Thursday, September 6, 2012

रुंगावन

       रुंगावन

मै तो लेने गया था ,इस जग की जिम्मेदारियां ,
                    रुंगावन  में बाँध दी संग,उसने कुछ  खुशियाँ मुझे
कुछ ठहाके,कहकहे कुछ,और कुछ मुस्कान भी,
                    लगी फिर से अच्छी लगने, ये तेरी दुनिया   मुझे
देता है सौदा खरा और नहीं डंडी मारता,
                    मुकद्दर से ही मिला है,तुझसा एक बनिया मुझे
कितने कांटे,कितने पत्थर और कितनी ठोकरें,
                    रोकने को राह ,रस्ते में मिला क्या क्या मुझे
  यहाँ से लेकर वहां तक ,मुश्किलें ही मुश्किलें,
                     पार करना पडा था एक आग का दरिया  मुझे
दूसरों के दोष मैंने देखना बंद करदिया,
                     नज़र खुद में ,लगी आने सैकड़ों ,कमियां मुझे
उसने रोशन राह करदी,सब अँधेरे मिट गए,
                       राह में मिल गयी बिखरी,हजारों खुशियाँ मुझे
लिखा था जो मुकद्दर में,उससे ज्यादा ही मिला,
                       उसकी मेहर हो गयी और  मिल गया क्या क्या मुझे

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

बाती और कपूर

बाती और कपूर

खुद को डूबा प्रेम के रस में,
               तुम जलती हो बन कर बाती
जब तक स्नेह भरा दीपक में,
                जी भर उजियाला    फैलाती
और कपूर की डली बना मै,
                  जल कर करूं आरती ,अर्चन,
निज अस्तित्व मिटा देता  मै,
                 मेरा होता पूर्ण समर्पण
तुम में ,मुझ में ,फर्क यही है,
               तुमभी जलती,मै भी जलता
तुम रस पाकर फिर जल जाती,
               और मै जल कर सिर्फ पिघलता

मदन मोहन बाहेती'घोटू'               

Tuesday, September 4, 2012

चुनाव लड़ने की घोषणा

चुनाव लड़ने की घोषणा

भाइयों,दोस्तों और मेरे शुभ चिंतकों,
मै आपको अभी से सूचित कर रहा हूँ
कि मै आने वाला आम चुनाव लड़ रहो हूँ
सभी राजनेतिक पार्टियों से मेरा मोह भंग हो गया है
इनके झूंठे वादों,भ्रष्टाचार और मंहगाई से,
आम आदमी तंग हो गया  है
इसलिए यदि आप साथ देंगे,
तो मै अकेले ही घोड़ी चढूँगा
और स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडूंगा
ये सच है अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है
पर अकेला जूता दुष्टों के सर फोड़  सकता है
इसलिए मैंने अपना चुनाव चिन्ह रखा है'जूता'
क्योंकि सब काम कराने का इसीमे है बूता
ये आपको काँटों से बचाता है
ठोकरों से  भी बचाता है
और सही सलामत मंजिल तक पहुंचाता है
ये आम आदमी का दोस्त है,
बड़ा मददगार है
और दुश्मनों से लड़ने के लिए,
सबसे सुगम हथियार है
सत्तारूढ़ पार्टी से जब भी कोई काम कराना होगा
तो जाहिर है,मुझको जूता  ही चलाना होगा
क्योंकि क्लिंटन हो या चिदंबरम,
जब जूता चल जाता है
तो खानेवाला और चलानेवाला,
बड़ी पब्लिसिटी पाता है
और आपका मुद्दा जनता के सामने आ जाता है
 मुझे विश्वास है,आपका सब काम ,
करवाउंगा मै जूते के बूते
क्योंकि मै जानता हूँ कि अगर मै,
आपकी उम्मीद पर खरा नहीं उतरा,
तो आप ही मुझे मारेंगे जूते
इसलिए कृपा करके अभी से नोट कीजिये
कि आने वाले चुनाव में जूते को ही बोट दीजिये
और दुआ कीजियेगा कि,
किसी भी पार्टी का बहुमत न आये
और कई दल मिलजुल कर सरकार बनाएं
और ऐसी सिचुवेशन में ,स्वतंत्र उम्मीदवार का,
महत्त्व तो आप जानते ही है
और आपके इस अदने से,जूतेवाले सेवक को,
तो आप पहचानते ही है
तोड़ जोड़ करके यदि बन गया मिनिस्टर
तो फिर आपकी सारी उम्मीद पर,
एकदम एसा खरा उतरूंगा
कि अपने चुनावक्षेत्र को,पोलिश कर,
एकदम जूते सा चमका दूंगा

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Monday, September 3, 2012

पति को पटाने के तीन नुस्खे

      पति को पटाने के तीन नुस्खे

                   १
अगर आप चाहती है कि आपके पति,
आपमें अरुचि ना रखें,
तो आप गरिष्ठ भोजन में अरुचि रखें
ताकि आपका बदन छरहरा रहे
और यौवन हरा भरा रहे
अपने शरीर को फैलने का मौका मत दो
और अपने पति को ,इधर उधर,
झाँकने का मौका मत दो
मतलब साफ़ है,यदि पति को पटाना है
तो आपको अपना वजन घटाना है
                    २
भजन,पूजन,कीर्तन,सब है आवश्यक
लेकिन ये अच्छे है,बस एक सीमा तक
धार्मिक बनो पर धर्म कि पराकाष्ठा मत करो
और देवताओं के चक्कर में ,अपने पति को मत बिसरो
क्योंकि पति भी होता है,एक रूप परमेश्वर का
उसकी सेवा में ही भला है घर भर का
भजन कीर्तन में इतना समय मत लगाओ
कि अपने पति को ही समय ना दे पाओ
यदि आपको अपने पति का प्यार पाना है
तो भगवान के साथ साथ,पति के गुण भी गाना है
                       ३
हमेशा मायके के गुण मत गाओ
और ससुरालवालों को बुरा मत बतलाओ
क्योंकि अब तुम्हारा घर,मायका नहीं,ससुराल है
और ससुराल वालों से मिला कर रखनी ताल है
पर सास,ननद और  रिश्तेदारों की सेवा के  चक्कर में
कई बार परेशानी भी हो जाती है घर में
इस चक्कर में खुद को इतना मत उलझादो
कि अपने प्यारे पतिदेव को ही भुलादो
अगर आपको प्यार का रस चखना है
तो अपने पति का पूरा पूरा ख्याल रखना है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

एक छोटी सी प्रार्थना

एक छोटी सी प्रार्थना

हे कमलनयन!
किसी कमल नयनी,सुकोमल,
सुमुखी सुंदरी के नयनों से,
मेरे नयन  मिलवा दो
हे गिरिधारी!
अपने वक्श्थल पर,
द्वि गिरी धारण किये हुए,
यौवन से लदी,
किसी षोडसी कन्या से,
मेरा मिलन करवादो
हे चतुर्भुज!
किसी कोमल,कमनीय,
कमलनाल सी भुजाओं वाली,
कामिनी के करपाश में बंध कर,
मै भी चतुर्भुज हो जाऊं,एसा वर दो
हे हिरण्यमयी लक्ष्मी के नाथ,
किसी स्वर्णिम आभावाली,
स्वर्ण  सुंदरी की स्वर्णिम मुस्कराहटों से,
मेरा जीवन भी स्वर्णिम कर दो

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
 

Sunday, September 2, 2012

एंड्रोयिड फोन

एंड्रोयिड  फोन

मेरे पति ने जब से एंड्रोयिड फोन लिया है,
बस उसीसे  हरदम चिपके रहते है
और तो और ,मुझे भी,एंड्रोयिड की तरह,
यूजर फ्रेंडली कहते है
 कहते है इसके लिए चाहिये वाय फाय
और तुम तो खुद ही हो हाय  फाय
इसे चार्ज करने में लगता हाई टाइम
और हरदम प्यार से चार्ज रहती हो तुम
ये फेस बुक पर दोस्तों से मिला सकता है
या बच्चों को गेम खिला सकता है
और तुम बच्चों को गेम भी खिला सकती हो
और घर भर को खाना भी खिला  सकती हो
घर के काम धाम के साथ,तुम्हे प्यार करना भी आता है
और ये तो सिर्फ मन बहलाता है
ये वक्त काटने के लिए ठीक है,
पर मुझे तुम्हारा साथ ही ज्यादा सुहाता है
मैंने बोला आजकल आप बहुत बातें बनाने लगे है
जब से टच स्कीन की आदत पड़ गयी है,
आप मुझे बड़े प्यार से सहलाने  लगे है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

ट्रेन की खिड़की से क्या क्या देखूं ?

ट्रेन की खिड़की से क्या क्या देखूं ?

ट्रेन की खिड़की से झांकता हुआ,
मै सोचता हूँ कि मै क्या क्या देखूं?
अखबार के सफ़ेद कागज़ पर,
 काली श्याही से छपी,लूटमार कि,
या ख़बरें सियासी देखूं
या धरती के आँगन में ,
दूर दूर तक फैली हरियाली देखूं
उन रेल कि पटरियों को देखूं,
जिनकी दूरियां ,
आपस में कभी ना मिल पाती है
या उनपर चलती हुई रेलगाड़ियाँ देखूं,
जो दूरियां मिटाती हुई,बिछड़ों को मिलाती है
ऊपर   फैले हुए निर्जीव तारों के जाल को देखूं,
जिनमे बहती विद्युत् धारा,
रेल को गतिमान करती है
या पटरियों के वे जोइंट देखूं,
जहाँ से रेल,दलबदलू नेताओं कि तरह,
पटरियां बदलती है
पटरियों के किनारे,सुबह सुबह,
शंका निवारण करते हुए,
झुग्गी झोंपड़ी वासियों की कतार देखूं
या उनके पीछे खड़ी हुई,
उनका उपहास उडाती ,
अट्टालिकाओं का  अंबार देखूं
मै इसी शशोपज में था कि,
पासवाली रेल लाइन पर सामने से,
तेज गति से एक रेल आती है
और विपरीत दिशाओं में जाने के कारण,
विरोधाभास उत्पन्न करती हुई,
दूनी गति का आभास कराती है
इसी विरोधाभास को देख कर लगता है,
क्यों बढती जा रही,
अमीरी और गरीबी के बीच की दूरियां है 
ये तो कभी ना मिल सकने वाली,
रेल की पटरियां है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'