Monday, April 25, 2011

जरुरत--शहादत की

    जरुरत--शहादत  की
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राजनीती के गलियारे,
अपनी संकीर्ण  मानसिकता के कारण
बहुत सकड़े रह गए है
और अब आवश्यकता हो गयी है,
उन्हें चोडा करने की
और सड़कों को चोडा करने के लिए
पुराने बड़े बड़े वृक्षों को
शहादत देनी पड़ती है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'


Sunday, April 24, 2011

बिठोडा

बिठोडा
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गावं के आसपास
या सड़क के किनारे
जब भी देखता हूँ
गोबर के बने ,झोपड़ीनुमा
छोटे छोटे से घर
जिनमे सलीके से,
जमा कर रखे हुए होते है
गोबर के उपले या कंडे
और जिनकी दीवारों पर,
किसी कार्यकुशल गृहणी के
हाथों के छापों की सजावट होती है
वो हाथ ,जिनमे मेहंदी रचती है
वो हाथ ,जो सिहरन पैदा करतें है
वो हाथ,जो रोटियां सकतें है
उन्ही हाथों ने,गोबर को थेप थेप कर
ये उपले या कंडे गढ़ें है
जिन्हें सुखा कर रखती है  वो ,
गोबर के बने इन बिठोड़ो में
ताकि बरसात के मौसम में
इनसे चूल्हा जला कर
सेक सके रोटियां
पेट की आग बुझाने को
और बची हुई राख से
मांझ सके घर के बर्तन
इन बिठोड़ो  को देख कर,
याद आतें है मिश्र देश के पिरेमिड
जिन्हें बनाया गया था,
उपयोग हीन शवों को सुरक्षित रखने के लिए
तब लगता है की लोगों की सोच और संस्कृति में
कितना अंतर होता है
मदन मोहन बहेती 'घोटू'

नमक के खेत

  नमक के खेत
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दूर दूर तक फैले हुए, सफ़ेद सफ़ेद
नमक के खेत
समुन्दर का पानी,
जब छोड़ देता है अपना खारापन
तो बन जाता है श्वेत लवन
जो है जीवन
जब भी मै देखता हूँ
समुद्र के पानी को क्यारियों में रोकती मुंडेर
या चमचमाते श्वेत लवन के ढेर
तो श्रद्धा से बोल पड़ता है मेरा मन
हे!भुवनभास्कर ,तुम्हे नमन
तुम्हारी उष्मा ही,
देती है हमें जीवन
और हे रत्नाकर!
तुम अपना जल
सूरज की ऊष्मा से जला कर
बन जाते हो बादल
और बरसते हो बन कर जीवन
और तुम्हारा अवशेष
अत्यंत विशेष
स्वाद की खान
तुम्हे प्रणाम
गेहूं के लहलहाते खेत
या फूलों के महकते बाग़
हमारी सांसे,हमारा जीवन
और जीवन का स्वाद
सब सूरज और सिन्धु की
जुगल बंदी का है प्रसाद
देखता हूँ जब भी सफ़ेद सफ़ेद
नमक के खेत
तो  मेरा मन
करता है इन्हें शत शत नमन
मदन मोहन बहेती 'घोटू'

सुबह--सुबह

 सुबह--सुबह
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आने का जिसका सुबह सुबह इंतजार था
 दिल लग नहीं रहा था ,जिया  बेक़रार था
आया  तो उसे प्रेम से  हाथों  में ले  लिया
हमने उलट पुलट  की किया ,उससे प्यार था
चेहरा था  बड़ा बोल्ड ,जिसम था भरा हुआ,
हुस्नो अदा का आगे पीछे इश्तिहार था
सोलह का था या बीस का ,लेकिन हसीन था
नज़रें गड़ा के देखा तो वो खुशगवार था
ली चाय की फिर चुस्कियां,उसके ही साथ में
दिल में समेत लाया वो  बातें हज़ार था
"इससे ही चिपके रहोगे या देखोगे मुझे"
बीबी ने जो फटकारा ,सच ,मै गुनाहगार था
दुनिया ,जहान की सभी ख़बरें लिए हुए,
मैंने पढ़ा ,और रख दिया,वो अखबार था

    मदन मोहन बाहेती 'घोटू'



                                               

डुगडुगी राजा


      डुगडुगी  राजा
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कभी था दुनिया को जीतने का ख्वाब
पर असफलताओ के बाद
जब नहीं दिया तकदीर ने संग
तो बन गए पार्टी के ढपोर शंख
कोई भी हो छोटी मोटी बात
बन जाती है इनके लिए खबर खास
किसी की आलोचना  या करना हो अपमान
हाज़िर है इनका बयान
खबर में रहने को बेसबर
टी वी के कैमरे पर इनकी नज़र
दूसरे ही दिन अपने बयान से पलट जाते है
और फिर टी वी की ख़बरों में नज़र आते है
मिडिया को भी रहती है ख़बरों की तलाश
सुनाती रहती है इनकी बकवास
और ये बजाते रहते है डुगडुगी ,बाजा
अंधेर नगरी ,डुगडुगी राजा
         मदन मोहन बहेती 'घोटू'

Thursday, April 21, 2011

-गर्मी-

 तेज धुप हो ,बहे पसीना ,तो गर्मी है
पहलू में हो कोई हसीना ,तो गर्मी है
गुस्से से मुहं अगर लाल है,तो गर्मी है
पोकित में जो अगर माल है,तो गर्मी है
तेजी से बढ़ता बाज़ार है,तो गर्मी है
तबियत बिगड़ी है ,बुखार है,तो गर्मी है
राजनीती में चहल पहल है,तो गर्मी है
पद है ,बंगला हैकि महल है ,तो गर्मी है
गर्मी कई तरह की होती, बहुत गरम है
नियम गणित का ,दो ऋण मिल कर होते धन है
पर गर्मी की बीजगणित उलटी होती है
दो गर्मी के मिलने पर सर्दी होती है
मई जून का मौसम बड़ा गरम होता है
धनवानों का पॉकेट बड़ा गरम होता है
लेकिन जब ये दोनों गर्मी मिल जाती है
तो हिलस्टेशन पर जाकर गर्मी आती है
जब सर्दी होती तो कांप कांप हम जाते
गर्म दो बदन,जब आपस में है टकराते
अधर कांपते ,अंग अंग में होती सिहरन
ये सब तो,सर्दी वाले ही होते लक्षण
गर्म खून वाले ,दो ,लड़ते खेल खेल में
 एक वहीँ ठंडा पड़ता है ,एक जेल में
एक राज़ की बात आपको हम बतलाये
जब सर्दी आने को हो ,दीवाली आये
  आने वाली सर्दी सर्दी से हम सब डरते है
इसीलिए तो लक्ष्मी की पूजा करते है
हे लक्ष्मी  मैया! तू साथ हमारे रहना
गर्म तिजोरी,पॉकेट हरदम करती रहना
पॉकेट हो यदि गरम ,सभी कुछ गरम गरम है
सर्दी आये पास ,कहाँ सर्दी में दम है
हीटर,शाल,रजाई,सूट,स्वेटर ,कार्डिगन
पॉकेट गरम,बराबर उसको सारे मौसम
और गर्मी आने के पहले आती होली
मस्ती,मौज,शरारत,होती हंसी ,ठिठोली
ऋतू बसंती होती ही है यूं मदमाती
की गर्मी आने के पहले गर्मी आती
वेतन जीवी लोगों का मौसम बेदर्दी
एक तारीख को गर्मी और तीस को सर्दी
ऊपर वाले अफसर बहुत गरम होते है
तब ही केबिन एयर कंडीशन होते है
ये भी देखा है,कुछ लोग सख्त होते है
लेकिन उनके चमचे बड़े भक्त होते है
गर्मी का नरमी से नजदीकी नाता है
गर्मी पाकर के फौलाद पिघल जाता है
सही जगह पर सही किसम की  गर्मी देना
जब तक अंडे न निकले,अण्डों को सेना
जिसको हो ये ज्ञान,सफलता वो पाता है
धीरे धीरे बड़ा आदमी बन जाता है
तो यह सच है ,गर्मी सबके मन भाती है
गर्मी की गरिमा है ,सबको गरमाती है
गर्म जलेबी,गर्म समोसे ,गर्म पकोड़ी
गरम गरम गाजर का हलवा,गर्म कचोडी
गर्म चाय हो,कोफ़ी या आलू की टिकिया
गर्म चीज सब खाने में लगती है बढ़िया
गर्म देश के लोग भला हम गर्म न होंगे
जाने अब तक ये गर्मी के मर्म न होंगे
इसीलिए तुम छोडो सारी शर्मा शर्मी
मजा उठाओ गर्मी का ,जब तक है गर्मी

मदन मोहन बहेती 'घोटू'
नोयडा उ.प्र

 

Wednesday, April 20, 2011

गीत मिलन के हम गाते है



सपन संजोये प्रियदर्शन के,गीत मिलन के हम गाते है
  किस्मत से छींका टूटेगा ,अपने मन को समझाते है
हुए प्यार में अंधे उनके,पर बटेर कब हाथ लगेगी
जो बाँट रही रेवड़ी मीठी ,हमको भी तो कभी मिलेगी
आस लगाये हम बैठे है,छप्पर फाड़ मिलेगा कब धन
कब सूखी बगिया सर्सेगी,फूल खिलेंगे मेरे आँगन
इस अंधियारी सी कुटिया में ,जाने कब उजियारा होगा
कब आशा के दीप जलेंगे,कब दीदार तुम्हारा होगा
सपन मिलन के संजो रखे है,जाने कब वो होंगे पूरे
कब परियां नाचेंगी मन में ,जाने कब आएगी हूरें
मेरे मन के      वृन्दावन में,        रास करेगी राधा रानी
दिल की इस सूखी  धरती पर  कब बरसेगा रिमझिम पानी
सोंधी सोंधी सी खुशबू से,कब महकेगी मन की माटी
कब तुम मुझे सहारा दोगी ,बन कर इस अंधे की लाठी
तिल तिल करके जलते दिल को,ये दूरी मंजूर नहीं है
भटक रहा है बंजारा मन,पर अब दिल्ली दूर नहीं है
कहते लोग ,भोर में देखे ,सब सपने सच हो जाते है
गीत मिलन के हम गाते है
मदन मोहन बहेती 'घोटू'