Saturday, September 24, 2016

दीवान की दीवानगी


एक गोकुल था जहाँ कान्हा बजाता बांसुरी,
निकल कर के घर से आती,भागी भागी गोपियाँ 
यहाँ भी आते निकल ,दीवाने सब व्यायाम के ,
सवेरे दीवानजी की,बजती है जब  सीटियां 
फर्क ये है कि वहां पर ,वो रचाते रास थे ,
और यहाँ  होता  सवेरे ,योग और व्यायाम है 
वहां जुटती गोपियाँ थी,यहाँ सीनियर सिटिज़न ,
दीवान की दीवानगी का ,ये सुखद अंजाम है 

घोटू 

Friday, September 23, 2016

प्रियतमा तुम ,मै पिया हूँ


गीत मै  हूँ ,रागिनी तुम ,
भाव मै हूँ,भंगिमा  तुम 
साज मै ,संगीत हो तुम,
चाँद मै हूँ,पूर्णिमा  तुम 
राह मै हूँ,तुम हो मंजिल,
नाव मै हूँ,तुम हो साहिल
मै अगर तन,प्राण तुम हो,
तुम हो धड़कन ,मैं अगर दिल 
मैं हूँ ऊँगली ,अंगूठी तुम,
मै हूँ चूड़ी ,तुम खनक हो 
वृक्ष हूँ मैं , छाँव हो तुम ,
फूल हूँ मै ,तुम महक हो 
सूर्य हूँ मैं ,तुम उषा हो,
मैं हूँ बदली,नीर हो तुम 
मैं हूँ मजनू,तुम हो लैला,
मै हूँ रांझा,हीर हो तुम 
मै  क्षुधा हूँ ,तुम हो भोजन ,
तुम्हो पानी,प्यास हूँ मै 
तुम ख़ुशी,आल्हाद हूँ मै ,
आस तुम,विश्वास हूँ मै 
तुम हो नदिया,मै समंदर,
प्रेरणा तुम,कर्म हूँ मै 
दान तुम,संकल्प हूँ मै ,
आस्था तुम,धर्म हूं मै 
यज्ञ हो तुम,आहुति मै ,
तुम हो बाती ,मै दिया हूँ 
एक दूजे में बसे हम,
प्रियतमा तुम,मैं पिया हूँ 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

आस मत दो

आस मत दो

गर मुझे अपना बना सकते नहीं तुम,
तो परायेपन का भी अहसास मत दो
मिलन का सुख यदि मुझे दे नहीं सकते ,
तो जुदाई का मुझे तुम त्रास मत दो
है अलग यदि रास्ते ,मेरे तुम्हारे ,
इस सफर में संग ना चल पाएंगे हम
मोड़ शायद कोई तो ऐसा मिलेगा ,
जहाँ फिर से अचानक टकराएंगे हम
जानता हूँ ,फूल तो दोगे  नहीं तुम,
चुभे मन को ,कोई ऐसी फांस मत दो
गर मुझे अपना बना सकते नहीं तुम,
तो परायेपन का भी अहसास मत दो
लाख हम चाहें ,करें कोशिश कितनी,
मेल लेकिन हर किसी से हों न  पाता
अड़चने आ रोकती पथ,मिल न पाते,
यह मिलन का योग लिखता है विधाता
बता कर मजबूरियां ,मत सांत्वना दो,
मिलेंगे अगले जनम में,आस मत दो
गर मुझे अपना बना सकते नहीं तुम ,
तो परायेपन का भी अहसास मत दो

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
 

हम पुलिस है

जब थे वो सत्ता में
हम थे उनकी सुरक्षा में
उन्हें सेल्यूट ठोकते थे
उनके इशारों पर डोलते थे
पर जब परिस्तिथियाँ बदली
सत्ता उनके हाथों से निकली
और वो विपक्ष में है
पर हम तो सत्ता के पक्ष में है
और जब वो करते है प्रदर्शन
सत्ताधारियो के इशारे पर हम
उन पर लाठियां भांजते है
जब की हम जानते है
भविष्य के बारे में क्या कह सकते है
वो कल फिर सत्ता में आ सकते है
पर हमारी तो ये ही मुसीबत है
कि हम कुर्सी के सेवक है
आज जिन्हें लाठी मार कर पड़ता है रोकना
कल उन्ही को पड़ सकता है सलाम ठोकना
कई बार सत्ता के इशारे पर
अपने ज़मीर के भी विरुद्ध जाकर
सभी मर्यादाओं को,अलग ताक पर रख कर 
सो रही औरते और संतों पर
रात के दो बजे भी लाठियां मारी है
क्या करें नौकरी की ये लाचारी है 
कभी अपने आप पर भी ये मन कुढ़ता है
नौकरी में क्या क्या करना पड़ता है
अपनी ही हरकतों से आ गए अजीज है
 हमारे मन को कचोटती यही टीस है
जी हाँ ,हम पुलिस  है

Sunday, September 18, 2016

पश्चाताप

मैंने गर्वोन्वित हो सबको किया तिरस्कृत ,
     मेरे माँ और बाप,बहन भाई थे अच्छे
जैसा मैंने किया ,मिला मुझको भी वैसा ,
     मुझको नहीं पूछते ,बिलकुल,मेरे बच्चे
मैंने कितने मन्दिर और देवता पूजे ,
      मातृदेवता,पितृदेवता भूला  गया मैं
वो जो हरदम ,मेरे आंसू रहे पोंछते,
      उनकी धुंधलाई आँखों को रुला गया मै
तीर्थयात्राएं की ,अन्नक्षेत्र खुलवाये ,
     जगह जगह पर मैंने करवाये भंडारे
लेकिन घर के एक कोने में गुमसुम बैठे ,
    जो मिल जाता ,खा लेते ,माँ बाप बिचारे
दीनो को कम्बल बंटवा ,फोटो खिंचवाए ,
     फटी रजाई ,माँ की लेकिन बदल न पाया
सच तो ये है ,मैंने जैसा ,जो बोया था ,
      आज बुढापे में,वैसा ही फल है पाया

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
चन्दन और पानी

तुमने अपने मन जीवन में ,
जबसे मुझे कर लिया शामिल
जैसे चन्दन की लकड़ी को,
गंगाजल का साथ गया मिल
कभी चढूं विष्णु चरणों पर
कभी चढूं शिव के मस्तक पर
अपनेजीवन करू समर्पित,
प्रभु पूजन में ,घिस घिस,तिल तिल 
सुखद सुरभि  मै फैलाऊंगा
शीतलता ,तन पर  लाऊंगा
औरों को सुख देना ही तो,
मेरा मकसद,मेरी मंजिल

घोटू
हमारी धृष्टता

बड़ी अजीब होती है आदमी की प्रवत्तियाँ
वह कभी भी ,अपनी घरवाली से सन्तुष्ट होता,
उसे सदा ललचाती ,औरों की स्त्रियां
उसके लालच की पराकाष्टा ,
तब स्पष्ट नज़र आती है
जब वह मन्दिर में जा ,
देवताओं को पूजता है
वहाँ पर भी ,पराई स्त्री का ,
लालच ही उसे सूझता है
गणेशजी को मोदक चढ़ा ,
उनके गले में फूल की माला टांगता है
और बदले में उनसे उनकी पत्नी,
रिद्धि और सिद्धि माँगता है
भगवान विष्णु के आराधन में ,
विष्णु सहस्त्रनाम सुमरता है
और उनसे उनकी पत्नी ,
लक्ष्मी जी की याचना करता है
करता है शिवजी की भक्ति
और मांगता हूँ उनसे उनकी शक्ति
आपको कैसा लगेगा ,
सच सच बतलाइये आप
आपके सामने ही कोई आपकी ,
पत्नी या प्रेमिका का करे जाप
पर ये बेझिझक ,कृष्ण के सामने ही ,
कृष्ण के मन्दिर में जपता  है 'राधे राधे'
किसी और की पत्नी की चाहत ,
कोई अच्छी बात नहीं है ,
ये कोई उसको समझा दे

मदन मोहन बाहेती'घोटू'