Tuesday, November 10, 2015

बदलता मौसम

        बदलता मौसम

धुंधली धुंधली सुबह ,साँझ  भी धूमिल  धूमिल
शिथिल शिथिल सा तन है,मन भी बोझिल बोझिल 
शीतल शीतल पवन ,फ़िज़ा बदली बदली है
 मौसम  ने ये  जाने  कैसी  करवट  ली  है
बुझा बुझा सा सूरज कुछ खोया खोया  है
अलसाया अलसाया दिन, सोया सोया  है 
सिहरी सिहरी रात ,हुई  हालत पतली  है
मौसम ने  ये  जाने  कैसी  करवट ली  है
टूटे टूटे सपन , कामना  उधड़ी  उधड़ी
चिन्दी चिन्दी चाह,धड़कने उखड़ी उखड़ी
छिन्न छिन्न अरमान ,तबियत ढली ढली है
मौसम   ने  ये  जाने  कैसी  करवट ली  है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

फिर से मेग्गी -चार दोहे

         फिर से मेग्गी -चार दोहे

ना तो भाये पूरी कचौड़ी ,और ना भाये मिठाई
बहुत दिनों के बाद प्लेट में ,मेग्गी माता आई

मन में फुलझड़ियाँ छूटे ,फूटे खूब पटाखे
लक्ष्मीमाता को पूजेंगे ,मेग्गी नूडल खाके

वही सुनहरी प्यारी आभा,वो  ही स्वाद पुराना
बहुत दिनों के बाद मिला  है ये मनभावन खाना

नरम मुलायम यम्मी यम्मी ,खाकर मन मुस्कायो
दीवाली पर तुम्हे देख कर,'प्रेम रतन धन पायो '

घोटू

Monday, November 2, 2015

वो कौन है

          वो कौन है

जिसकी एक नागा भी नागवार गुजरे ,
 वो जब तक ना आये ,बैचैनी  बढ़ती
जिसके आने से मिलती दिल को राहत ,
जिसका रास्ता ,रोज निगाहें है तकती
मुझसे भी ज्यादा मेरी बीबीजी को ,
इन्तजार होता है जिसके आने का
उसके संग होती मीठी मीठी बातें,
जली कटी सब मुझको सिर्फ सुनाने का
आस पास की सारी खबरें जो देती,
किस का किस के साथ चल रहा है लफड़ा 
जिस दिन उसकी मेहर नहीं होती है तो,
उस दिन सारा घर लगता उजड़ा उजड़ा
जिसके आने से घरबार संवर जाता ,
जिसकी,फुर्ती,तेजी ,हर बात निराली है
मुझसे भी ज्यादा मेरी बीबीजी को,
लगती प्यारी ,वो बाई  कामवाली  है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
          

पिछलग्गू पुरुष

       पिछलग्गू पुरुष

पुरुष की अग्रणीयता ,
शादी के पहले चार फेरों तक ही सीमित रहती है
क्योंकि उसके बाद,बाकी तीन फेरों में,
औरत आगे आ जाती है ,
और उसके बाद,उमर भर,पति से आगे ही रहती है
पति बेचारा,पिछलग्गू बना ,
उसकी हर बात मानता है
उसके इशारों पर नाचता है ,
ये बात सारा जमाना जानता है
अंग्रेजी में भी 'लेडीज फर्स्ट' याने,
महिलाओं को वरीयता दी जाती है
पुरुष मेहनत कर , धनार्जन करता है ,
पर औरतें गृहलक्ष्मी कहलाती है
घर की सुख शांति के लिए ,
इनकी हाँ में हाँ मिलाना आवश्यक होता है
और जो पति ये नहीं करता,रोता है
इसलिए जो भी पुरुष ,
पत्नी का अनुगामी बन ,
उसके पीछे पीछे चलता है
उसे जीवन के सब सुख प्राप्त होते है ,
और वो फूलता,फलता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Thursday, October 29, 2015

ऊनी वस्त्रो की पीड़ा

          ऊनी वस्त्रो की पीड़ा

अजब तक़दीर होती है ,हम स्वेटर और शालों की
सिर्फ सर्दी में मिलती है ,सोहबत हुस्नवालों की
गर्मियों वाले मौसम में, विरह की  पीर  सहते है
बड़े घुट घुट के जीते है ,सिसकियाँ भरते रहते है
दबे बक्से में रखते है ,दबाये  दिल के सब अरमां
आये सर्दी और हो जाए,मेहबाँ हम पे मोहतरमा
याद आती,भड़क जाती,दबी सब भावना मन की
गुलाबी गाल की रंगत ,वो संगत रेशमी तन की
भुलाये ना भुला पाते, तड़फती हसरतें दिल की   
थी कल परफ्यूम की खुशबू,है अब गोली फिनाइल की
बड़ी मौकापरस्ती है ,ये फितरत हुस्नवालों की
अजब तक़दीर होती है ,इन स्वेटर और शालों की

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

मौसम के मुताबिक़ चलो

           मौसम के मुताबिक़ चलो

गर्मी में गोला  बर्फ का ,सर्दी में रेवड़ी ,
                           जो बेचते है ,साल भर उनकी कमाई है
सर्दी में शाल,कार्डिगन,गमी में स्लीवलेस ,
                             पहनावा पहने औरतें पड़ती दिखाई है
 गर्मी में ऐ सी ,कूलरों में आती नींद है ,
                             सर्दी में हमको ओढ़नी पड़ती  रजाई है
मौसम के मुताबिक़ ही बदलो अपनेआप को ,
                            इसमें ही सुख है ,फायदा,सबकी भलाई है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'            

किस्मत -कुत्ते की

          किस्मत -कुत्ते की

हर कुत्ते की ऐसी किस्मत कब होती है ,
           कोई कोठी या बंगलें में पाला जाए
हो उसको नसीब सोहबत ऊंचे लोगों की,
          बिस्किट और दूध खाने को डाला जाए
जब जी चाहे प्यार दिखाए 'मेडम जी'कॉ ,
       जब जी चाहे उनके चरण कमल को चूमे 
नाजुक नाजुक प्यारे हाथ जिसे सहलाएं ,
       जब जी चाहे ,मेडम  की बाहों  में  झूमे
साहब को घर छोड़ ,सवेरे शाम प्रेम से ,
       घर की मेडम जिसे प्यार से हो टहलाती
उसके संग संग ,खेल खेल कर गेंदों वाला ,
       बड़े प्यार से हो अपने मन को बहलाती
जिसको घर के अंदर बाहर ,हर कोने में,
        हो स्वच्छंद विचरने की पूरी आजादी
जो मालिक के बैडरूम में और बिस्तर पर,
          प्रेमप्रदर्शन  करने का हो हरदम आदी
अगर अजनबी कोई जो घर में घुस जाए,
         भौंक भौंक कर ,वो उसका जी दहलाता हो
लेकिन एक इशारे पर मालिक के चुप हो,
          दुम को दबा  ,एक कोने में छुप जाता  हो
बाकी कुत्ते गलियों में घूमा करते है ,
          फेंकी रोटी खा कर पेट भरा  करते  है
उनका कोई ठौर ठिकाना ना होता है,
           आवारा से आपस में  झगड़ा करते है
 पर ये किस्मतवाला रहता बड़े शान से ,
              खुशबू वाले शेम्पू से नहलाया जाए
 हर कुत्ते की कब ऐसी किस्मत होती है ,
               कोई कोठी या बंगले में पाला जाए 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'