐश्वर्या  सी  रूपसी ,सुंदरता  की  खान  
सुंदरता की खान ,रखे वो साफ़ सफाई
घर के सारे काम ,करे बन शांता बाई
कह 'घोटू'कवि ,पतिकी सेवा करे रोजाना
हो संजीव कपूर ,बनाने में वो खाना
                    ३
      लालाजी की अर्जी
लालाजी करने लगे ,मंदिर में अरदास
नहीं चाहिए आपसे ,भगवन कुछ भी ख़ास
नहीं चाहिए ख़ास ,देवता है जो  सारे
'एक एक रूपया दिलवा दो,इनसे म्हारे '
है छत्तीस करोड़ देवताओ  से   अर्जी
आठ आठ आने ही दिलवा दो,जो हो मर्जी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

दास्ताने इश्क़

      दास्ताने इश्क़

जब कली से फूल बन कर ,हम खिले,तुम आ गए,    
    बन के भँवरे ,खुशबुएँ लेने को मंडराते रहे
सजा करके दिल के गुलदस्ते में हमको रख लिया ,
   पिरो कर  माला में  हमको ,गले लिपटाते  रहे
बेअदब और बेरहम हो ,नाम लेकर प्यार का ,
    दबाते हमको रहे तुम और तड़फ़ाते रहे
आपकी गुस्ताखियाँ कुछ ऐसी मन को भा गयी
  चाहता दिल,पेश यूं ही ,आप बस आते रहें

घोटू

तिल की बात-दिल की बात

        तिल की बात-दिल की बात

तिल तो  है आजाद ,बैठे ,कहीं भी जा जिस्म पर ,
            होठों पर जब बैठता है, कहते है  कातिल  इसे
गाल पर  जब बैठता, होती  निराली शान है ,
            फिर भी कितने लोग कहते, दिलजलों का दिल इसे
एक दिन हम भी लुटे थे ,इसी तिल के फेर में,
             तिल बड़ा ही तिलस्मी था ,हम पे जादू कर गया
गोरे गोरे गालों पर वो' ब्यूटी का स्पॉट' था ,
              दिल हमारा बावला हो ,उसी तिल पर मर गया
तूल कुछ ऐसी पकड़ ली,दीवानेपन  ने मेरे ,
               उनकी उल्फत ने हमारा  दिया ऐसा हाल कर
मेहरबाँ तिल यूं हुआ कि दिलरुबा वो बन गए ,
               उम्र भर नाचा  किये हम,उसी तिल की ताल पर 
दिल मिलाना छोड़ कर वो तिलमिलाने लग गए ,
                गुस्से में लगती हसीं ,जब गलती से हमने कहा
और तिल तिल जिंदगी भर ,यूं ही हम पिसते रहे,
                   हाल ये अब , इन तिलों में ,तैल ना बाकी  रहा   
दोस्तों अब क्या बताएं तुम को अपनी दास्ताँ ,
                   घुटते तिल तिल,हसीना कातिल से दिल हारे हुए
इसलिए ही जम के खाते ,तिल की पट्टी और गजक ,
                    लेते है गिन गिन के बदला ,तिल के हम  मारे हुए

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Saturday, December 6, 2014

नींद क्यों आती नहीं

              नींद क्यों  आती नहीं       

आजकल क्या हो गया है रात भर ही ,
उचट जाती ,नींद क्यों आती नहीं है
कभी दायें,कभी बांयें ,करवटें भर
कभी तकिये को दबाता,बांह में भर
तड़फता रहता हूँ सारी रात भर ,पर,
भाग जाती,नींद क्यों आती नहीं है
उचट जाती ,नींद क्यों आती नहीं है
रात की सुनसान सी तन्हाइयों में
भावनाओं की दबी  गहराइयों में
कभी चादर ,कम्बलों,रजाइयों में ,
लिपट जाती,नींद क्यों  आती नहीं है
उचट जाती,नींद क्यों आती नहीं  है
न तो चिंता से ग्रसित ना कोई डर है
न हीं कोई बुरी या अच्छी खबर  है
कितने ही अनजान सपनो का सफर है
भटक जाती ,नींद क्यों आती नहीं है
उचट जाती,नींद क्यों आती नहीं है
फेर मे ननयान्वे के   रहा फंस कर
रह न पाया ,जिंदगी भर स्वार्थ तज कर
कुटिलता की जटिलता में बस उलझ कर
छटपटाती ,नींद क्यों आती नहीं है
उचट जाती ,नींद क्यों आती नहीं है

मदन मोहन बाहेती''घोटू'


Friday, December 5, 2014

निवेदन - पत्नी से

    निवेदन  - पत्नी से

प्रियतमे !
बड़ी जलन होती है हमें
बैठती हो जब तुम टी वी से सटी
देखती हो उसे लगा टकटकी
बड़ी निष्ठां और नियम से
बड़े चाव और सच्चे  मन से
तल्लीन होकर हर पल
देखती हो टीवी के सीरियल
तब लगता है कि काश
आप आकर हमारे भी पास
करें हम पर नज़रें इनायत
और उस समय का बस दस प्रतिशत
भी हमारे लिए निकाल कर दें
तो सचमुच  हमें निहाल कर दें
सीरियल की तरह  हम में उलझ कर
चिपक कर बैठें ,हमें टीवी समझ कर
हमारी नज़रों से   नज़रें मिलाये
कभी कभी प्यार से मुस्करायें
सच हम धन्य हो जाएंगे
अगले एपिसोड तक ,आपके गुण गाएंगे
वैसे भी हम में और टीवी में एक कॉमन बात है
दोनों का ही रिमोट ,आपके हाथ है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

मोदी,पटेल और विलय

         मोदी,पटेल और विलय
             घोटू के छक्के
                      १
आये है गुजरात से, मोदी और  पटेल
दोनों माहिर खेलते ,राजनीति का खेल   
राजनीति का खेल ,खिलाड़ी दोनों पक्के
छुड़ा दिये ,अच्छे अच्छों के इन ने छक्के
एक  ने रजवाड़ों  की सत्ता   दूर  हटा  दी
और  एक  ने  कांग्रेस को  धूल    चटा  दी
                        २
जब आजादी मिली थी ,गया ब्रिटिश साम्राज्य
बंटा    हुआ   था   देश , थे,  छोटे  छोटे   राज्य
छोटे  छोटे   राज्य ,सभी  का विलय   कराया
और पटेल  ने  कैसे  भारत  संघ     बनाया
बिखरे थे  समाजवादी भी  कितने  दल में
विलय  कराया इन  सबका ,मोदी के ङर ने 

घोटू

Tuesday, December 2, 2014

आशिक़ की उल्फत

              आशिक़ की उल्फत

इतनी ज्यादा महोब्बत ,करता मेरा मेहबूब है
निभाने का आशिक़ी  ,उसका तरीका  खूब है
इतना ज्यादा दीवाना वो ख्याल रखता है मेरा
रोक डाला निकलने का ,रस्ता ही उसने  मेरा
चाहता है ,साथ उसके रहूँ  ,हरदम , हर  घड़ी
जब भी घर निकलूं, गुजरूं ,हो के ,मै उसकी  गली

घोटू