Tuesday, April 5, 2011

जीवन दर्शन -बुढ़ापे का

जीवन दर्शन -बुढ़ापे का
जब जब नयी पीढ़ी
चढ़े सफलता की सीढ़ी
         आओ हम उन्हें  प्रोत्साहन दें
पीढ़ियों का अंतर
तो बना ही रहेगा उमर भर
         उस पर ना ध्यान दें
वो अपने ढंग से
जिंदगी जीना चाहतें है,
         कोई हर्ज नहीं
क्या बच्चों की खुशियों में
सहयोग  देना
       बुजुर्गों का फर्ज नहीं
ये  सच है की उनके रस्ते,
और उनकी सोच
       तुम्हारी सोच से है भिन्न
क्यों लादते हो अपने विचार उन पर,
और न मानने पर,
        क्यों होते हो खिन्न
हर परिंदा,उड़ना सीखने पर,
         अपने हिसाब से उड़ता है
और इसे अपनी उपेक्षा समझ
          तुम्हारा मन क्यों कुढ़ता है?
किसी से अपेक्षा मत रखो ,
वर्ना अपेक्षा पूरी न होने पर ,
            दिल टूट जाता है
तुम्हारी अच्छी सलाहों को,
अपने काम में दखल समझ ,
        अपना रूठ जाता है
तुम अपने ढंग से जियो,
और उन्हें जीने दो,
            उनके ढंग से
तनाव छोड़ ,अपनी बाकी जिंदगी का,
भरपूर मजा लो,
            ख़ुशी और उमंग से
Er मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Monday, April 4, 2011

चोंचले

     चोंचले
एक रेस्तरां में
आया खाना खाने
एक बढती उम्र का कपल
बेयरे ने पूछा 'क्या लाऊं सर'
बुजुर्ग पति ने, एक प्लेट बैंगन का भरता,
और दो तंदूरी मिस्सी रोटी का ऑर्डर दिया
इस पर प्रोढ़ा पत्नी ने की ,ये प्रतिक्रिया
'खाते थे रोज प्रेम  से जो दाल माखनी
अब मांगते है भरता,खुद भरते से हो चले
तन दूरी भी चाहिए,मिस सी भी चाहिए
अच्छे लगे हैं क्या ये बुढ़ापे में चोंचले?

                                          

उम्मीद

   उम्मीद
कहते है ,उम्मीद के सहारे
 दुनिया चल रही है
और ये भी कहा जाता है
किसी से कोई उम्मीद मत रखो,
क्योंकि उम्मीद पूरी नहीं होने पर
दिल टूट जाता है
कुछ भी हो,मैंने अपनी उम्मीदों को,
एक गमले में,
खिले हुए फूलों के संग सजा रखा है
इस उम्मीद से ,
की कभी न कभी तो
मेरी उम्मीदें विकसेगी ,पूरी होंगी
पर शायद मै गलत हूँ,
क्योंकि उम्मीद पूरा करने के लिए
सिर्फ आस ही नहीं ,
करना पड़ता है प्रयास
और प्रयास करने पर ही
मेरी उम्मीदें पूरी होंगी,
एसा है मेरा विश्वास
   मदन मोहन बाहेती 'घोटू'


तेरा मेरा प्यार नया है

तेरा मेरा प्यार नया है
अपना ये अभिसार नया है
यूँ तो हम मिलते रहते है
मिलना पर हर बार नया है
गुन गुन गुंजन करता भंवरा
देता रहता कली पर पहरा
कली को जब विकसा पता है
रस पीता,चुप हो जाता है
प्रेम भरा संसार नया है
तेरा मेरा प्यार नया है
सूर्य रश्मियों ने चमकाया
पुरवैया ने आ थपकाया
तुमने ज्यों ही आँखें खोली ,
तो सारा कानन महकाया
यौवन का उपहार नया है
तेरा मेरा प्यार नया है
मधुमख्खी सा चुम्बन मेरा
घूंट घूंट रस पीता तेरा
मधुकोष में कर मधु संचन
रसमय रहता सारा जीवन
सपनो का आकार नया  है
तेरा मेरा प्यार नया है
       Er  मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Friday, April 1, 2011

कृष्ण प्रश्न-यक्ष प्रश्न

        
प्यारे कान्हा
सच बतलाना
याद कभी तो आता होगा,
वो राधा का साथ सुहाना
राधा, वो बरसाने वाली
प्रेमसुधा बरसाने वाली
पहला पहला प्यार तुम्हारा
बचपन  वाला
हे मनमोहन
तुमने चोरी करते करते दधी और माखन
चुरा लिया था माखन जैसी राधा का मन
हे गिरधारी
जब भीगी थी मसें तुम्हारी
पहली बार देख कर जिसको,
उठी प्यार की थी चिंगारी
क्या तुम्हारा बांकापन था
जिसे देख कर फिसल गया राधा का मन था
रास बिहारी
वो थी मुरली तान तुम्हारी
सुन कर जिसे चली आती थी
बेसुध सी राधा बेचारी
धीरे धीरे बीज प्यार का पनपा होगा
तुम दोनों का ह्रदय साथ में धड़का होगा
राधा के कोमल कपोल को,
जिस दिन तुमने छुआ होगा
सहम गयी होगी बेचारी
मन में कुछ कुछ हुआ होगा
और शरद पूनम के दिन जब
तुमने रास रचाया होगा
राधा का तनमन कितना हर्षाया होगा
कहते पहला प्यार भुलाया ना जा पाता
तुम्हे अभी भी याद कभी आती है राधा?
नटवर नागर!
काहे फोड़ा करते थे गोपी के गागर?
और एक दिन जमुना तीरे से
पानी में स्नान कर रही सभी गोपियों ,
के थे वस्त्र चुराए चुपके से ,धीरे से
ये तुम्हारी  क्रीडा थी या उत्कंठा थी
या फिर थी नैनों की तृष्णा?
प्यारे कृष्णा
अधर तुम्हारे लगी हुई जून्ठी मुरली को
जब राधा ने अपने अधरों से छुआ था
तुमको ख़ुशी हुई थी या फिर द्वेष हुआ था?
हे ब्रजेश इतना बतलाना
था स्वादिष्ट कौनसा खाना?
राधा की मटकी को तोड़ चुराया मख्खन
या फिर पटरानी के हाथ बनाये व्यंजन?
हे नन्द नंदन !सच सच बात बताना मन की
कहाँ शांति मिलती थी तुमको सबसे ज्यादा,
रानी के संग राजमहल में
या राधा संग ,कुञ्ज गली में ,वृन्दावन की?
हे मथुरेश्वर!
कौन मधुर था सबसे प्यारा?
उन सोलह हजार एक सौ आठ
,रानियों के संग करना रमण तुम्हारा
या बंशी वट,जमुना तीरे,
राधा के संग रास रचना प्यारा प्यारा
हे गोपाला!
जिस दिन गोकुल छोड़ अचानक,
चले गए थे तुम जब मथुरा
गोप गोपियाँ, नन्द यशोदा,सखियाँ, राधा
सभी दुखी थे ,
क्या तुमको भी लगा था बुरा?
और फिर जहाँ बिताया बचपन
वापस कभी नहीं लौटे तुम
माता पिता प्रेमिका ,सारे संगी साथी
कोई तुमको याद ना आया
सारे रिश्ते नाते जैसे  झूठीं माया
बेगानापन निष्ठुरता थी या फिर क्या था?
क्या गीता का ज्ञान यहीं से शुरू हुआ था?
हे योगेश्वर!
मै मानव हूँ,और तुम थे अवतार धरे
लेकिन कितनी हे बातें हैं,
जो हैं मेरी समझ से परे
समय मिले तो सुलझा देना मेरी शंका
ताकि दूर हो जाए सब भ्रम मेरे मन का

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Wednesday, March 30, 2011

तेरा चुम्बन

 तेरा चुम्बन
मन की प्यास बढ़ा देता है तेरा चुम्बन
तन में आग लगा देता है तेरा चुम्बन
नरम,मखमली,रक्तिम आभा,रस के प्याले
अक्षय मदिरा पात्र,मदभरे अधर तुम्हारे
छू उन्माद जगा देता है तेरा चुम्बन
तन में आग लगा देता है तेरा चुम्बन
तप्त कलश तेरे जब छूते मेरे तन को
होता मन बेचैन,मचलता मधुर मिलन को
प्रीतधार बरसा देता है तेरा चुम्बन
मेरा मन हर्षा देता है तेरा चुम्बन
मिलते तपते अधर,बड़ी ठंडक मिलती है
एक नयी उर्जा ,खुशबू मादक मिलती है
मन को बहला कर सहलाता तेरा चुम्बन
प्यार जगाता है  मदमाता तेरा चुम्बन
मेरे भाग जगा देता है तेरा चुम्बन
तन में आग लगा देता है तेरा चुम्बन

अचरज

   अचरज
एक पिरामिड मिश्र देश का,एक भारत का ताज महल है
ये दोनों ही बेमिसाल है,और  दुनिया  के   आश्चर्य है
दोनों का निर्माण कराया ,उनने जो तब करते शासन
कितने जन का खून पसीना,कितने मजदूरों का शोषण
लाखों का धन लुटा कोष से,सिर्फ इसलिए बनी ईमारत
उनके मरने पर दुनिया में,उनके शव रह सकें सुरक्षित
ये बन गए अजूबे लेकिन ,एक अजूबा सबसे भारी
जिनको खबर न अगले पल की,करते बरसों की तैयारी
इन पत्थर दिल राजाओं ने,रचे अजूबे ,जग नश्वर में
अपनी माटी की काया को,रखने पत्थर  संगमरमर में
अनजाने नियति नीयत से ,होनी होती बड़ी प्रबल है
एक पिरामिड मिश्र देश का,एक भारत का ताज महल है