Thursday, June 9, 2022

श्री श्री स्वामी जी माधव प्रपन्नाचार्य द्वारा राम कथा के अवसर पर एक कविता 

माधव से सुनी, राघव की कथा 
जग जननी मां सीता की व्यथा 
स्वामी जी ने श्री वचनों से , 
हमें दिया राम का पता बता 
माधव से सुनी राघव की कथा

श्री राम जनम ,वनवास गमन 
सीता का हरण, बाली का मरण 
सेतु निर्माण समंदर पर ,
और दशाशीश रावण का तरण 
हनुमान का बल, बुद्धिमत्ता 
माधव से सुनी ,राघव की कथा 

पुष्पों से सजाया, मंच द्वार 
श्री पुष्पहास जी ,परिवार
 सब ने सच्चे मन ,तन्मय हो,
  जय राम उचारा बार-बार 
  थी हर प्रसंग में विव्हलता 
  माधव से सुनी, राघव की कथा 
  
  हो मंत्र मुक्त श्रोताओं ने
 पुरुषों ने और महिलाओं ने 
 चाय की तलब भुला करके,
  पूरा रस लिया कथाओं में 
  आलस निद्रा को बता धता
  माधव से सुनी, राघव की कथा
  
 श्री राम रतन धन जब पाया 
 रस कथा में था इतना आया 
कि व्यास पीठ पर ऊपर से 
 लीची ने भी रस टपकाया 
 जीवन में आई निर्मलता 
 माधव से सुनी, राघव की कथा

मदन मोहन बाहेती घोटू 

Sunday, May 22, 2022

टूटे सपने

मैंने पूछा सपनों से कि यार जवानी में,
रोज-रोज आ जाते थे तुम, अब क्यों रूठ गये सपने बोले ,तब पूरे होने की आशा थी ,
अब आने से क्या होगा, जब तुम ही टूट गये

एक उम्र होती थी जबकि मन यह कहता था,
ये भी कर ले वो भी कर ले सब कुछ हम कर ले आसमान में उड़े ,सितारों के संग खेल करें,
दुनिया भर की सब दौलत से हम झोली भर ले तब हिम्मत भी होती थी, जज्बा भी होता था, और खून में भी उबाल था, गर्मी होती थी 
तब यौवन था, अंग अंग में जोश भरा होता, 
और लक्ष्य को पाने की हठधर्मी होती थी 
पास तुम्हारे आते थे हम यह उम्मीद लिए ,
तुम कोशिश करोगे तो हम  सच हो जाएंगे 
पर अब जब तुम खुद ही एक डूबती नैया हो ,
पास तुम्हारे आएंगे तो हम क्या पाएंगे 
साथ तुम्हारा, तुम्हारे अपनों ने छोड़ दिया,
 वो यौवन के सुनहरे दिन, पीछे छूट गए 
 मैंने पूछा सपनों से कि यार जवानी में ,
 रोज-रोज आ जाते थे तुम अब क्यों रूठ गए

मदन मोहन बाहेती घोटू 

सपने

सपने सिर्फ जवानी में ही देखे जाते हैं ,
नहीं बुढ़ापे में सपनों का आना होता है
नींद उचट जाया करती जब काली रातों में ,
तो बस बीती यादों का दोहराना होता है 
 
कब क्या क्या सोचा था किससे क्या उम्मीदें थी, 
उन में कितनी पूर्ण हो गई ,कितनी टूट गई लेटे-लेटे ,सूनी आंखों से देखा करते ,
कितनी ही घटनाएं हैं जो पीछे छूट गई 
बीते हुए खुशी के लम्हे सुख दे जाते हैं ,
पर कुछ बीती बातों से पछताना होता है 
सपने सिर्फ जवानी में ही देखे जाते हैं,
नहीं बुढ़ापे में सपनों का आना होता है 

ढलती हुई उम्र में सपने देखे भी तो क्या,
पतझड़ में भी कहीं फूल का खिलना होता है जीवन की सरिता की कलकल मौन हो रही है,
क्योंकि शीघ्र सागर से उसको मिलना होता है
हंसते-हंसते जैसे तैसे गुजर जाए ये दिन,
बस मन को ढाढस देकर समझाना होता है 
सपने सिर्फ जवानी में ही देखे जाते हैं,
 नहीं बुढ़ापे में सपनों का आना होता है

मदन मोहन बाहेती घोटू 

Tuesday, May 17, 2022

सुख की तलाश

क्यों ढूंढ रहे हो इधर उधर सुख तो तुम्हारे अंदर है 

झांको अपने अंतरतर में ,खुशियों का भरा समंदर है
 तुम को जीवन के जीने का, बस दृष्टिकोण बदलना है
 निज सोच सकारात्मक रखना, सुख के रस्ते पर चलना है 
 वो लोग दुखी हो जाते हैं ,सुख की तलाश में भटक भटक 
 जब लोग मोह के नाले में जाती है उनकी नाव अटक 
 लोगों की अच्छाई देखो , उनमें कमियां तुम ढूंढो
 मत 
 यदि जी भर प्यार लुटाओगे ,दूना आयेगा तुम्हे पलट
 बिखरे हैं मानसरोवर में , सुख के मोती , कंकर दुख के
बन करके तुमको राजहंस ,चुगना होगा मोती सुख के
इस जीवन की सुख ही सुख का ,झरना झर रहा निरंतर है 
क्यों ढूंढ रहे हो इधर उधर, सुख तो तुम्हारे अंदर है

घोटू 

Friday, April 29, 2022

तेरा प्यार 

मैंने सारे स्वाद भुलाए, जबसे तेरा प्यार चखा है 
अपने से भी ज्यादा तूने हरदम मेरा ख्याल रखा है

खुद से ज्यादा तुझको रहती हरदम औरों की है चिंता
नेह उमड़ता है नैनों से ,और बरसती रहती ममता 
परेशानियां सब सह लेगी ,मुंह पर कोई शिकन ना लाए 
लेकिन ख्याल रखेगी सबका ,कोई कुछ तकलीफ न पाए 
तेरे मुस्काते चेहरे ने, हृदय हमारा सदा ठगा है 
मैंने सारे स्वाद बुलाए जबसे तेरा प्यार चखा है

 नर्म हृदय तू ,सदा नम्रता तेरे उर में रहती बसती 
सारे काम किया करती है तू खुश होकर हंसती हंसती
 तुझ में अच्छे संस्कार हैं तू गृहणी व्यवहार कुशल है 
 सुख और चैन मेरे जीवन में, तेरे मधुर प्यार का फल है 
सद्भावों से भरी हुई तू, जीवनसंगिनी और सखा है 
मैंने सारे स्वाद बुलाए ,जब से तेरा प्यार चखा है

मदन मोहन बाहेती घोटू 
मेरी पत्नी बहुत मधुर है 

मेरी उमर हो गई अस्सी
मैं अब भी हूं मीठी लस्सी 
पिचहत्तर होने आई है 
पत्नी मेरी रसमलाई है 
हम दोनों का साथ अनूठा 
यह भी मीठी ,मैं भी मीठा 
सीधी सादी, सुंदर भोली 
 बहुत मधुर मीठी है बोली 
सब के संग व्यवहार मधुर है 
दिल से करती प्यार मधुर है 
कभी सुहाना गाजर हलवा 
कभी जलेबी जैसा जलवा 
कभी गुलाब जामुनो जैसी 
या कातिल काजू कतली सी 
रबड़ी है ये कलाकंद है 
हर एक रुप में यह पसंद है 
अधरम मधुरम वदनम मधुरम
 नयनम मधुरम चितवन मधुरम
 मनमोहक मुस्कान खान है 
 मिठाई की ये दुकान है 
 यह तो था सौभाग्य हमारा 
 जो पाया है साथ तुम्हारा 
 सहगामिनी पति की सच्ची 
 मेरी तारा सबसे अच्छी 
 जीवन में बहार बन आई 
 जन्मदिवस की तुम्हे बधाई

मदन मोहन बाहेती घोटू