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Alex Peters
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Thursday, August 27, 2020
Wednesday, August 26, 2020
संकट में भगवान
मंदिर में सन्नाटा पसरा ,देव सभी मिल बात करे
इस कोरोना वाइरस ने , बहुत बुरे हालत करे
रोज भक्त जो मंदिर आते ,हमको शीश झुकाते थे
भजन कीर्तन मंत्र पाठ कर ,प्रभु की महिमा गाते थे
पर जब से है इस कोरोना ,संकट ने आ घेर लिया
कोई हमको नहीं पूछता ,सब ने है मुंह फेर लिया
ना परशाद चढ़ाता कोई ,ना अभिषेक कराता है
बाहर से ही शीश नमाता ,और सटक फिर जाता है
हम भ्रम में थे ,संकट में सब ,आ गुहार लगाएंगे
ज्यादा भक्तिभाव से आकर ,पूजा हमे चढ़ाएंगे
किन्तु संक्रमण के भय कारण ,सारे मंदिर बंद हुए
भीड़भाड़ ना हो बचने को ,उत्सव पर प्रतिबंध हुए
कुछ महीनो में ,भक्तिभाव का ,ऐसा हुआ सफाया है
मानव से ज्यादा देवों पर ,लगता संकट आया है
शिवजी बोले ,सच अबके तो ,टूट गया है मेरा मन
ना कोई भीड़ लगी भक्तों की ,बीत गया पूरा सावन
ना कावड़ ,गंगाजल आया ,ऐसा बंटाधार हुआ
शिवरात्रि को शादी थी पर मेरा ना श्रृंगार हुआ
अभिषेक ना शहद शर्करा ,नहीं भांग का भोग चढ़ा
इस कोरोना के कीड़े ने ,किया मेरा नुक्सान बड़ा
बड़े रुआंसा ,कान्हा बोले ,मेरा बर्थडे नहीं मना
ना तो सजी झांकियां कोई ,ना ज्यादा परशाद बना
ना तो हुई रासलीलाएं ,ना भक्तों का रेला था
ना थे भजन कीर्तन बस मैं ,बैठा रहा अकेला था
माता रानी बड़ी दुखी थी ,नवरात्रे सूखे बीते
ना थी कोई भीड़ भक्तों की ,मंदिर थे रीते रीते
ना श्रृंगार ,चढ़ावा कोई ,ना ही चूनरें चढ़ी नयी
ना थी चौकी ,ना भंडारे ,ना ही रतजगा हुआ कहीं
थे ग़मगीन गणपति बप्पा ,मना न उनका जन्मोत्सव
दस दिन की वो भव्य झांकियां ,भीड़भाड़ वाला वैभव
ना दर्शन की लम्बी लाइन ,नहीं चढ़ावा ,ना मोदक
ऐसा फीका जन्मोत्सव तो ,मेरा नहीं हुआ अब तक
सबने मीटिंग करी ,एक स्वर में मिल करके यही कहा
धर्मव्यवस्था बैठ जायेगी ,यदि ये ही माहौल रहा
इसीलिये आवश्यक है अब ,कृपा विष्णु भगवंत करे
होय अवतरित वेक्सीन में ,कोरोना का अंत करें
प्रभु तुम्हारे आगे कोरोना ,बौना है ,संहार करो
अपने दुखी त्रसित भक्तों पर जल्दी यह उपकार करो
जिससे भक्तिभाव फिर जागे ,मंदिर में रौनक आये
चढ़े चढ़ावा ,भजन कीर्तन ,लौट पुराने दिन आये
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
मंदिर में सन्नाटा पसरा ,देव सभी मिल बात करे
इस कोरोना वाइरस ने , बहुत बुरे हालत करे
रोज भक्त जो मंदिर आते ,हमको शीश झुकाते थे
भजन कीर्तन मंत्र पाठ कर ,प्रभु की महिमा गाते थे
पर जब से है इस कोरोना ,संकट ने आ घेर लिया
कोई हमको नहीं पूछता ,सब ने है मुंह फेर लिया
ना परशाद चढ़ाता कोई ,ना अभिषेक कराता है
बाहर से ही शीश नमाता ,और सटक फिर जाता है
हम भ्रम में थे ,संकट में सब ,आ गुहार लगाएंगे
ज्यादा भक्तिभाव से आकर ,पूजा हमे चढ़ाएंगे
किन्तु संक्रमण के भय कारण ,सारे मंदिर बंद हुए
भीड़भाड़ ना हो बचने को ,उत्सव पर प्रतिबंध हुए
कुछ महीनो में ,भक्तिभाव का ,ऐसा हुआ सफाया है
मानव से ज्यादा देवों पर ,लगता संकट आया है
शिवजी बोले ,सच अबके तो ,टूट गया है मेरा मन
ना कोई भीड़ लगी भक्तों की ,बीत गया पूरा सावन
ना कावड़ ,गंगाजल आया ,ऐसा बंटाधार हुआ
शिवरात्रि को शादी थी पर मेरा ना श्रृंगार हुआ
अभिषेक ना शहद शर्करा ,नहीं भांग का भोग चढ़ा
इस कोरोना के कीड़े ने ,किया मेरा नुक्सान बड़ा
बड़े रुआंसा ,कान्हा बोले ,मेरा बर्थडे नहीं मना
ना तो सजी झांकियां कोई ,ना ज्यादा परशाद बना
ना तो हुई रासलीलाएं ,ना भक्तों का रेला था
ना थे भजन कीर्तन बस मैं ,बैठा रहा अकेला था
माता रानी बड़ी दुखी थी ,नवरात्रे सूखे बीते
ना थी कोई भीड़ भक्तों की ,मंदिर थे रीते रीते
ना श्रृंगार ,चढ़ावा कोई ,ना ही चूनरें चढ़ी नयी
ना थी चौकी ,ना भंडारे ,ना ही रतजगा हुआ कहीं
थे ग़मगीन गणपति बप्पा ,मना न उनका जन्मोत्सव
दस दिन की वो भव्य झांकियां ,भीड़भाड़ वाला वैभव
ना दर्शन की लम्बी लाइन ,नहीं चढ़ावा ,ना मोदक
ऐसा फीका जन्मोत्सव तो ,मेरा नहीं हुआ अब तक
सबने मीटिंग करी ,एक स्वर में मिल करके यही कहा
धर्मव्यवस्था बैठ जायेगी ,यदि ये ही माहौल रहा
इसीलिये आवश्यक है अब ,कृपा विष्णु भगवंत करे
होय अवतरित वेक्सीन में ,कोरोना का अंत करें
प्रभु तुम्हारे आगे कोरोना ,बौना है ,संहार करो
अपने दुखी त्रसित भक्तों पर जल्दी यह उपकार करो
जिससे भक्तिभाव फिर जागे ,मंदिर में रौनक आये
चढ़े चढ़ावा ,भजन कीर्तन ,लौट पुराने दिन आये
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
Monday, August 24, 2020
एक तारा
सूना सूना सा जीवन था ,मेरे मन की मीत बनी तुम
तारा,तुम एकतारा बन कर ,जीवन का संगीत बनी तुम
मैं पतझड़ का सूखा तरु था ,तुम आयी तो विकसे किसलय
सुरभित हुआ हृदय का उपवन ,मेरे स्वर में आयी फिर लय
आहट हुई मुस्कराहट की ,फिर से इन फीके अधरों पर
फिर से मन उन्मुक्त गगन में ,लगा फड़फड़ाने ,अपने पर
हार गया मैं अपना सब कुछ ,ऐसी प्यारी जीत बनी तुम
तारा ,तुम एकतारा बन कर ,जीवन का संगीत बनी तुम
दग्ध हृदय को शीतलता दी ,और शीतल तन को दी ऊष्मा
अपना सारा प्यार उंढेला ,और बरसा दी तन की सुषमा
मुरझाई जीवन लतिका में ,नवजीवन संचार हुआ फिर
एक दूजे को हुए समर्पित ,हम में इतना प्यार हुआ फिर
अब पल पल ,तुम्हारा संबल ,ऐसी जीवन रीत बनी तुम
तारा ,तुम एकतारा बन कर ,जीवन का संगीत बनी तुम
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
सूना सूना सा जीवन था ,मेरे मन की मीत बनी तुम
तारा,तुम एकतारा बन कर ,जीवन का संगीत बनी तुम
मैं पतझड़ का सूखा तरु था ,तुम आयी तो विकसे किसलय
सुरभित हुआ हृदय का उपवन ,मेरे स्वर में आयी फिर लय
आहट हुई मुस्कराहट की ,फिर से इन फीके अधरों पर
फिर से मन उन्मुक्त गगन में ,लगा फड़फड़ाने ,अपने पर
हार गया मैं अपना सब कुछ ,ऐसी प्यारी जीत बनी तुम
तारा ,तुम एकतारा बन कर ,जीवन का संगीत बनी तुम
दग्ध हृदय को शीतलता दी ,और शीतल तन को दी ऊष्मा
अपना सारा प्यार उंढेला ,और बरसा दी तन की सुषमा
मुरझाई जीवन लतिका में ,नवजीवन संचार हुआ फिर
एक दूजे को हुए समर्पित ,हम में इतना प्यार हुआ फिर
अब पल पल ,तुम्हारा संबल ,ऐसी जीवन रीत बनी तुम
तारा ,तुम एकतारा बन कर ,जीवन का संगीत बनी तुम
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
उनयासीवें जन्मदिवस पर
स्वाद वही ताजे वाला है ,भले हो गया हूँ मैं बासी
अब भी वही जोश कायम है भले हुआ मैं उनयासी
बचपन से दोस्त ,गए कुछ छोड़ और कुछ रंग बदले
दांत संग कुछ छोड़ गए है , काले केश ,हुए उजले
परिवार के सब बच्ची बच्चों , का निज परिवार बना
कभी दूर का ,कभी पास का ,एक अजब व्यवहार बना
रोज भुलाता ,बीती बातें ,सारी, जो चुभ चुभ जाती
पर दाढ़ी के बालों जैसी ,रोज सुबह फिर उग आती
मन तो उतना रसिक ना रहा ,जिव्हा पर रस की लोभी
लालायित रहती खाने को ,मीठा ,चाट ,मिले जो भी
अब ना तेजी रही चाल में ,ना ही तेजी बोली में
पड़ने फीके लगे रंग सब ,जीवन की रंगोली में
वानप्रस्थ की उमर बिता दी ,और बना ना सन्यासी
अब भी वही जोश है कायम ,भले हुआ मैं उनयासी
वो ही दीवारें ,वो ही छत है ,और वैसा ही आंगन है
चहल पहल वाले घर में अब ,व्याप्त हुआ सूनापन है
नज़रें वही ,नज़रिया लेकिन धीरे धीरे बदल रहा
ऐसा लगता है कि जैसे ,समय हाथ से फिसल रहा
घर में हम दो ही प्राणी है ,बूढ़े ,तन से थके थके
मैं हूँ और मेरी पत्नी हम ,एक दूजे का ख्याल रखें
मन है सुदृढ़ ,भले ही तन में ,बाकी नहीं सुगढ़ता है
फिर भी ताकत है लड़ने की ,बिमारी से लड़ता है
साथ उमर के सबको ही ,करना पड़ता समझौता है
तन तो बूढा हो जाता है ,मन कब बूढ़ा होता है
भरा हुआ जीने का जज्बा ,और उमंग अच्छी खासी
अब भी वही जोश कायम है ,भले हुआ मैं उनयासी
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
स्वाद वही ताजे वाला है ,भले हो गया हूँ मैं बासी
अब भी वही जोश कायम है भले हुआ मैं उनयासी
बचपन से दोस्त ,गए कुछ छोड़ और कुछ रंग बदले
दांत संग कुछ छोड़ गए है , काले केश ,हुए उजले
परिवार के सब बच्ची बच्चों , का निज परिवार बना
कभी दूर का ,कभी पास का ,एक अजब व्यवहार बना
रोज भुलाता ,बीती बातें ,सारी, जो चुभ चुभ जाती
पर दाढ़ी के बालों जैसी ,रोज सुबह फिर उग आती
मन तो उतना रसिक ना रहा ,जिव्हा पर रस की लोभी
लालायित रहती खाने को ,मीठा ,चाट ,मिले जो भी
अब ना तेजी रही चाल में ,ना ही तेजी बोली में
पड़ने फीके लगे रंग सब ,जीवन की रंगोली में
वानप्रस्थ की उमर बिता दी ,और बना ना सन्यासी
अब भी वही जोश है कायम ,भले हुआ मैं उनयासी
वो ही दीवारें ,वो ही छत है ,और वैसा ही आंगन है
चहल पहल वाले घर में अब ,व्याप्त हुआ सूनापन है
नज़रें वही ,नज़रिया लेकिन धीरे धीरे बदल रहा
ऐसा लगता है कि जैसे ,समय हाथ से फिसल रहा
घर में हम दो ही प्राणी है ,बूढ़े ,तन से थके थके
मैं हूँ और मेरी पत्नी हम ,एक दूजे का ख्याल रखें
मन है सुदृढ़ ,भले ही तन में ,बाकी नहीं सुगढ़ता है
फिर भी ताकत है लड़ने की ,बिमारी से लड़ता है
साथ उमर के सबको ही ,करना पड़ता समझौता है
तन तो बूढा हो जाता है ,मन कब बूढ़ा होता है
भरा हुआ जीने का जज्बा ,और उमंग अच्छी खासी
अब भी वही जोश कायम है ,भले हुआ मैं उनयासी
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
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Sunday, August 23, 2020
ख की खराश -खुदा से अरदास
ऐ खुदा ,ये खाखसार खादिम कब तक ख़ामोशी से
ख्यालों की दुनिया में खरामा खरामा जीता रहेगा
और ख्वामख़्वाह ख़ाली बैठा खून के घूँट पीता रहेगा
इसलिये ऐ ख़ल्क़ के बादशाह ,मेरी ख्वाइश पूरी करवा दे
किसी ख़ास ,खूबसूरत ,खुशअदा ,खुशमिजाज ख़ातून को ,
मेरी शरीकेहयात और ख्वाबों की मलिका बनाकर भिजवा दे
जिस खुलेदिल ,खानदानी खातून की खुशामदीद मेरे जीवन को ,
खुशनुमा बना कर खुशहाली की खुशबू से महका दे
जिसकी शख्शियत की खसूसियत में मासूमियत हो
जो खुशहाल ,हमख़याल और खुशनियत हो
जो खुशपेशानी खूबसूरती का खजाना हो
जिसके मोहब्बत के खुमार में दिल दीवाना हो
जिसकी आँखों में चमक और चेहरे पर खिलखिलाहट हो
बोली में खनखनाहट और लबों पर मुस्कराहट हो
मैं खुशनसीब ख़ुशी ख़ुशी उसकी खिदमत ,खातिरदारी ,
और ख़ुशामद में मशरूफ रहूंगा
उसकी पूरी देख रेख कर खुदा से,
उसकी ख़ैरख़्वाही की दुआ मांगता रहूंगा
खाखसार खादिम 'घोटू '
ऐ खुदा ,ये खाखसार खादिम कब तक ख़ामोशी से
ख्यालों की दुनिया में खरामा खरामा जीता रहेगा
और ख्वामख़्वाह ख़ाली बैठा खून के घूँट पीता रहेगा
इसलिये ऐ ख़ल्क़ के बादशाह ,मेरी ख्वाइश पूरी करवा दे
किसी ख़ास ,खूबसूरत ,खुशअदा ,खुशमिजाज ख़ातून को ,
मेरी शरीकेहयात और ख्वाबों की मलिका बनाकर भिजवा दे
जिस खुलेदिल ,खानदानी खातून की खुशामदीद मेरे जीवन को ,
खुशनुमा बना कर खुशहाली की खुशबू से महका दे
जिसकी शख्शियत की खसूसियत में मासूमियत हो
जो खुशहाल ,हमख़याल और खुशनियत हो
जो खुशपेशानी खूबसूरती का खजाना हो
जिसके मोहब्बत के खुमार में दिल दीवाना हो
जिसकी आँखों में चमक और चेहरे पर खिलखिलाहट हो
बोली में खनखनाहट और लबों पर मुस्कराहट हो
मैं खुशनसीब ख़ुशी ख़ुशी उसकी खिदमत ,खातिरदारी ,
और ख़ुशामद में मशरूफ रहूंगा
उसकी पूरी देख रेख कर खुदा से,
उसकी ख़ैरख़्वाही की दुआ मांगता रहूंगा
खाखसार खादिम 'घोटू '
Saturday, August 22, 2020
【SEAnews】Review:The baptism of the Holy Spirit (As sly as snakes and as innocent as doves)-E
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