Friday, July 7, 2017

टॉवर एक की रंगीन किट्टी 
१ 
किट्टी टावर एक की ,करती है इम्प्रेस 
थीम रखी सबआएँगी ,पहन कलरफुल ड्रेस 
पहन कलरफुल ड्रेस ,रंग जो ज्यादा लावे
 प्राइस की हक़दार वही महिला कहलावे 
कह घोटू कविराय ,खेल कुछ ऐसा खेला 
होटल में लग गया ,कई रंगों का मेला 
२ 
वैसे ही सब सुंदरी ,एक से बढ़ कर एक 
आयी बन कर कलरफुल पहने रंग अनेक 
पहने रंग अनेक ,लगी जब वे सब सजने 
चूड़ी,कुर्ती पहन ,लिपस्टिक से लब रंगने 
घोटू बोले ,हाथों में  मेंहदी  रचवालो 
और शरमा कर,गाल गुलाबी ,निज कर डालो 
३ 
घोटू पत्नी ने लगा ,रंगों का अम्बार 
कहा आत्मविश्वास से,जीतूंगी इस बार 
जीतूंगी इस बार ,देख कर अटल इरादा 
पत्नी के उन्नीस रंग थे सबसे ज्यादा 
रंग बीसवां था रंगीन मिजाजी वाला 
और इक्कीसवाँ रंग ,चढ़ा प्रीतम का प्यारा 

घोटू 

Tuesday, July 4, 2017

नदिया  यूं बोली सागर से 

तुम्हारा विशाल वक्षस्थल ,देख उछलती लहरें मन में 
इतनी थी मैं हुई बावरी, दौड़ी  आयी तुमसे मिलने 
तुम्हारा पहला चुम्बन जब ,लगा मुझे कुछ खारा खारा 
मैंने सोचा ,हो जाओगे ,मीठे हो जब मिलन  हमारा  
अपना सब मीठापन लेकर ,रोज आई  मैं पास तुम्हारे 
लेकिन तुम बिलकुल ना बदले ,रहे वही  खारे  के खारे  
तुमने तप कर ,बादल बन कर ,उड़ा दिया मीठापन सारा 
जन और जगती के जीवन हित ,देखा जब ये त्याग तुम्हारा 
तमने अपना स्वार्थ न देखा ,किया समर्पित अपना जीवन  
देख परोपकारी अंतर्मन ,भूल गयी मैं सब  खारापन 
इसीलिए बस दौड़ी दौड़ी ,तुमसे मिलने भाग रही हूँ 
पूर्ण रूप से ,तुम्हे समर्पित , निज मीठापन  त्याग रही हूँ 

घोटू 
सुख दुःख बाँटें 

नहीं हमको सिर्फ मीठा सुहाता ,सिर्फ हम नमकीन  खा  सकते नहीं 
मीठे और नमकीन का जब मेल हो,मज़ा आता खाने का ,तब ही सही 
वैसे जीवन में किसी को सुख सिरफ ,और किसी को दुःख सिरफ मिलते रहे 
रहे कोई मुश्किलों से जूझता ,फूल खुशियों के कहीं खिलते रहें 
अपने सुख ,दुःख और समस्याएं सभी ,मीठे और नमकीन सी हम बाँटले 
मुश्किलों के सारे दिन काट जायेंगें , जिंदगी का मज़ा मिल कर साथ  लें 

घोटू  
खारा समंदर कर दिया 

नदियों ने तो मीठा जल ही ,समंदर में भरा था,
उसका मीठापन सभी पर गुम हुआ जाने कहाँ 
कभी मंथन करने पर जो ,उगला करता रत्न था ,
बात ऐसी क्या हुई अब पहले जैसा ना  रहा 
हंस के मिल के ,संग रहती ,सब की सब जो मछलियां ,
हुई एक दूजे की दुश्मन ,भय था अंदर भर दिया 
इस तरह से अहम जागा ,मित्रता गायब हुई  ,
आपसी टकराव ने ,खारा समंदर  कर दिया 

घोटू 

Sunday, July 2, 2017

दामाद का दर्द 

अपनी पत्नी से परेशान 
एक शादीशुदा  नौजवान 
जब अपनी पत्नी की ज्यादतियों को,
झेल नहीं पाया 
तो अपने ससुर के पास जाकर,
अपना दुखड़ा  रोते हुये  गिड़गिड़ाया 
ससुरजी ,आपने भी बनाया है क्या आइटम 
जो मेरा ही सर खाती  रहती है हरदम 
छोटी छोटी बात पर झगड़ती रहती है 
मेरे माबाप से लड़ती रहती है 
घर को परेशानियों से भर दिया है 
मेरा जीना दूभर कर दिया है 
हो गया मेरा बड़ा गर्क है 
मेरा जीवन बन गया नर्क है 
आप प्लीज ,अपनी बेटी को समझाओ ,
और दे दो थोड़ा ज्ञान 
मुझे चैन से जीने दे ,ना करे परेशान 
जमाई की बात सुन कर ,
ससुरजी सेंटीमेंटल होने लगे 
और दामाद के आगे ,
अपना दुखड़ा रोने लगे 
बोले बेटा ,मै तेरा दर्द समझ सकता हूँ 
क्योंकि मै भी इसी पीड़ा में जलता हूँ 
मुझे तेरी पीड़ाओं का ज्ञान है 
क्योंकि जिस कपडे के टुकड़े तू परेशान है 
पिछले कई वर्षों से मेरे पास ,
उस कपडे का पूरे का पूरा थान है 
अब जैसे भी है,काम चलाले 
जैसे मैंने निभाई  है ,तू भी निभाले 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
बुढ़ापे की एक शाम ,ऐसे भी कट जाती है 

दो वरिष्ठ वृद्धजन ,
अपनी तन्हाई की शामे ,
इस तरह बिताते है 
शहर की व्यस्त सड़क पर ,
फैशन गारमेंट की दूकान के सामने,
सीढ़ियों पर बैठ कर ,
इधर उधर नज़रें घुमाते है 
और घंटो बतियाते है 
उनका यह अड्डा और ये दिनचर्या ,
यार दोस्तों में चर्चा का विषय बन गया है 
आखिर  एक दिन हमने पूछ ही लिया ,
रोज घंटो करते ,इतनी बातें होती ही क्या है 
उनमे से एक मुस्कराया और बोला 
यार हम तो वहां बैठ कर,नज़रें सेकते है 
आती जाती हुई महिलाओं को देखते है 
अगर महिला जवान हुई ,
तो उसके रूप की चर्चा करते है 
और उसकी हुलिया और चालढाल ,
फिल्म की किस हीरोइन से मिलती जुलती है ,
यही सोचा करते है 
अगर वो महिला,प्रोढ़ा या ढलती उमर की हुई,
तो गौर से निहारते है उसकी हालत 
और खंडहर को देख कर ,
ये अंदाज लगाने की कोशिश करते है  
कि अपने पूर्ण वैभव के दिनों में,
कितनी बुलंद रही  होगी वह इमारत 
और अगर वो बढ़ती हुई उमर की ,
कमसिन किशोरी हुई तो कयास लगाते है ,
कि बड़ी होकर वो कैसी नज़र आएगी 
अपने हुस्न के जादू से कितनो पर सितम ढायेगी 
यही नहीं ,दूकान में और भी ,
कितनी ही जोड़ियां आती जाती है 
उनकी गतिविधियां ,
उनके पारिवारिक जीवन के बारे में ,
काफी कुछ बतलाती है 
पति पत्नी की जोड़ी  दूकान के अंदर ,
साथ साथ तो जाती है 
पर थोड़ी देर बाद पति,
 बाहर निकल कर ,टहलने लगता है 
औरपत्नी अंदर ही रह जाती है
इससे पता लगता है मियां बीबी में ,
थोड़ी कम ही बनती है 
और अपनी अपनी पसंद को लेकर ,
दोनों में  में काफी ठनती है 
और कुछ पति पत्नी जब  बाहर आते है और 
पति का हाथ, शॉपिंग बैग्स से होता है लदा 
इससे पता लग जाता है ,
कि उनका वैवाहिक जीवन  
खुशियों से भरा रहेगा सदा 
बस यही हमारा शगल है 
मस्ती से वक़्त जाता गुजर है 
इन सब चीजों पर चर्चाएं ,
हमारे मन को बहलाती है 
और बुढ़ापे की एक और शाम ,
मस्ती से  कट जाती है 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Wednesday, June 28, 2017

एक दिन तुम ना रहोगे 


कब तलक यूं ही घुटोगे और आंसूं बन बहोगे 
एक दिन मै ना रहूँगा ,एक दिन तुम ना रहोगे 

हर इमारत की बुलंदी ,चार दिन की चांदनी है 
जहाँ पर रौनक कभी थी ,आज स्मारक बनी है 
पुराने महलों ,किलों से ,खंडहर बन कर ढ़होगे 
एक दिन मै ना रहूँगा,एक दिन तुम ना रहोगे 

तुमने तिनका तिनका चुन कर ,घोंसला था जो बनाया 
तिनका तिनका हो गया वो ,चार दिन बस  काम आया 
जाएंगे उड़ सब परिंदे ,  तुम बिलखते ही रहोगे 
एक दिन मै ना रहूंगा ,एक दिन तुम ना रहोगे 

वक़्त किसके पास है,कर कोई रहता व्यस्त हरदम 
सभी पीड़ित,व्यथित ,चिंतित,कोई ज्यादा तो कोई कम 
नहीं कोई भी सुनेगा ,वेदना किससे  कहोगे 
एक दिन मै ना रहूँगा,एक दिन तुम ना रहोगे 

बहुत गर्वित हो रहे हो,कर कमाई ढेर सारी 
लाख तुम करलो जतन पर जाओगे बस हाथ खाली 
बन के एक तस्वीर,कुछ दिन,दीवारों पर ,टंग रहोगे 
एक दिन मै ना रहूँगा,एक दिन तुम ना रहोगे 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'