Monday, July 6, 2015

शिकायत -प्रियतमा से

         शिकायत -प्रियतमा से

 मैं करता थोड़ी छेड़छाड़ ,तुम देती हो फटकार प्रिये
क्या   है ये अदा सताने की , या फिर तुम्हारा प्यार प्रिये
तुम नहीं पवन से कुछ कहती ,जो आँचल रोज उड़ाती है
टकराती तुमसे बार बार  और जुल्फों  को  सहलाती है
 है नहीं शिकायत तुमको जब,मदमाती बूँदें  बारिश की
तुम्हारा बदन भिगो देती ,दीवाने ,पागल आशिक़ सी
वो बाथरूम का    आइना ,अंग अंग निहारा करता है
जब सजती और संवरती हो ,वो तुमको ताड़ा करता है
वो तुम्हे देख कर हँसता है ,खींसे निपोर ,आवारा सा
पर उसे देख तुम मुस्काती ,वो लगता तुमको प्यारा सा
ये सब के सब ही खुले आम,करते है तुमसे छेड़छाड़
पर तुमको अच्छी लगती है,उनकी ये हरकत बार बार
क्या मुझमे कांटे उगे हुए ,जो बदन तुम्हारा छीलेंगे
या मधुमक्खी बन लब मेरे, तेरा सब अमृत पी लेंगे
जो पास न आती हो मेरे ,इतने नखरे दिखलाती हो
मेरी बाहों से छिटक छिटक ,तुम दूर दूर हट जाती हो
तुम पास आओ,मैं बारिश  बन,तेरा अंग अंग भिगा दूंगा
मैं ह्रदय आईने में अपने ,तुम्हारा अक्स दिखा दूंगा
मेरी साँसों की गरम हवा ,देगी तुम्हारे उड़ा होश
दूने रस से  भर जाएंगे  ,तुम्हारे मादक मधुकोश
तुम मुझे समर्पित हो जाओ,जी भर मुझसे अभिसार करो 
सुख  का संसार बसा  दूंगा, तुम मुझे प्यार,बस प्यार करो

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
 

रूढ़ियाँ

                        रूढ़ियाँ
प्रगति हमने बहुत कर ली ,हो रहे है आधुनिक,
              चन्द्रमा ,मंगल ग्रहों पर रखा हमने हाथ है
रूढ़िवादी सोच लेकिन और पुरानी भ्रांतियां ,
               आज भी चिपकी हुई,  रहती  हमारे साथ है
'रेड लाईट 'पर भले ही ,हम रुकें या ना रुकें,
                बिल्ली रास्ता काट देती,झट से रुक जाते है हम
कोई भी शुभ कार्य हो या जा रहे हो हम कहीं,
                 छींक जो देता है कोई ,तो सहम जाते   कदम
आधुनिक से आधुनिकतम ,सुरक्षित,सुविधाजनक ,
                  खरीदा करते कई लाखों की मंहगी  कार हैं
किन्तु पूजा करके नीबू चार लेकर सड़क पर,    
                   चार पहियों से दबाना  ,आज भी बक़रार है
शुभ मुहूर्त देखते रहते है और हर काम में,
                     दिशाशूलम,राहुकालम,आज भी है रोकता  
 आज भी हम ठिठक जाते और लगता है बुरा ,
                     निकलते जब कहीं जाने और कोई टोकता
काम यदि जो बन न पाये कुछ भी हो कारण भले ,
                    और यदि जो कुछ बुरा उस दिन हमारे संग हुआ
अपनी कमजोरी या कमियां ,कुछ नहीं आती नज़र ,
                      सुबह मुंह देखा था जिसका ,उसे  देते   बददुआ
ठेकेदारी धर्म की पण्डे और पंडित कर रहे , 
                        भागवत की कथाएं अब बन गयी व्यापार है
 कुटिल साधू  संत  के संग,चल रहा सत्संग है,
                        पुरानी सब संस्कृति  का ,हुआ  बंटाधार  है
ज्योतिषी  को जन्मपत्री ,हस्त रेखाएं दिखा ,
                        हम ग्रहों का शांति पूजन ,कराते  हर रोज है
महिमामंडित खुद को कितना भी करें हम शान से ,
                       सत्य यह ,अब भी हमारी ,बड़ी कुंठित सोच है
 सवेरे दूकान ,ठेले  और हर   शोरूम  पर ,
                      नीबू और मिर्ची पिरोये  ,लटकते  मिल जाएगे
हम कहाँ थे ,और कहाँ है और कहाँ तक जाएंगे ,
                      पर  पुरानी  मान्यताएं  ,क्या बदल हम पाएंगे             

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Tuesday, June 30, 2015

                   देवी महिमा

जो भागदौड़ करती दिनभर और जिसके बल चलता है घर
छोटी छोटी सब बातों में  ,सारा घर भर ,जिस  पर  निर्भर
वह अन्नपूर्णा  है घर की  ,वह ज्ञानदायिनी , शिक्षक   है
पति की सुखदायक  रम्भा है और सास ससुर की सेवक है
वह रूप लिए कितने सारे ,है दिन भर ही खटती रहती
हर एक सदस्य के मन माफिक ,थोड़ा थोड़ा बंटती रहती
दे ससुर साहब को गरम दूध,सासू घुटनो पर तेल मले
और पतिदेव की फरमाइश पर चाय,पकोड़े गरम  तले
सबके सुख दुःख की साथी है,अपना कर्तव्य निभाती है
कोई को भी हो कुछ  पीड़ा   ,झट भागी भागी  जाती है
बच्चों को करवा होमवर्क, बाज़ार जाए,सौदा  लाये
देखे बिखरा और अस्त व्यस्त ,घर की सफाई में जुट जाए
वह टूटे हुए बटन टाँके ,और फटे  वस्त्र कर ठीक, सिये
दिन भर मशीन सी काम करे ,अपने मुख पर मुस्कान लिये 
वह ममता भरी हुई माँ है ,रक्षाबंधन ले बहना है
वह प्यार लुटाती पत्नी है ,है बहू जो घर का गहना है
वह सरस्वती है ,लक्ष्मी है , देवी दस हाथों वाली है
वह शक्तिशालिनी दुर्गा है,उसकी हर बात निराली है
वह सेवाव्रती  ,सुशीला है ,जिसके मन में है भरा प्यार
उस जग जननी ,माँ,देवी को ,है मेरा शत शत नमस्कार

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

तेरे संग भगवान है घोटू

  तेरे संग भगवान है घोटू

समय बड़ा  बलवान है घोटू
तू कितना   नादान  है  घोटू
वो ही इसको शांत  करेगा,
लाया जो  तूफ़ान है घोटू
जीवनपथ में कई अड़चने ,
सफर न ये आसान है घोटू
आज यहाँ तक जो तू पहुंचा,
ये उसका  अहसान है घोटू
वही करेगा एक दिन पूरे  ,
तेरे जो अरमान है घोटू
कल क्या होगा ,कोई न जाने ,
हर कोई अनजान है घोटू
उसके आगे सब है   बेबस,
कुछ भी ना इंसान है घोटू 
साथ नहीं कुछ भी जाएगा ,
दिखा रहा क्यों शान है घोटू 
तेरी  नैया पार करेगा ,
तेरे संग भगवान है घोटू

मदन मोहन बाहेती'घोटू'






पहली बरसात

              पहली बरसात

है हमें याद ,हम भीगे थे ,बारिश की पहली रिमझिम में
उस भीगे भीगे मौसम में भी आग लग गयी थी तन में
लहराता आँचल पागल सा था तेरे तन  से  चिपक गया
थे भीगे भीगे  श्वेत वस्त्र ,तेरा निखरा था  रूप नया
उस मस्त मचलते  यौवन ने,  कुछ ऐसा जादू ढाया था
तू भी थोड़ी पगलाई थी,मैं भी थोड़ा   पगलाया था
तू अमृतघट ले पनघट पर आयी थी प्यारी पनिहारन
मैंने निज प्यास बुझाई थी ,कर घूँट घूँट रस आस्वादन
तेरे गालों को सहला कर ,लब चूम रहे थे  जो मोती
मैंने हौले से निगल लिए थे एक एक कर सब मोती
और जी भर रसपान किया  ,बौराये दीवानेपन में
है हमें याद ,हम भीगे थे ,बारिश की पहली रिमझिम में

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

बरसात के रंग

            बरसात के रंग
                     १
रसिकलाल बरसात में तर होकर  घर जाय
पत्नी जी चिंता करे  ,  सर्दी  ना  लग जाय
सर्दी ना लग जाय  ,वस्त्र  जब  भीगे सारे
अपने हाथों झट  पत्नी जी  उन्हें   उतारे,
पोंछे उनका बदन  ,अगन तन में सुलगाये
तभी भीगने में आनन्द ,दोगुना   आये 
               २
उस भीगी बरसात में ,कितनी गर्मी आय
गरम गरम हो पकोड़े ,गरम गरम हो चाय
गरम गरम हो चाय ,हाल कुछ बिगड़े ऐसे
हो ऐसा  माहोल , कोई  फिसले  ना  कैसे
कह घोटू कविराय ,लगे हर चीज  सुहानी
रोज रोज यूं ही  बरसो ,तुम बरखा  रानी
                     ३
दुखीराम कहने लगे ,बड़े तुम्हारे ठाट
हम भीगें ,घर पर मिले ,पत्नीजी की डाट
पत्नीजी की डाट,बड़ी होती है फजीहत
बीबी कहती क्यों करते हो बच्चों सी हरकत
बड़े हो गए इतने   ,अकल ज़रा  ना आई
आज सुबह ही कपड़ों पर थी प्रेस  कराई

घोटू
 

काटा काटी

             काटा काटी
                      १
चाकू से फल सब्जियां ,काटकाट सब खाय
कैंची  टांगों  बीच जो ,  आये सो  कट  जाय
आये सो कट जाए ,  काटते दांत   कटीले
काटे कटे न रात ,काट मच्छर  खूं    पीले
कह घोटू कविराय ,जानता है मेरा  दिल
तनहाई की रात काटना कितना मुश्किल
                       २
कहते है जो  भौंकता , ना काटे  वो  'डॉग'
बुरा शकुन यदि जाय जो,बिल्ली रस्ता काट  
बिल्ली रस्ता काट  ,कटीले उनके  नयना
समय न कटता ,पड़े दूर जब उनसे रहना
'घोटू' उन संग सात ,अगन के काटे चक्कर
आगे पीछे काट रहे ,  चक्कर  जीवन भर
                           ३
मुफलिसी में कट रहे ,जनता के दिन रात
नेता  चांदी    काटते ,जब सत्ता  हो   हाथ
जब सत्ता हो हाथ  , काटते दिन मस्ती में
सर कढ़ाई में और उँगलियाँ  पाँचों घी में
कह 'घोटू'कविराय ,चरण तुम्हारे छूता
पदरक्षक कहलाय,,काट लेता पर जूता
                        ४
खाते थे जो   दांत  की काटी रोटी , मित्र
अब है कन्नी काटते ,क्या व्यवहार विचित्र
क्या व्यवहार विचित्र ,रहे आपस में कट कर
एक दूसरे  के  जो  रोज  काटते  चक्कर
कह घोटू जब स्वार्थ आदमी पर है छाता
तो फिर भाई से भाई भी है कट  जाता
                           ५
चूना ज्यादा पान में ,खाओ ,कटे जुबान
पत्नीजी की बात ना ,काट सके  श्रीमान
काट सके श्रीमान, बात कर प्यारी प्यारी
पति की काटे जेब ,पत्नियां बड़ी निराली
प्यार जता कर ऐसा काटे और फुसलाये
अब तक उसका काट ,देव तक जान न पाये
                       ६
'घोटू' तुम उड़ते रहो ,बंधे डोर के संग
वरना कट हो जाओगे ,जैसे  कटी पतंग
जैसे कटी पतंग  ,कटे ना जीवन  रस्ता
कटे कटे से रह कर होगी हालत   खस्ता
कह घोटू कविराय ,उमर भर काटा स्यापा
संकट काटो प्रभू ,चैन से    कटे  बुढ़ापा

मदन मोहन बाहेती'घोटू'