Wednesday, June 23, 2021

शुक्रिया जिंदगी 

मुझे जिंदगी से अपनी है, ना शिकवा ना कोई गिला संतुष्टि है मुझको उससे ,जो कुछ भी है मुझे मिला 

एक प्यारी सुंदर पत्नी है, प्यार लुटाने वाली जो 
मेरे जीवन में लाई है, खुशहाली, हरियाली जो 
मेरे हर एक ,सुख और दुख में, साथ निभाती आई है 
बढ़ती  हुई उमर में उसका साथ बड़ा सुखदाई है
एक प्यारी सी बिटिया है जो हर दम रखती ख्याल मेरा सदा पूछती रहती है जो ,मेरे सुख-दुख ,हाल मेरा समझदार एक बेटा ,जिसमें भरा हुआ है अपनापन
चढा प्रगति की सीढ़ी पर वह ,मेरा नाम करे रोशन 
भाई बहन सब के सब ही तो प्यार लुटाते हैं जी भर 
जब भी मिलते अपनेपन से, दिल से मेरी इज्जत कर 
यार दोस्त जितने भी मेरे, वे सब के सब अच्छे हैं 
मददगार हैं साथ निभाते और ह्रदय के सच्चे हैं 
और सभी रिश्तेदारों संग , बना प्रेम का भाव वहीं
 ना कोई से झगड़ा टंटा, मन में कोई मुटाव नहीं 
 बढ़ती उमर ,क्षरण काया का कुछ ना कुछ तो होना है 
फिर भी तन मन से दुरुस्त मैं,ना दुख है ना रोना है 
यही तमन्ना है कि कायम रहे उम्र भर यही सिला   
मुझे जिंदगी से अपनी है ,ना शिकवा ना कोई गिला 
संतुष्टि है मुझको उससे ,जो कुछ भी है मुझे मिला

मदन मोहन बाहेती घोटू

Tuesday, June 22, 2021

आओ मेरे संग टहलो

आओ तुम मेरे संग  टहलो 
तुम्हारे मन में दिन भर का ,जो भी गुस्से का गुबार है, 
उसकी,इसकी जाने किसकी,शिकायतों का जो अंबार है 
मन हल्का होगा तुम्हारा,सब तुम मुझसे कह लो 
आओ तुम मेरे संग टहलो
यूं ही रहती परेशान तुम ,मन की सारी घुटन हटा दो 
लगा उदासी का चंदा से, मुख पर है जो ग्रहण हटादो 
थोड़ा हंस गा लो मुस्कुरा लो और प्रसन्न खुश रह लो आओ तुम मेरे संग टहलो
 इतनी उम्र हुई तुम्हारी ,परिपक्वता लाना सीखो 
 नई उमर की नई फसल से ,सामंजस्य बनाना सीखो 
 बात किसी की बुरी लगे तो, तुम थोड़ा सा सह लो 
 आओ तुम मेरे संग  टहलो
अपने सभी गिले-शिकवे तुम जो भी है मुझसे कह डालो 
थोड़ा शरमा कर मतवाली,अपनी चितवन मुझ पर डालो 
पेशानी से परेशानियां ,परे करो ,खुश रह लो
आओ तुम मेरे संग टहलो

मदन मोहन बाहेती घोटू
छोड़ो चिंता प्यार लुटाओ

 यूं ही दिन भर तुम , गृहस्थी के चक्कर में 
 उलझी रह करती हो ,घर का सब काम धंधा 
 और रात जब मुझसे, तन्हाई के क्षणों में ,
 मिलती तो पेश करती, शिकायतों का पुलिंदा 
 अरे परेशानियां तो ,हमेशा ही जिंदगी के ,
 संग लगी रहती है और आनी जानी है 
 गृहस्थी की ओखली में ,अगर सर जो डाला है,
  मार फिर मूसल की ,खानी ही खानी है 
  एक दूसरे के लिए ,मिलते कुछ पल सुख के, 
  गिले और शिकवों पर ध्यान ना दिया करें 
  छोड़े चिंतायें और प्यार बस लुटाएँ हम,
  मिलजुल कर भरपूर जिंदगी जिया करें

मदन मोहन बाहेती घोटू

Monday, June 21, 2021

क्योंकि मैंने प्यार किया है 

कई बार 
जैसे रिमझिम की बरसती हुई सावन की फुहार 
जब बरसती है बनकर मूसलाधार 
या मंद मंद महती हुई बयार
 बन जाती है तूफान 
 या कलकलाती हुई नदियों में आ जाता है उफान 
 जो बन जाती है भयंकर बाढ़ 
 और सब कुछ देती है उजाड़ 
 या जब कभी कभी उष्णता देने वाली अगन 
 जो भोजन को पकाकर स्वाद भर देती है 
 जब कुपित होती है तो सब कुछ स्वाह कर देती है 
 या जब आसमान में अठखेलियां करते हुए  नन्हें बादल अपना रूप बदल 
 बन जाते हैं घटा घनघोर 
 गरज गरज कर मचाते हैं शोर 
 वैसे ही मेरी प्रेमिका प्यारी 
 मंद मंद मुस्कान वाली 
 जब से बनी है मेरी घरवाली 
 कभी-कभी बादल सी गरजती है 
 बिजली सी कड़कती है 
 मचा देती है तूफान 
 कर देती है बहुत परेशान 
 धर लेती है चंडी का रूप विकराल 
 बुरा हो जाता है मेरा हाल 
 पर मैं शांति से सब कुछ सहता हूं 
 कुछ नहीं कहता हूं 
 क्योंकि मैं जानता हूं की अन्य प्राकृतिक आपदाओं की यह संकट 
 यूं तो होता है बड़ा विकट 
 पर कुछ ना बोलो ,तो जल्दी जाता है टल
 फिर वही नदियों सी मस्त कल कल 
 फिर वही बरसती हुई प्यार की फुहार 
 क्योंकि ऐसा होता आया है कई बार 
 ऐसी आपदाओं के लिए मैं हमेशा रहता हूं तैयार क्योंकि मैंने किया है प्यार

मदन मोहन बाहेती घोटू
क्योंकि मैंने प्यार किया है 

कई बार 
जैसे रिमझिम की बरसती हुई सावन की फुहार 
जब बरसती है बनकर मूसलाधार 
या मंद मंद महती हुई बयार
 बन जाती है तूफान 
 या कलकलाती हुई नदियों में आ जाता है उफान 
 जो बन जाती है भयंकर बाढ़ 
 और सब कुछ देती है उजाड़ 
 या जब कभी कभी उष्णता देने वाली अगन 
 जो भोजन को पकाकर स्वाद भर देती है 
 जब कुपित होती है तो सब कुछ स्वाह कर देती है 
 या जब आसमान में अठखेलियां करते हुए  नन्हें बादल अपना रूप बदल 
 बन जाते हैं घटा घनघोर 
 गरज गरज कर मचाते हैं शोर 
 वैसे ही मेरी प्रेमिका प्यारी 
 मंद मंद मुस्कान वाली 
 जब से बनी है मेरी घरवाली 
 कभी-कभी बादल सी गरजती है 
 बिजली सी कड़कती है 
 मचा देती है तूफान 
 कर देती है बहुत परेशान 
 धर लेती है चंडी का रूप विकराल 
 बुरा हो जाता है मेरा हाल 
 पर मैं शांति से सब कुछ सहता हूं 
 कुछ नहीं कहता हूं 
 क्योंकि मैं जानता हूं की अन्य प्राकृतिक आपदाओं की यह संकट 
 यूं तो होता है बड़ा विकट 
 पर कुछ तो बोलो तो जल्दी जाता है टल
 फिर वही नदियों की मस्त कल कल 
 फिर वही बरसती हुई प्यार की फुहार 
 क्योंकि ऐसा होता आया है कई बार 
 ऐसी आपदाओं के लिए मैं हमेशा रहता हूं तैयार क्योंकि मैंने किया है प्यार

मदन मोहन बाहेती घोटू

Saturday, June 19, 2021

अभी बहुत कुछ करना आगे 

अभी बहुत कुछ करना आगे 
क्यों मुश्किल से डर, हम भागे 

सुख-दुख चिंता परेशानियां, 
जीवन संग बनी रहती है 
फिर भी अच्छे दिन आएंगे ,
मन में आस जगी रहती है 
अगर निराशा के जालों में ,
फसे रहेंगे ,पछताएंगे 
आशावादी दृष्टिकोण से ,
अगर जिएंगे, सुख पाएंगे 
परमेश्वर से अपना, सबका, 
सुख स्वास्थ्य और वैभव मांगे 
क्यों मुश्किल से डर  हम भागे 
अभी बहुत कुछ करना आगे

 यह सच है जो लिखा नियति ने,
 उसको कोई बदल ना पाया 
 लाख कमा ले कोई माया 
 साथ न कोई ले जा पाया 
 कितनी भी को विकट परिस्थिति 
 नहीं जरा भी घबराना है 
 हर मुश्किल से उबर जाएंगे 
 हिम्मत से ,बढ़ते जाना है 
 हंसते-हंसते जिएंगे हम ,
 सुबह तभी है, जब हम जागे 
 क्यों मुश्किल से डर,हम भागें
 अभी बहुत कुछ करना आगे
 
 चार दिनों का यह जीवन है,
 उसका मजा उठाएं पूरा 
 खाए पिए नाचे गाए 
 रहे न कोई शौकअधूरा  
 जब तक जियें, मस्त रहें हम,
 मन में खुशियां और चाव हो 
 जब भी जायें प्यास ना रहे ,
 मन में केवल तृप्ति भाव हो 
 रहे संतुलित जीवनचर्या ,
 अपनी मर्यादा ना लांघे
 क्यों मुश्किल से डर हम भागें
 अभी बहुत कुछ करना आगे

मदन मोहन बाहेती घोटू
छेड़छाड़ 

थोड़ी सी शरारत,
 थोड़ी सी तकरार 
 थोड़ी सी दोस्ती 
 थोड़ी सी रार
 थोड़ा सा गुस्सा 
 थोड़ा सा प्यार 
 लड़की पटाने की ,
 छोटी सी जुगाड़ 
 जी हां जनाब इसे कहते हैं छेड़छाड़
 छेड़छाड़ की कहानी 
 है कई युगों पुरानी 
 भगवान श्री कृष्ण इस आनंददाई प्रथा के संस्थापक थे उनकी गोपियों के संग छेड़छाड़ के किस्से बड़े रोचक थे कभी किसी गोपी की दूध भरी हांडी को फोड़ देना 
 कभी राधा की नाजुक कलाई मरोड़ देना 
 कभी यमुना में नहाती हुई बालाओं के वस्त्र चुरा लेना कभी माखन भरी हंडिया से माखन  खा लेना 
 उनके यह छेड़छाड़ के प्रसंग आज भी उनके भक्तों को बहुत भातें हैं 
 पर यह छेड़छाड़ नहीं ,उनकी बाल लीला कहाते हैं 
 फिर उसी युग में ,एक भयंकर छेड़छाड़ द्रोपदी ने दुर्योधन से की थी 
अंधों के बेटे तो अंधे होते हैं कह कर आग लगा दी थी इस छेड़छाड़ से दुर्योधन हो गया बड़ा क्रुद्ध था 
और इसका परिणाम महाभारत का महायुद्ध था 
पर यह सब तो पुरानी बातें हैं 
हम आपको आज के हाल-चाल बताते हैं 
हमारा पड़ोसी बॉर्डर पर जबतब छेड़छाड़ करता रहता है 
बार-बार कश्मीर का लाभ छेड़ता रहता है 
आतंकवादी  गतिविधियों से बाज नहीं आता है 
हालांकि हर बार मुंह की खाता है 
अमेरिका की रशिया से छेड़छाड़ चलती ही रहती है कभी चाइना से तकरार चलती ही रहती है 
कभी इजराइल ,कभी गाजी पट्टी 
कभी सीरिया, कभी ईरान
 एक दूसरे को छेड़छाड़ करके करते हैं परेशान 
 हमेशा यह डर रहता है कि यह छेड़छाड़ इतनी ना बढ़ जाए 
 कि कहीं तीसरा महायुद्ध ही  न छिड़ जाए 
 खैर,यह तो विश्व स्तर की बात हुई, आगे बढ़ते हैं अपनी रोजमर्रा की छेड़छाड़ की बात करते हैं 
 कुछ शरारती किस्म की लडके, जवान होती हुई लड़कियों के पीछे पड़ते हैं 
 और उनके साथ छेड़छाड़ करते हैं 
 कोई तानाकशी करता है ,कोई सीटी बजाता है 
 कोई सिरफिरा तो शरीर को छूकर बदतमीजी पर उतर आता है 
 ऑफिस में काम करने वाली महिलाओं के साथ सहकर्मियों की छेड़छाड़ आम बात है 
 चलती रहती कुछ न कुछ खुराफात है 
 कॉलेज के दिनों में लड़कियों को छेड़ने का मजा ही कुछ और था 
 वह तो हमने अब छोड़ छोड़ दिया वरना वह जवानी का बड़ा मजेदार दौर था 
भीड़भाड़ की छेड़छाड़ में खतरे का चांस हो सकता है 
सूनेपन की छेड़छाड़ में लड़की से रोमांस हो सकता है कुछ छेड़छाड़ यूं ही टाइम पास के लिए की जाती है और कुछ छेड़छाड़ किसी खास के लिए की जाती है 
एक शादी समारोह में एक लड़की मन को भा गई हमने उसे छेड़ दिया 
और बस ऐसे ही बात फिर आगे बढी ओर उसके मां-बाप ने उसे उम्र भर के लिए हमारे साथ भेड दिया 
वह आजकल हमारी पत्नी है पर उससे छेड़छाड़ करने में हमें डर लगता है 
क्योंकि मख्खी के छत्ते को छेड़ने का अंजाम सबको पता है 
आजकल बुढ़ापे में भी हम छेड़छाड़ का मजा उठाते हैं 
अपनी बुढ़ियाती पत्नी को, जवानी की छेड़छाड़ के किस्से सुनाते हैं 
और जब कुछ दोहराते हैं 
तो बड़ी लताड़ पाते हैं

मदन मोहन बाहेती घोटू