Wednesday, February 22, 2012

कल्कि अवतार का मत करो इन्तजार

कल्कि अवतार का मत करो इन्तजार
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पुराण बतलाते है
जब जब धर्म की हानि होती है,
भगवान अवतार ले कर आते है
त्रेता में राम का रूप धर कर अवतार लिया
द्वापर में कृष्ण रूप में प्रकटे,
और दुष्टों का संहार किया
पर आजकल,इस कलयुग में,धर्म की हानि नहीं,
धर्म का विस्तार हो रहा है
जिधर देखो उधर धर्म ही धर्म,
का प्रचार हो रहा है
भागवत कथाएं,
गाँव गाँव शहर,कस्बो में,
टी.वी. के कई चेनलों में,
साल भर चलती है
कितनी भीड़ उमड़ती है
भागवत कथा सुन कर कितने ही श्रोताओं में,
मोक्ष की आस जगी है
तीर्थो में उमड़ती भीड़ को देखो,
सब में पुण्य कमाने की होड़ लगी है
मंदिरों में आजकल इतने लोग जाते है
कि भक्तों को दर्शन देते देते,
भगवान भी थक जाते है
तब सांवरिया सेठ का रूप धर,
भगवान ने नानीबाई का मायरा भरा था
अपने भक्त नरसी मेहता पर उपकार करा था
आज कल कई सेठ,
कितनी ही गरीब कन्याओं का,
सामूहिक विवाह करवाते है
और भरपूर पुण्य कमाते है
तब एक श्रवण कुमार ने,
अपने बूढ़े माता पिता को,
तीर्थ यात्रा करवाई थी,
कांवड़ में बिठा कर
आज कितने ही श्रवण  कुमार,
अपने बूढ़े माता पिता को,
तीर्थ यात्रा करवाते है,
हेलिकोफ्टर  में बिठा कर
पहले आदमी जब गया तीर्थ था जाता,
तो गया गया सो गया ही गया था कहा जाता
और आज कल गया जानेवाला,
सुबह गया जाता है,
और शाम तक वापस भी लौट आता है
धर्म का लगाव बढ़ता ही जा रहा है
लोगों में भक्ति भाव ,बढ़ता ही जा रहा है
तो जो लोग कल्कि अवतार का इन्तजार कर रहें है
बेकार कर रहे है
क्योंकि जब इतनी धार्मिक भावनायें,
भारत में जागृत है
तो भगवान को अवतार लेने की क्या जरुरत है?

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Monday, February 20, 2012

अरे ओ औलाद वालों!

अरे ओ औलाद वालों!
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अरे ओ औलाद वालों,
बुजुर्गों को मत प्रताड़ो
आएगा तुम पर बुढ़ापा,
जरा इतना तो विचारो
जिन्होंने अपना सभी कुछ,तुम्हारे खातिर लुटाया
तुम्हारा जीवन संवारा,रहे भूखे,खुद न खाया
तुम्हारी हर एक पीड़ा पर हुआ था दर्द जिनको
आज कर उनकी उपेक्षा,दे रहे क्यों पीड़ उनको
बसे तुम जिनके ह्रदय में,
उन्हें मत घर से निकालो
अरे ओ औलाद वालों !
समय का ये चक्र ऐसा,घूम कर आता वहीँ है
जो करोगे बड़ो के संग,आप संग होना वही है
सूर्य के ही ताप से जल,वाष्प बन,बादल बना है
ढक रहा है सूर्य को ही,गर्व से इतना तना  है
बरस कर फिर जल बनोगे,
गर्व को अपने संहारो
अरे ओ औलाद वालों!
बाल मन कोमल न जाने,क्या गलत है,क्या सही है
देखता जो बड़े करते,बाद में करता वही  है
इस तरह संस्कार पोषित कर रहे तुम बालमन के
बीज खुद ही बो रहे,अपने बुढ़ापे  की घुटन के
क्या गलत है,क्या सही है,
जरा अपना मन खंगालो
अरे ओ औलाद वालों!

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Sunday, February 19, 2012

बसंत आ रही है

बसंत आ रही है
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पहले सुबह,
ओस की चादर से,
धीरे धीरे अपना मुख उघाडती थी
ठंडी,ठंडी,अलसाई सी,
देर से जागती  थी
अंगडाइयाँ  ले लेकर,
उबासियाँ  लिया करती थी
उठ कर सबसे पहले,
गरम चाय का प्याला पिया करती थी
पहले सबसे प्यारा,
रजाई और बिस्तर लगता था
सुबह सुबह,
ठंडा पानी छूने में भी  डर लगता था
पर आज सुबह,
उजली उजली सी,
नहा धोकर,
खुले खुले वस्त्र पहने,मुस्करा रही है
क्या बसंत ऋतू आ रही है

मदन मोहन बहेती'घोटू'

वैवाहिक जीवन की सफलता के सात सूत्र

वैवाहिक जीवन की सफलता के सात सूत्र
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                        १
सुखमय परिवार का पहला मन्त्र यही है
जो कुछ भी पत्नी कहती कहती है,वही सही है
                        २
पत्नी दुबली हो तो बोलो कनक छड़ी हो
मोटी हो तो यौवन से भरपूर  भरी हो
रूप प्रसंशा कर पत्नी की कहते रहिये,
कभी'चाँद हो,'कभी'फूल हो',कभी'परी हो'
                       ३
सजधज पत्नी पूछे मै लगती हूँ कैसी
कहो न जग में कोई कोई है तुम्हारे जैसी
फ़िल्मी हिरोईन परदे पर लगे  सुहानी
पर तुम्हारे आगे  सब भरती है पानी
                          ४
सुखी रहोगे यदि पत्नी से यह कह पाये
तुमसे अच्छा खाना कोई बना ना पाये
बाकी सब है यूं ही,तुम्हारी बात और है
तुम्हारे खाने का होता स्वाद   और है
                          ५
साला,सास,सालियाँ ये सब पूजनीय है,
इनकी तारीफ़ करिए,इनको आप साधिये
सुख से करना पार अगर जीवन बेतरनी,
पत्नी की तारीफों के पुल,आप बांधिये
                           ६
किसी और औरत की तारीफ़ कभी न करना
सोफे पर सोना पड़ सकता,तुमको   वरना
                            ७
ऑफिस में 'यस सर'यस सर',घर में 'यस मेडम'
तो खुशियों से भरा  रहेगा जीवन  हरदम

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Friday, February 17, 2012

मै बसंती,तुम बसंती

मै बसंती,तुम बसंती
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मौन मन ही मन मिलन की,कामनाये बलवती थी
तुम्हारा सानिध्य पाने की लगन मन में लगी थी
बात दिल की कह न पाया था तुम्हे संकोच वश मै
भावना के ज्वार के आगे हुआ था पर विवश  मै
और जब मदमस्त आया,फाग का मौसम सुहाना
देख पुष्पित वाटिका को ,भ्रमर था पागल,दीवाना
मदन उत्सव पर्व आया,रंग छलके होलिका के
देख कर यौवन प्रफुल्लित,हो गयी बेचैन आँखें
ऋतू बासंती सुहानी,और मौसम मदभरा सा
देख कर के रूप तुम्हारा हुआ मै बावरा  सा
ज़रा सी गुलाल लेकर ,गाल पर मैंने  लगा दी
हो गए शर्मो हया से,गाल तुम्हारे   गुलाबी
नज़र जब तुमने झुका ली,लगी मुझको बात बनती
हो गयी तुम भी बसंती,हो गया मै भी बसंती

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

पलाश के फूल

पलाश के फूल
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हम पलाश के फूल,सजे ना गुलदस्ते में
खिल कर महके,सूख,गिर गये,फिर रस्ते में
वृक्ष खाखरे के थे ,खड़े हुए  जंगल में
पात काम आते थे ,दोने और पत्तल में
जब बसंत आया,तन पर कलियाँ मुस्काई
खिले मखमली फूल, सुनहरी आभा  छाई
भले वृक्ष की फुनगी  पर थे हम इठलाये
पर हम पर ना तितली ना भँवरे मंडराये
ना गुलाब से खिले,बने शोभा उपवन की
ना माला में गुंथे,देवता  के  पूजन की
ना गौरी के बालों में,वेणी  बन निखरे
ना ही मिलन सेज को महकाने को बिखरे
पर जब आया फाग,आस थी मन में पनपी
हमें मिलेगी छुवन किसी गौरी के तन की
कोई हमको तोड़,भिगा,होली खेलेगा
रंग हमारा भिगा अंग गौरी के देगा
तकते रहे राह ,कोई आये, ले जाये
बीत गया फागुन, हम बैठे आस लगाये
पर रसायनिक रंगों की इस चमक दमक में
नेसर्गिक रंगों को भुला दिया है सबने
जीवन यूं ही व्यर्थ  गया,रोते.हँसते में
हम पलाश के फूल,सजे ना गुलदस्ते में

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Wednesday, February 15, 2012

ब्रह्मा विष्णु महेश

ब्रह्मा विष्णु महेश
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भारत की सीमा पर,
तीन तरफ समंदर,
और एक तरफ पहाड़ है
और  हमारे त्रिदेव ,
ब्रह्मा,विष्णु महेश पर,
इसकी सुरक्षा का भार है
उत्तर में कैलाश पर्वत पर,
बिराजे है शिव शंकर,
चीन की सभी गतिविधियों पर,
रखे हुए है नज़र
और सुरक्षा समंदर की,
कर रहे है  विष्णु भगवान
उन्होंने तो समंदर के अन्दर ही,
बना लिया है रहने का स्थान
शेषनाग की शैया पर विराजते है
और भारत की,तीन तरफ की ,
सुरक्षा को, वो ही सँभालते है
यहाँ तक कि उनकी पत्नी लक्ष्मी जी,
भारत के आर्थिक विकास में है लगी
और तीसरे देव ब्रह्मा जी,
कमल नाल पर बैठे हुए,
अपने चारों मुखों से,
देश कि आतंरिक सुरक्षा पर,
पूरी नज़र रखें है
और सरस्वती के साथ,
देश कि बौद्धिक और सांस्कृतिक,
विरासत कि सुरक्षा में लगे  है
इन तीनो देवताओं का वरदान,
और आशीर्वाद हम पर है
इसीलिए तो आज  भारत ,
प्रगति के पथ पर है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'