Thursday, October 26, 2023

जाकी रही भावना जैसी 

एक मूरत पत्थर की 
मैंने भी देखी, तुमने भी देखी 
मैंने उसमें ईश्वर देखा 
तुमने उसमें पत्थर देखा 
मैंने उसमें दिखाई श्रद्धा और विश्वास तुमने उड़ाया उसका उपहास 
तुम्हारा मखौल
नहीं कर सका मुझे डांवाडोल 
मेरी आस्तिकता बनी रही 
तुम्हारी नास्तिकता से डरी नहीं 
मेरी आस्था और निष्ठा
ने की उसमें प्राण प्रतिष्ठा 
तुम्हारी आलोचना और अविश्वास 
दिखाता रहा नास्तिकता का अहसास 
मैंने पूरी आस्था के साथ
उसे चेतन समझा तो वह चैतन्य हो गया उसने मेरी मनोकामना पूर्ण की 
मैं धन्य हो गया 
तुम पत्थर को अपनी तार्किक बुद्धि के साथ जड़ ही समझते रहे
तुममें नम्रता नहीं आई
और तुम जड़ के जड़ ही रहे
उस पत्थर ने जिसे मैने इश्वर समझा था
उसने इश्वर बन मेरा उपकार किया
और उसने जिसे तुमने पत्थर समझा था
तुम्हारे संग पत्थर सा व्यवहार किया
जाकी रही भावना जैसी
प्रभु मूरत देखी तिन तैसी

मदन मोहन बाहेती घोटू 

बच्चों का जीविका पथ 


तुम थे पहले दाल चने की ,

हमने बना दिया है बेसन 

मीठे या नमकीन बनोगे ,

इसका निर्णय अब लोगे तुम


गाठिया,सेव ,फाफड़े बनकर 

चाहोगे तुम स्वाद लुटाना 

या कि ढोकले और खांडवी 

गरम पकोड़े से बन जाना 


मीठा मोहन थाल बनो तो 

गरम आंच में तपना होगा 

मोतीचूर अगर बनना है ,

पहले बूंदी बनना होगा 


बेसन के लड्डू बन कर के 

प्रभु प्रसाद बनना चाहोगे 

या फिर कढ़ी, बेसनी रोटी 

या चीला बन सुख पाओगे 


बन सकते हो छप्पन व्यंजन 

सबका होगा स्वाद सुहाना 

रूप कोई सा भी ले लेना ,

लेकिन सबके मन तुम भाना 


मदन मोहन बाहेती घोटू

Saturday, October 21, 2023

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Nazish
मैं कल की चिन्ता छोड़
हंसी खुशी की जिंदगी जीता आज हूं
इसलिये खुश मिजाज हूं

कल जो होना है सो होगा
यह नियती ने कर रखा है निश्चीत
तो कल की कल भोगेंगे
आज तो रहो प्रसन्न चित्त
भविष्य की चिन्ता में
अपने सर पर परेशानियां मत ओढ़ो
आज का पूरा सुख लो
कल क्या होगा,कल पर छोड़ो
सबसे हंस कर मिलता हूं
किसी से नहीं रहता नाराज़ हूं
इसीलिए खुश मिजाज हूं

भविष्य की सोच सोच
अपने चेहरे पर शिकन मत लाओ
प्रेम से जियो, हंसो,
खेलो कूदो और खाओ
याद रखो,आज जो जीवन जी लोगे
कल नहीं जी पाओगे
जो खुशियों के अवसर खो दोगे
बाद में पछताओगे
जो है,उसी में खुश रहता हूं
न किसी की दया का मोहताज हूं 
इसलिए खुश मिजाज़ हूं

मदन मोहन बाहेती घोटू 

Sunday, October 15, 2023

बोलो राम राम श्याम


एक हैं मेरे प्यारे राम

एक हैं मुरलीधर घनश्याम 

दोनों का में सुमरू नाम 

बोलो राम राम श्याम 


दोनों के दोनों अवतारी 

दोनों की छवि सुंदर प्यारी 

दोनों हरते कष्ट तमाम 

बोलो राम राम श्याम 


एक थे जन्मे बन रघुराई 

एकआये बन किशन कन्हाई

भाई लक्ष्मण और बलराम 

बोलो राम राम श्याम 


एक में रावण को संहारा 

एक ने मामा कंस को मारा 

सबको पहुंचा उस धाम 

बोलो राम राम श्याम 


एक की लीला वृंदावन में 

एक थे चौदह वर्षों वन में

लिया किसी ने नहीं विश्राम

बोलो राम राम श्याम 


एक थी कृष्णा बांके बिहारी 

एक राम जी अवध बिहारी 

मुक्ति देता दोनों का नाम 

बोलो राम राम श्याम 


एक थे चक्र सुदर्शन धारे 

एक थे तीरंदाज निराले 

दोनों के दोनों बलवान 

बोलो राम राम श्याम 


एक में सागर सेतु बनाया 

एक ने द्वारका नगर बसाया 

दोनों की छवि है अभिराम 

बोलो राम राम श्याम 


एक थे मर्यादा पुरुषोत्तम 

एक थे ज्ञानी और विद्वन 

दिया एक ने गीता का ज्ञान 

बोलो राम राम श्याम


मदन मोहन बाहेती घोटू

बुझते दीपक 


जिनने सदा अंधेरी रातों ,में जल किये उजाले है 

इनमें फिर से तेल भरो , ये दीपक बुझने वाले हैं


अंधियारे में सूरज बनकर, जिनने ज्योति फैलाई 

सहे हवा के कई थपेड़े ,पर लौ ना बुझने पाई 

है छोटे, संघर्षशील पर ,सदा लड़े तूफानों से 

इनकी स्वर्णिम छटा ,हमेशा खेली है मुस्कानों से 

इनके आगे घबराते हैं ,पंख तिमिर के काले हैं 

इनमें फिर से तेल भरो, ये दीपक बुझने  वाले हैं 


हो पूजन या कोई आरती दीप हमेशा जलते हैं 

दिवाली की तमस निशा को, जगमग जगमग करते हैं 

शुभ कार्यों में दीप प्रज्वलन होता है मंगलकारी 

स्वर्णिम दीप शिखा लहराती ,लगती है कितनी प्यारी 

बाती में है भरा प्रेम रस, मुंह पर सदा उजाले हैं 

इनमें फिर से तेल भरो ,ये दीपक बुझने वाले हैं 


है बुजुर्ग मां-बाप तुम्हारे,ये भी बुझते दिये हैं 

किये बहुत उपकार तुम्हारे ,सदा दिये ही दिये हैं 

खत्म हो रहा तेल ,उपेक्षा की तो ये बुझ जाएंगे 

इनमें भरो प्रेम रस थोड़ा, ये फिर से मुस्कुराएंगे 

इनकी साज संभाल करो , ये तुमको बहुत संभाले हैं 

इनमें फिर से तेल भरो , ये दीपक बुझने वाले हैं


मदन मोहन बाहेती घोटू

Thursday, October 12, 2023

लो जीवन का एक दिन और गुजर गया और उमर एक दिन से और घट गई 

बस ऐसे ही धीरे-धीरे जिंदगी कट गई 


जब हम व्यस्त ना होकर भी व्यस्त रहते हैं उम्र के इस दौर को बुढ़ापा कहते हैं 

सुबह उठो 

नित्य कर्म में जुटो

फिर सुबह की सैर पर निकल जाओ

फिर यारों की मंडली में बैठ कर गप्पे मारो और मन को बहलाओ 

थोड़ा सा व्यायाम कर लो 

अनुलोम विलोम कर धीमी और तेज सांस भर लो 

फुर्ती से भर जाएगा आपका अंग अंग फिर घर जाकर चाय की चुस्कियां लो बिस्कुट के संग

और फिर आज का ताजा अखबार चाटो एक-एक छोटी-मोटी खबर पढ़ वक्त काटो फिर लो फलों का स्वाद 

नाश्ते के पहले या नाश्ते के बाद 

फिर जो हो तो छोटा-मोटा काम करो 

और फिर थोड़ी देर लेट कर आराम करो


इस बीच हमेशा मोबाइल रहेगा साथ

देखते रहना फेसबुक व्हाट्सएप और करते रहना दोस्तों से जरूरी गैर जरूरी बात 

तब तक लंच का टाइम हो जाना है 

खाना खाकर थोड़ा सा सो जाना है 

और शाम को उठकर पियो चाय 

और थोड़ा सा नाश्ता  

स्विगी से मंगा सकते हो पिज़्ज़ा या पास्ता नहीं तो खाओ घर का डिनर 

और टीवी पर देखते रहो  सीरियल 

याद रखो कोई भी प्रोग्राम जिसके बाद मिलता हो भंडारा या प्रसाद 

उसे अटेंड करना नहीं भूलना 

क्योंकि इसे बदल जाता है मुंह का स्वाद बीच में टाइम के हिसाब से दवाइयां लेना भी है जरूरी

स्वस्थ रहने की है मजबूरी 

यूं ही जीवन चलता रहेगा बे रोकटोक 

बीच में अच्छी लगती है बीवी से नोंकझोंक

फिर जब लगे झपकी , सो जाओ

सपनों की दुनिया में खो जाओ

यूं ही चलता रहता है जीवन का क्रम 

अभी मैं जवान हूं यह गलतफहमी पालने का भ्रम 

आदमी में भर देता है उत्साह और नवजीवन 

बिना काम के भी व्यस्त रहकर दिनचर्या सिमट गई 

लो एक दिन उम्र और  घट गई

ऐसे ही धीरे धीरे जिन्दगी कट गई


मदन मोहन बाहेती घोटू