Sunday, April 24, 2011

डुगडुगी राजा


      डुगडुगी  राजा
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कभी था दुनिया को जीतने का ख्वाब
पर असफलताओ के बाद
जब नहीं दिया तकदीर ने संग
तो बन गए पार्टी के ढपोर शंख
कोई भी हो छोटी मोटी बात
बन जाती है इनके लिए खबर खास
किसी की आलोचना  या करना हो अपमान
हाज़िर है इनका बयान
खबर में रहने को बेसबर
टी वी के कैमरे पर इनकी नज़र
दूसरे ही दिन अपने बयान से पलट जाते है
और फिर टी वी की ख़बरों में नज़र आते है
मिडिया को भी रहती है ख़बरों की तलाश
सुनाती रहती है इनकी बकवास
और ये बजाते रहते है डुगडुगी ,बाजा
अंधेर नगरी ,डुगडुगी राजा
         मदन मोहन बहेती 'घोटू'

Thursday, April 21, 2011

-गर्मी-

 तेज धुप हो ,बहे पसीना ,तो गर्मी है
पहलू में हो कोई हसीना ,तो गर्मी है
गुस्से से मुहं अगर लाल है,तो गर्मी है
पोकित में जो अगर माल है,तो गर्मी है
तेजी से बढ़ता बाज़ार है,तो गर्मी है
तबियत बिगड़ी है ,बुखार है,तो गर्मी है
राजनीती में चहल पहल है,तो गर्मी है
पद है ,बंगला हैकि महल है ,तो गर्मी है
गर्मी कई तरह की होती, बहुत गरम है
नियम गणित का ,दो ऋण मिल कर होते धन है
पर गर्मी की बीजगणित उलटी होती है
दो गर्मी के मिलने पर सर्दी होती है
मई जून का मौसम बड़ा गरम होता है
धनवानों का पॉकेट बड़ा गरम होता है
लेकिन जब ये दोनों गर्मी मिल जाती है
तो हिलस्टेशन पर जाकर गर्मी आती है
जब सर्दी होती तो कांप कांप हम जाते
गर्म दो बदन,जब आपस में है टकराते
अधर कांपते ,अंग अंग में होती सिहरन
ये सब तो,सर्दी वाले ही होते लक्षण
गर्म खून वाले ,दो ,लड़ते खेल खेल में
 एक वहीँ ठंडा पड़ता है ,एक जेल में
एक राज़ की बात आपको हम बतलाये
जब सर्दी आने को हो ,दीवाली आये
  आने वाली सर्दी सर्दी से हम सब डरते है
इसीलिए तो लक्ष्मी की पूजा करते है
हे लक्ष्मी  मैया! तू साथ हमारे रहना
गर्म तिजोरी,पॉकेट हरदम करती रहना
पॉकेट हो यदि गरम ,सभी कुछ गरम गरम है
सर्दी आये पास ,कहाँ सर्दी में दम है
हीटर,शाल,रजाई,सूट,स्वेटर ,कार्डिगन
पॉकेट गरम,बराबर उसको सारे मौसम
और गर्मी आने के पहले आती होली
मस्ती,मौज,शरारत,होती हंसी ,ठिठोली
ऋतू बसंती होती ही है यूं मदमाती
की गर्मी आने के पहले गर्मी आती
वेतन जीवी लोगों का मौसम बेदर्दी
एक तारीख को गर्मी और तीस को सर्दी
ऊपर वाले अफसर बहुत गरम होते है
तब ही केबिन एयर कंडीशन होते है
ये भी देखा है,कुछ लोग सख्त होते है
लेकिन उनके चमचे बड़े भक्त होते है
गर्मी का नरमी से नजदीकी नाता है
गर्मी पाकर के फौलाद पिघल जाता है
सही जगह पर सही किसम की  गर्मी देना
जब तक अंडे न निकले,अण्डों को सेना
जिसको हो ये ज्ञान,सफलता वो पाता है
धीरे धीरे बड़ा आदमी बन जाता है
तो यह सच है ,गर्मी सबके मन भाती है
गर्मी की गरिमा है ,सबको गरमाती है
गर्म जलेबी,गर्म समोसे ,गर्म पकोड़ी
गरम गरम गाजर का हलवा,गर्म कचोडी
गर्म चाय हो,कोफ़ी या आलू की टिकिया
गर्म चीज सब खाने में लगती है बढ़िया
गर्म देश के लोग भला हम गर्म न होंगे
जाने अब तक ये गर्मी के मर्म न होंगे
इसीलिए तुम छोडो सारी शर्मा शर्मी
मजा उठाओ गर्मी का ,जब तक है गर्मी

मदन मोहन बहेती 'घोटू'
नोयडा उ.प्र

 

Wednesday, April 20, 2011

गीत मिलन के हम गाते है



सपन संजोये प्रियदर्शन के,गीत मिलन के हम गाते है
  किस्मत से छींका टूटेगा ,अपने मन को समझाते है
हुए प्यार में अंधे उनके,पर बटेर कब हाथ लगेगी
जो बाँट रही रेवड़ी मीठी ,हमको भी तो कभी मिलेगी
आस लगाये हम बैठे है,छप्पर फाड़ मिलेगा कब धन
कब सूखी बगिया सर्सेगी,फूल खिलेंगे मेरे आँगन
इस अंधियारी सी कुटिया में ,जाने कब उजियारा होगा
कब आशा के दीप जलेंगे,कब दीदार तुम्हारा होगा
सपन मिलन के संजो रखे है,जाने कब वो होंगे पूरे
कब परियां नाचेंगी मन में ,जाने कब आएगी हूरें
मेरे मन के      वृन्दावन में,        रास करेगी राधा रानी
दिल की इस सूखी  धरती पर  कब बरसेगा रिमझिम पानी
सोंधी सोंधी सी खुशबू से,कब महकेगी मन की माटी
कब तुम मुझे सहारा दोगी ,बन कर इस अंधे की लाठी
तिल तिल करके जलते दिल को,ये दूरी मंजूर नहीं है
भटक रहा है बंजारा मन,पर अब दिल्ली दूर नहीं है
कहते लोग ,भोर में देखे ,सब सपने सच हो जाते है
गीत मिलन के हम गाते है
मदन मोहन बहेती 'घोटू'







Tuesday, April 19, 2011

मजबूरी- गठबंधन की


मजबूरी- गठबंधन की

ये दुनिया कितनी हसीन है,फूल खिले है सुन्दर सुन्दर
जी करता सबकी खुशबू लूं,बनूँ भ्रमर ,रस पियूं जी भर
हिरन जैसी भरूं कुलांछे, खाऊं गुलाटी बन्दर जैसी
खुल कर खेलूँ,मौज मनाऊ,इच्छा दिल के अन्दर ऐसी
मन मलंग मचले मस्ती को,हैं सोये अरमान मचलते
लेकिन टूट टूट जाते हैं ,सारे सपने पलते ,पलते
अरे विवाहित मर्दों की क्या ,होती है सब इच्छा पूरी
जीवन डोर बंधी पत्नी  संग ,गठबंधन की है मजबूरी
पढ़ा लिखा सीधा सादा सा , था मै चलता जीवन पथ पर
पर किस्मत के हालातों ने,खींच लिया सत्ता के रथ पर
जी करता है ,करूं सफाई, सारा भ्रष्टाचार मिटा दूं,
बेईमानी,रिश्वतखोरी, महंगाई को दूर हटा दूं
भ्रष्टों की जमात लगी है ,कई दलों का है  ये दलदल
कैसे मै निपटूं इन सबसे,बहुत हो रही छीछालेदर
सत्ता से दागी चेहरों को,दूर हटाना ,बहुत जरूरी
शंशोपज है,लाचारी है,गठबंधन की है मजबूरी
           मदन  मोहन बहेती 'घोटू'





Sunday, April 17, 2011

कुंती

        कुंती
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एक आधुनिक कन्या चुलबुली
एक तांत्रिक से मिली
तांत्रिक बोला ,मै भूत भविष्य सब बतला सकता हूँ
किसी  भी मृत आत्मा से ,मुलाक़ात करवा सकता हूँ
कन्या बोली "जो कहते हो करके दिखलाओ
हो सके तो कुंती की आत्मा को बुलवाओ ,
मैंने सुना है उसे एक एसा मन्त्र आता था
जिसे पढ़ कर जिसका भी स्मरण करो
वो सामने आजाता था,
वो मन्त्र अगर मुझे मिल जायेगा
तो शाहरुख़ ,सलमान, जिसका भी स्मरण करो
आपकी बाँहों में आजायेगा"
तांत्रिक ने कुछ मन्त्र पढ़े और क्रियाये की
और थोड़ी देर में आगई आत्मा कुंती की
कन्या ने मन्त्र जानने की अभिलाषा जतलाई
तो कुंती की आत्मा ने ये बात बतलाई
की इस मन्त्र  से स्मरण किये व्यक्ति से,
संतान उत्पन्न होगी ,एसा इस मन्त्र का असर है
कन्या बोली मुझे इसका नहीं बिलकुल भी डर है
मै तो बस दिल बह्लौंगी
और नियम से 'पिल'  खाऊँगी
   मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

चिंगारी

चिंगारी
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हायड्रोजन हलकी होती है
और ज्वलनशील भी
(हलके लोग जलते और जलाते है)
ओक्सिजन प्राणदायिनी होती है
पर जलने में मददगार है
(शायद यह उसका स्वाभाव है)
जरुरत है  एक ऐसी बिजली की चिंगारी की
जो इन दोनों को मिला कर
इनका स्वभाव बदल दे
इन्हें पानी(H2O)  बना दे
जो प्राणदायक हो
और जलन की आग को बुझा दे
ऐसी चिंगारी
मै कहाँ से लाऊ?
         मदन मोहन बाहेती 'घोटू'


समाजवाद


आदमी,
जब उतर आता है,
मानसिक धरातल से
शारिरिक धरातल पर
तब औरत रह जाती है सिर्फ मादा,
और आमादा हो जाता है ,
पुरुष पशुता पर
उस समय
राजा और प्रजा में
ज्ञानी अज्ञानी में
धनि और निर्धन में
छोटे और बड़े में
कोई फर्क नहीं रहता
सब एक जैसे होते है
उन्माद के वो क्षण ही
सच्चे समाजवादी क्षण होते है
      मदन मोहन बहेती 'घोटू'