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Saturday, August 11, 2012
सूरज,चाँद और तारे
सूरज
सूरज सूर है बड़ा,
जहाँ जहाँ जाता है
अँधेरे को हराता है
और जीती सीमा पर,
उजाला फैलाता है
उन्ही उन्ही जगहों पर,
दिन होता जाता है
चाँद
चंद्रमा की तो बड़ी,
निराली कहानी है
दुनिया में एसा ना,
कोई भी दानी है
सूरज से रौशनी,
वो उधार लेता है
और प्रकाश दुनिया में,
वो बाँट देता है
जब उधार कम मिलता,
तो वो घट जाता है
जब उधार ज्यादा मिलता,
तो वो बढ़ जाता है
पूनम को खुशहाल है
अमावास को कंगाल है
तारे
नन्हे नन्हे से तारे
दिन भर खेलने के बाद,थके हारे
बेचारे
आसमान में जाकर ,नींद के मारे
कभी पलक बंद करते,
कभी जाग जाते है
और हमको लगता है,
कि वो टिमटिमाते है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
आजकल हम रोज जिम जाने लगे है
प्यार में हम जिनके पगलाने लगे है
आजकल वो हमसे कतराने लगे है
तहे दिल से उनसे करते है मोहब्बत,
और उनको हम तो दीवाने लगें है
थोड़ी सी अच्छी हुई सेहत हमारी,
कहते है कि हम अब मोटियाने लगे है
दिल मिलाने की कहो तो तिलमिलाते,
आजकल वो नखरे दिखलाने लगे है
पेट या सरदर्द का करके बहाना,
किस तरह भी हम को टरकाने लगे है
दुबले होने डाइटिंग के नाम पर हम,
उबली सब्जी ,टमाटर ,खाने लगे है
'घोटू 'हम स्टीम ,सोना बाथ लेकर,
अपनी चर्बी , थोड़ी छटवाने लगे है
जब से उनने हमको मोटा कह दिया है,
आजकल हम रोज जिम जाने लगे है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Friday, August 10, 2012
चोरी की परमिशन
यदुवंशी किशन कन्हैया,
खुद माखन चुराते थे
और साथी ग्वालबालों से,
ये भी कहते जाते थे
तुम भी थोडा माखन चुरा सकते हो,
अपना ही माल है
और जन्माष्टमी के अवसर पर,
एक यदुवंशी नेता ने,
कृष्णजी की याद में,
यदि अपने अफसरों को,
थोड़ी बहुत चोरी करने की परमिशन देदी,
तो फिर क्यों बवाल है?
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
कब आओगे ,ओ! बनवारी
नयन जोहते बाट तुम्हारी
कब आओगे, ओ! बनवारी
रोज रोज माकन हांड़ी भर,
ताके राह यशोदा मैया
यमुना तक सुनसान पड़ा है,
कब आओगे रास रचैया
गोपी,राधा,सब दुखियारी
कब आओगे ओ! बनवारी
मन है मलिन ,देह कुब्जा सी,
मोह माया के निकले कूबड़
कब निज चरणों के प्रसाद से,
ठीक करोगे इनको गिरधर
आस लगाए है बेचारी
कब आओगे ओ!बनवारी
कैद पड़े बासुदेव,देवकी,
कंस चूर सत्ता के मद में
जनता त्राहि त्राहि कर रही,
सब की जान फंसी आफत में
कंस हनन अब करो मुरारी
कब आओगे ओ!बनवारी
जरासंध मद अंध हो रहा,
शिशुपाल भी है पगलाया
सौ से अधिक ,गालियाँ सह ली,
तुमने अपना वचन निभाया
चक्र चलाओ,सुदर्शनधारी
कब आओगे ओ!बनवारी
आओ नई पीढ़ी को जीवन,
जीने का सिखलाओ तरीका
रिश्ते नाते भुला दिये सब,
गीता से बस इतना सीखा
फिर समझाओ गीता सारी
कब आओगे ओ!बनवारी
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Thursday, August 9, 2012
नाम और काम
नाम और काम
सजना कभी नहीं कहते है तुमसे सज ना
दर्पण कभी नहीं कहता है दर्प न करना
नदिया ऐसी कोई नहीं जिसने न दिया हो
पिया न जिसने कभी अधर रस नहीं पिया हो
सूरज में रज नहीं मगर सूरज कहलाता
और समंदर ,जिसके अन्दर सभी समाता
वन देते है जीवन,वायु आयु प्रदायक
और जल,जलता नहीं,सदा शीतलता दायक
सभी तरफ दिखता समान वो आसमान है
प्रकृति की हर एक कृति,अद्भुत ,महान है
धरा, सभी कुछ इसी धरा में,ये माँ धरती
इशवर के ही वर से हम तुम है और जगती
जग मग ,जग को करते,सूरज चंदा तारे
सार युक्त संसार,अनोखे सभी नज़ारे
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
बौना का बौना
मेरी कृतियाँ,चूम रही है आसमान को,
अपनी कृतियों के आगे ,मै,सूक्ष्म खिलौना
मैंने उड़ कर,चाँद सितारे ,नापे सारे,
मै अदना सा जीव,रहा बौना का बौना
Wednesday, August 8, 2012
गाने-नये पुराने-अपने बेगाने
पुराने गाने
सुन्दर शब्दावली
मधुर धुन
कर्णप्रिय
मनभावन
पुरानी पीढ़ी की तरह
भावना और
रिश्तों की अहमियत से लिपटे हुए,
लम्बे समय तक लोगों को
याद रहनेवाले .
जब भी होठों पर आते है,
अपने से लगते है
और नये गाने अक्सर,
बेतुके बोल,
कानफोडू संगीत,
भाव शून्य
आत्मीयता विहीन
चार दिन तक शोर मचाते है
फिर बिसरा दिये जाते है
जहाँ अक्सर,
भावनाएं और आत्मीयता का बोध,
बड़ी मुश्किल से मिलता है
नये गाने,
नयी पीढ़ी की तरह ,
बेगाने होते जा रहे है
मदन मोहन बाहेती'घोटू',