Sunday, April 17, 2011

थकी थकी है भोर


रात चांदनी ऐसी महकी ,थकी थकी है भोर
आलस के सुख में डूबा है ,तन का एक एक पौर
उर के हर एक स्पंदन में ,मुखरित है आनंद
सूखी माटी ,पा फुहार सुख ,देती सोंधी गंध
प्रणय पुष्प मकरंद प्रफुल्लित,मन आनंद विभोर
रात चांदनी ऐसी महकी,थकी थकी है भोर
पलक उनींदी,मीठे सपने,आकुल व्याकुल नैन
राह चाँद की तके चकोरी ,कब आएगी रैन
चोरी मन का चैन ले गया ,वो प्यारा चितचोर
रात चांदनी ऐसी महकी ,थकी थकी है भोर
एसा खिला  खिला सा सूरज,देखा पहली बार
इतना प्यारा पंछी कलरव ,इतनी मस्त बयार
एसा लगता है धरती पर ,पुष्प खिले चहुँऔर
रात चांदनी ऐसी महकी ,थकी थकी है भोर
           मदन मोहन बहेती 'घोटू'

इलेक्ट्रो सिंथेसिस -

इलेक्ट्रो सिंथेसिस
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वो बस गएँ है दिन में तो दिल हल्का हो गया,
ज्यों हाइड्रोजन भर गयी ,दिल के बलून में
आने लगी है साँसों से खुशनुमा ताजगी
ज्यों ओक्सिजन समां गयी हो मेरे खून में
उनको छुवा तो बिजली का करंट सा लगा
सूरज की गरमी आगई हो जैसे मून में
हायड्रोजन ,ओक्सिजन को बिजली ने छुवा
दिल पानी पानी हो गया ,इश्क के जूनून में
         मदन मोहन बहेती'घोटू'

भोजन सुंदरी !

      भोजन सुंदरी
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तुम कोमल हो,नरम नरम
गुंथे हुए आटे के जैसी श्वेत वरन
काली काली सी जुल्फों में गोरा आनन्
गरम तवे पर सिकती हुई रोटियों जैसा
सुन्दर नाक समोसे जैसी,
दांत तुम्हारे
हैं पनीर के टुकड़े प्यारे
और मटर सी
मटर गश्तियाँ करती आँखे
आलू चापी कान,रूपसी!
 ,पापड़ से परिधान पहन कर जब हंसती हो
,एसा लगता है की किसीने ,
पका दाल अरहर की उसमे,
लहसुन की डाली बघार हो
तुम्हे देख कर भूख लग गयी ,
भूख मिटा दो ! भोजन सुंदरी!

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
नोयडा उ.प्र.

मैं -----

              मैं -----
अपने सुख दुःख चिंताओं का ,सारा बोझ मुझे दे दो तुम
एक दिवस की बात नहीं है ,ये सब रोज़ मुझे दे दो  तुम
सूनेपन में नींद न आये,तो मुझको बाँहों में ले लो
मै चूं तक भी नहीं करूँगा,जैसे चाहो ,वैसे खेलो
ये मेरा कोमल चिकना तन ,तुमको सुख देने खातिर है
जब भी चाहो,इससे खेलो ,हरदम सेवा में हाज़िर है
भूल जाओ वे सब बातें तुम,जिन्हें भुलाना अति मुश्किल है
मुझ पर सर रख कर सो जाओ ,यदि सुख जो करना हासिल है
रोज रात  सोवो मेरे संग ,सर तुम्हारा सहला ऊँगा
सुन्दर सुन्दर सपने देकर ,मन तुम्हारा बहलाऊँगा
मै साक्षी हूँ सूनेपन का,मै साक्षी हूँ मधुर मिलन का
एक मात्र चाहत हूँ मै ही,थके हुए तन ,भारी मन का
रोज रात रहता हूँ तुम संग ,पर न प्रियतमे ,न ही पिया हूँ
तुम्हारे सपनो का साथी ,मै तो तुम्हारा तकिया हूँ

मदन मोहन बहेती 'घोटू'


मच्छरों ने


 मच्छरों ने
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रात भर मुझको सताया मच्छरों ने
नींद से मुझको जगाया मच्छरों ने
मुहं ढका तो नींद ना आई मुझे,
मुहं उधेडा ,काट खाया मच्छरों ने
आते जाते गाल की ले चुम्मियां,
याद को तेरी दिलाया मच्छरों ने
रात भर मैंने बजाई तालियाँ,
गीत कुछ एसा सुनाया मच्छरों ने
तेरे खर्राटे  भले लगने लगे,
रात भर जब भिनभिनाया मच्छरों ने
सभी मच्छार्नियाँ  उमड़ी टूट कर,
जब अकेला मर्द पाया मच्छरों ने
करवटें ही मै बदलता रह गया
इस तरह कुछ गुदगुदाया मच्छरों ने
नहीं मारो, आपका ही खून हैं
इस तरह कुछ  गिड़ गिडाया मच्छरों ने

मदन मोहन बहेती 'घोटू'
नोयडा उ.प्र.

Saturday, April 16, 2011

रसोई घर में


मायक्रोवेव की तरह
तुम्हारी तरंगें
मेरे मन को इतना उद्वेलित कर देती है
की मेरे रोम रोम में
उर्जा का संचार हो जाता है
मेरे मन के प्रेशर कुकर में
जब तम्हारी ऊष्मा से
रक्त का दबाब बढ़ जाता है
तो सीटी सी बजने लगती है
मै गैस के चूल्हे सा
तुम्हारे प्यार के लायटर की चिंगारियों से
प्रज्वलित होता रहता हूँ
मै नान स्टिक तवे जैसा हूँ
जिससे तुम
कभी परांठा या डोसा बन
मिलती ,छिटकती रहती हो
मै तो चांवल और उड़द का वो घोल हूँ
जिसे तुम्हारे प्यार की स्टीम ने
स्वादिष्ट इडली जैसा बना दिया है
मै जूसर मिक्सर ग्रायिंदर की तरह
ज्यूस,चटनी, और पिसाई के लिए
अत्यंत उपयोगी उपकरण हूँ
तुमने अपने रूप और यौवन को
फ्रीजर में रखे हुए फलों की तरह
तरोताजा बना रखा है
तुम्हारे सुन्दर से मुखड़े पर
जब मुस्कान आती है
तो लगता है ,अरहर की दाल में
देशी घी का तड़का लग गया हो
आज रसोई घर की सब चीजे
तुम्हारी याद दिला रहीं हैं
तुम मैके से कब आओगी?

मदन मोहन बहेती 'घोटू'
नोयडा उ.प्र.

Friday, April 15, 2011

कोई मेरी पत्नी से सीखे

<h2>कोई मेरी बीबी से सीखे
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बचे साबुन को नए से चिपका कर,
दो साबुनों की खुशबुओं का मजा उठाना
टूटी हुई झाड़ू की सूखी डंडियों  से
घर के फ्लावर पोट को सजाना
रात की बची हुई खिचड़ी से
सुबह स्वादिष्ट कटलेट बनाना
कोई मेरी बीबी से सीखे
घर और कपड़ो की सफाई के साथ
मेरे पर्स की भी सफाई करना
मुझ जैसे शेर पति को डरा कर
खुद एक काक्रोच से डरना
रोंग नंबर के फोन काल पर भी
घंटों तक लम्बी बातचीत करना
कोई मेरी बीबी से सीखे
पुरानी साडी को काट कर
पर्दा  या पेटीकोट  बनाना
सेल के चक्कर में,जरुरत से चौगुना
सामान खरीद कर के ले आना
मीठी मीठी बातें बना कर के
मेरी पॉकेट को ढीली करवाना
कोई मेरी बीबी से सीखे
टीवी पर सीरियल के साथ साथ
क्रिकेट की कमेंट्री सुनना
पुराने स्वेटर को उधेड़ कर
नए डिजाईन  में बुनना
मेरे पड़ोसिन की तारीफ करने पर
इर्षा से जलना ,भुनना
कोई मेरी बीबी से सीखे
खुद रूठ रूठ कर के
रूठे हुए पति को मनाना
चमचागिरी कर कर के
सास और ननद को पटाना
दूध का गिलास पिलाने के लिए
सोये हुए पति को जगाना
        कोई  मेरी पत्नी से सीखे