http://blogsmanch.blogspot.com/" target="_blank"> (ब्लॉगों का संकलक)" width="160" border="0" height="60" src="http://i1084.photobucket.com/albums/j413/mayankaircel/02.jpg" />
Wednesday, May 15, 2019
आशीर्वाद
Wednesday, May 8, 2019
सास और बहू
सास और बहू
सास भी कभी बहू थी ,हुई पुरानी बात
अब तो पहले दिवस से ,बहू बने है सास
बहू बने है सास ,छीन माता का जाया
क्या जादू करती है बेटा बने पराया
कह घोटू काविराय मिटेगा कब ये अन्तर
कब से बहू रहेगी घर में बेटी बन कर
घोटू
Monday, May 6, 2019
मुफ़्तख़ोर
हम बिना परिश्रम किए हुये करना चाहें सबकुछहासिल
और बड़े शौक़ से खाते है जो माल मुफ़्त का जाये मिल
एसा लालच का भूत चढ़ा जो छोड़े नहीं छूटता है
जब भी जिसको मौक़ा मिलता वो खुल्ले हाथ लूटता है
है फ़र्क़ यही कुछ बाहुबली , लूटा करते है सरेआम
कुछ चोरी छुपे आस्ते से , करते रहते है यही काम
इस लूट खसोट रोज़की में ,तू भी शामिल मैं भी शामिल
और बड़े शौक़ से खाते हैं जो माल मुफ़्त का जाये मिल
हम कैसे भी कुछ पाने को करते रहते है दंद फंद
है पास नहीं फूटी कोड़ी पर हमें चाहिये कलाकंद
रहते जुगाड़ के चक्कर में फोकट में सबकुछ मिल जाये
बिन हींग फिटकड़ी लगे हुये हम चाहें रंग चोखा आये
ना चलें थकें घर पर बैठे हम तक ख़ुद आजाये मंज़िल
और बड़े शौक़ से खाते है जो माल मुफ़्त का जाये मिल
सबकी इच्छा रहती,बहती गंगा में हाथ साफ़ कर लें
एसे वैसे या कैसे भी ,अपनी अपनी झोली भर लें
मिल जाये ख़ज़ाना गढ़ाहुआ,याखुले लाटरीकिसीदिवस
छप्पर चाहे फट जाये पर ऊपर से सोना जाय बरस
मिल जाये बीबी रम्भा सी ,ख़ुद हो या ना उसके क़ाबिल
और बड़े शौक़ से खाते है जो माल मुफ़्त का जाये मिल
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
Sunday, May 5, 2019
अर्थ का अनर्थ
---------------------
मैंने जब उनसे पूछा ,जीने की राह बतादो,
वो गए सीडियों तक और ,जीने की राह बता दी
वो लगे बैठ कर सीने,कुछ कपडे नए ,पुराने,
जब मैंने उनको सीने से लगने की चाह बता दी
मै बोला आग लगी है, तुम दिल की आग बुझा दो
,वो गए दौड़ ले आये,दो चार बाल्टी पानी
देकर सुराही वो बोले,जी चाहे उतना पी लो,
मैंने जब उनको अपनी ,पीने की चाह बता दी
मदन मोहन बहेती 'घोटू'
Saturday, May 4, 2019
एक वो भी ज़माना होता था
एक वो भी ज़माना होता था
जब तुम्हें अम्मा की याद आती थी
और तुम जिद करके मैके चली जाती थी
पर मुझसे दूर रहकर जब सताती थी विरह पीड़ा
और तुम्हें सोने नहीं देता था मेरी याद का कीड़ा
तुम मुझे बार बार याद किया करती थी
तुम्हारी बेचैनी तुम्हारे ख़तों में झलकती थी
तुम लिखा करती थी होकर के बेक़रार
आइ लव यू 'मैं करती हूँ तुम्हें बहुत प्यार
बस मुझे लिवाने आ जाओ चिट्ठी को समझ कर तार
वो भी क्या दिन थे ,अजीब सा दीवनापन था
तन्हाई में आग लगाता सावन था
गरमी में सिहरन और सर्दी में पसीना आता था
एक दूजे के बिन पल भर भी नहीं जिया जाता था
और अब
दो चार दिन के लिये भी तुम मैके जाती हो जब
रास्ते में मोबाइल से चार बार
और मैके पहुँच कर व्हाटएप पर बार बार
मुझसे पूछती हो क्या हाल है
फ्रिज में रख कर आइ हूँ ,रोटी और दाल है
गरम करके ख़ा लेना
और याद रख कर टाइम से दवा लेना
काम वाली बाई
आइ या नहीं आइ
उससे ठीक से करवा लेना घर की सफ़ाई
तुम्हारी शुगर बढ़ी हुई है , ख़याल रखना
भूल कर भी मिठाई मत चखना
रोज़ रात को दूध गरम करके पी लेना
दो चार दिन हमारे बग़ैर भी जी लेना
सर भारी हो तो बाम लगा लेना
नारियल पानी नारियल वाले से रोज़ मंगालेना
टीवी के चक्कर में ज़्यादा देर से मत सोना
गरम पानी से नहाना और चड्डी बनियान मत धोना
मुझे तरह तरह की शिक्षा देती रहती हो
पर पहले की तरह 'आई लव यू 'कभी नहीं कहती हो
क्या बूढ़ापे में प्यार प्रदर्शन का तरीक़ा बदल जाता है
एक दूसरे की तबियत का ध्यान पहले आता है
जवानी का प्यार हुआ करता है तूफ़ानी
कुछ आग दिल की कुछ आग जिस्मानी
बुढ़ापे का इश्क़ मगर तिमारदारी है
पर उसमें छुपी मोहब्बत पड़े सब पे भारी है
बुढ़ापे का दर्द पति पत्नी मिल कर बाटते है
एक दूसरे के पैर के नाख़ून काटते है
बुढ़ापे के प्यार का एक अलग अपनापन है
एक दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पण है
पति पत्नी का आपस में अटूट बंधन बंध जाता है
प्यार का सही मतलब बुढ़ापे में ही समझ आता है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
एक वो भी ज़माना होता था
एक वो भी ज़माना होता था
जब तुम्हें अम्मा की याद आती थी
और तुम जिस करके मैके चली जाती थी
पर मुझसे दूर रहकर जब सताती थी विरह पीड़ा
और तुम्हें सोने नहीं देता था मेरी याद का कीड़ा
तुम मुझे बार बार याद किया करती थी
तुम्हारी बेचैनी तुम्हारे ख़तों में झलकती थी
तुम लिखा करती थी होकर के बेक़रार
आइ लव यू 'मैं करती हूँ तुम्हें बहुत प्यार
बस मुझे लिवाने आ जाओ चिट्ठी को समझ कर तार
वो भी क्या दिन थे ,अजीब सास दीवनापन था
तन्हाई में आग लगाता सावन था
गरमी में सिहरन और सर्दी में पसीना आता था
एक दूजे के बिन पल भर भी नहीं जिया जाता था
और अब
दो चार दिन के लिये भी तुम मैके जाती हो जब
रास्ते में मोबाइल से चार बार
और मैके पहुँच कर व्हाटएप पर बार बार
मुझसे पूछती हो क्या हाल है
फ्रिज में रख कर आइ हूँ ,रोटी और दाल है
गरम करके ख़ा लेना
और याद रख कर टाइम से दवा लेना
काम वाली बाई
आइ या नहीं आइ
उससे ठीक से करवा लेना घर की सफ़ाई
तुम्हारी शुगर बढ़ी हुई है , ख़याल रखना
भूल कर भी मिठाई मत चखना
रोज़ रात को दूध गरम करके पी लेना
दो चार दिन हमारे बग़ैर भी जी लेना
सर भारी हो तो बाम लगा लेना
नारियल पानी नारियल वाले से रोज़ मंगालेना
टीवी के चक्कर में ज़्यादा देर से मत सोना
गरम पानी से नहाना और चड्डी बनियान मत धोना
मुझे तरह तरह की शिक्षा देती रहती हो
पर पहले की तरह 'आई लव यू 'कभी नहीं कहती हो
क्या बूढ़ापे में प्यार प्रदर्शन का तरीक़ा बदल जाता है
एक दूसरे की तबियत का ध्यान पहले आता है
जवानी का प्यार हुआ करता है तूफ़ानी
कुछ आग दिल की कुछ आग जिस्मानी
बुढ़ापे का इश्क़ मगर तिमारदारी है
पर उसमें छुपी मोहब्बत पड़े सब पे भारी है
बुढ़ापे का दर्द पति पत्नी मिल कर बाटते है
एक दूसरे के पैर के नाख़ून काटते है
बुढ़ापे के प्यार का एक अलग अपनापन है
एक दूसरे के प्रति पूर्णसमर्पण है
पति पत्नी का आपस में अटूट बंधन बंध जाता है
प्यार का सही मतलब बुढ़ापे में हीसमझ आता है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'