कुम्भ स्नान और हादसा
हरेक बारह वर्षों के बाद में
हरद्वार,उज्जैन,नासिक और प्रयाग में
आता है कुम्भ का पर्व महान
और खुल जाती है धर्म की दुकान
साधू,सन्यासी,संत और महंत
साधारण आदमी और श्रीमंत
सभी का रेला लगता है
बहुत बड़ा मेला लगता है
सर पर पोटली,मन में आस्था
बस से,रेल से,या चल पैदल रास्ता
भीड़ ल गा करती,पुण्य कमाने वालों की
एक डुबकी लगा कर के,मोक्ष पानेवालों की
धर्म के ठेकेदार बतलाते है
यहाँ एक खास दिन नहाने से ,पाप धुल जाते है
और मोक्ष के द्वार खुल जाते है
आज के जमाने में ,मोक्ष इतनी सस्ती मिल जाती है
पुण्य की लोभी ,जनता खिंची चली आती है
ग्रहों का एसा मिलन,बर्षों बाद होता है
ऐसे में स्नान और दान से ,पुण्य लाभ होता है
करोडो की भीड़
न ठिकाना न नीड़
डुबकी लगा कर,
पुण्य कमा कर ,
जब वापस जाती है
स्टेशनों पर भगदड़ मच जाती है
सेंकडो लोग इस भगदड़ में दब जाते है
कितनो के ही प्राण पंखेरू उड़ जाते है
कोई सरकार को दोषी ठहराता है
कोई इंतजाम की कमी बतलाता है
कोई कहता जिनने सच्ची श्रद्धा से डुबकी लगाई
उसे पुण्य लाभ मिल गया और मोक्ष पायी
हादसे होते ही रहते है ,पर लोग जाते है
सस्ते में पाप धोते है,डुबकी लगाते है
धर्म के नाम पर,गजब है इनका हौंसला
राम जाने,कब मिटेगा ये ढकोसला
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
http://blogsmanch.blogspot.com/" target="_blank"> (ब्लॉगों का संकलक)" width="160" border="0" height="60" src="http://i1084.photobucket.com/albums/j413/mayankaircel/02.jpg" />
Monday, February 11, 2013
Sunday, February 10, 2013
नाक
नाक
जब तक साँसों का स्पंदन है, धड़कन है
जब तक दिल में धड़कन है ,तब तक जीवन है
द्वार सांस का ,जिससे साँसे , आती जाती
सबसे उठा अंग चेहरे का, नाक कहाती
दो सुरंग ये,राजमार्ग है ,ओक्सिजन की
सबसे अद्भुत उपलब्धि,मानव के तन की
चेहरे बीच ,सुशोभित होती,शीश उठाके
नीचे मधुर अधर ,ऊपर कजरारी आँखें
लाल लाल कोमल कपोल के बीच सुहाती
खुशबू,बदबू,का मानव को भान कराती
सुन्दर तीखी नाक,रूप लगता है प्यारा
कभी लोंग हीरे की मारे है लश्कारा
सजती कभी पहन कर नथनी मोती वाली
है प्रतीक यह मान,शान की बड़ी निराली
चश्मे को आँखों पर ठीक,टिका रखती है
प्यार और चुम्बन कुछ बाधा करती है
कभी छींकती है जुकाम में,कभी टपकती
कभी नींद में होती तो खर्राटे भरती
होती ऊंचीं नाक कभी है ये कट जाती
कहलाते है बाल नाक के,सच्चे साथी
मन की प्रतिक्रियाओं से इसका नाता है
नथुने फूला करते ,जब गुस्सा आता है
अगर किसी से नफरत तो भौं नाक सिकुड़ती
इज्जत जाती चली,नाक कोई की कटती
कोई नाक रगड़ता ,कोई नाक चडाता
परेशान कर कोई नाकों चने चबाता
कोई नाक पर मख्खी तक न बैठने देता
तंग करता है कोई, नाक में दम कर देता
किन्तु समझ में ,मेरे ,बात नहीं ये आती
खतरनाक और शर्मनाक में ये क्यों आती
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
निष्ठा
निष्ठा
जो अपने घर में श्वानो को पाला करते
भली तरह से वो ये बातें,जाना करते
हरदम चौकन्ने से रहते श्वान बहुत है
स्वामिभक्त कहाते,निष्ठावान बहुत है
सुबह शाम पर उनको टहलना पड़ता है
उनको सहलाना और बहलाना पड़ता है
अगर चाहिये तुम्हे किसी की सच्ची निष्ठां
कभी उठानी भी पड़ सकती ,उसकी विष्ठा
घोटू
प्रेम दिवस
वेलेंटाइन सप्ताह
(दूसरा नजराना)
प्रेम दिवस
प्रेम का कोई दिवस होता नहीं,
प्रेम का हर एक दिन ही ख़ास है
प्रेम हर वातावरण में महकता ,
प्रेम की हर ह्रदय में उच्छ्वास है
प्रेम पूजन,प्रेम ही आराधना ,
प्रेम में परमात्मा का वास है
प्रेम तो है कृष्ण राधा का मिलन,
राम का चौदह बरस बनवास है
प्रेम मीरा के भजन में गूंजता ,
सूर के पद में इसी का वास है
सोहनी -महिवाल,रांझा -हीर और,
लैला-मजनू प्रेम का इतिहास है
प्रेम बंधन भावनाओं से भरा ,
प्रेम जीवन का मधुर अहसास है
प्रेम में ही समर्पण है,त्याग है,
एक दूजे का अटल विश्वास है
प्रेम गुड का स्वाद गूंगा जानता ,
पर न कह पाता ,वही आभास है
जो समझ ले ढाई आखर प्रेम का,
तो समझ लो,प्रभु उसके पास है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
Saturday, February 9, 2013
वेलेन्टाइन सप्ताह आरम्भ
वेलेन्टाइन सप्ताह आरम्भ
1
इश्क हो या प्यार हो या मोहब्बत कुछ भी कहो,
प्रेम के हर नाम में ,आधा अधूरा हर्फ़ है
लैला मजनू की कहो या सोहनी महिवाल की,
दास्ताने पुरानी ,इतिहास में अब दर्ज है
हीर रांझा ,और कितने आशिकों की जोड़ियाँ,
बेपनाह जिनमे मोहब्बत थी ,मगर मिल ना सके ,
इसका कारण था कि इनमे हर किसी के नाम में,
हर्फ़ थे पूरे सभी, कोई न आधा हर्फ़ है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
1
इश्क हो या प्यार हो या मोहब्बत कुछ भी कहो,
प्रेम के हर नाम में ,आधा अधूरा हर्फ़ है
लैला मजनू की कहो या सोहनी महिवाल की,
दास्ताने पुरानी ,इतिहास में अब दर्ज है
हीर रांझा ,और कितने आशिकों की जोड़ियाँ,
बेपनाह जिनमे मोहब्बत थी ,मगर मिल ना सके ,
इसका कारण था कि इनमे हर किसी के नाम में,
हर्फ़ थे पूरे सभी, कोई न आधा हर्फ़ है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Friday, February 8, 2013
सबसे ज्यादा
सबसे ज्यादा
सर्दी में सर्दी पड़ती है सब से ज्यादा
गर्मी में गर्मी पड़ती है सबसे ज्यादा
हर मौसम का मज़ा ,उसी मौसम में आता
बारिश में बारिश पड़ती है सब से ज्यादा
बारिश बाद बहुत होती है जब बीमारी,
सब से ज्यादा ,खुश होते है ,तभी डॉक्टर
दीवाली पर मिठाई की दूकानों में,
सबसे ज्यादा भीड़ लगाते ,कई कस्टमर
सबसे ज्यादा शहद बना करता बसंत में ,
सब से ज्यादा च्यवनप्राश बिकता सर्दी में
सबसे ज्यादा छतरी बिकती है बारिश में ,
धोबी परेशान ज्यादा दिखता सरदी में
सब से ज्यादा आइसक्रीम लुभाती मन को,
जब होता है गरम गरम मौसम गर्मी का
गरमा गरम पकोड़ी भाती है बारिश में,
सर्दी में गाजर का हलवा ,देशी घी का
सबसे ज्यादा आशिक खुश होते सर्दी में,
क्योंकि दिन छोटे होते और लम्बी रातें
सबसे ज्यादा,पति घबराता है बीबी से,
दुनिया में सबसे लम्बी ,औरत की बातें
एक बरस में ,पंदरह दिन,बस श्राद्ध पक्ष के ,
पंडित जी है सबसे ज्यादा मौज मनाते
तीन,चार यजमानो के घर भोजन करते ,
और दक्षिणा भी अच्छी खासी पा जाते
सबसे अच्छा ,मुझे फरवरी महिना लगता ,
पूरी तनख्वाह ,काम मगर बस अठ्ठाइस दिन
जब चुनाव का मौसम आने वाला होता ,
सबसे ज्यादा ,तब नेताजी,देते दर्शन
सबसे ज्यादा प्यार जताती है पत्नी जी ,
पहली तारीख को,जिस दिन मिलती पगार है
सबसे ज्यादा खुश होते स्कूल के बच्चे,
छुट्टी मिलती,टीचर को आता बुखार है
कभी आपने सोचा भी है ,इस जीवन में,
जाने क्या क्या ,कब कब होता ,सबसे ज्यादा
कई बार देते तुमको दुःख सबसे ज्यादा ,
जिनको आप प्यार करते है सबसे ज्यादा
मदन मोहन बाहेती'घोटू '
सर्दी में सर्दी पड़ती है सब से ज्यादा
गर्मी में गर्मी पड़ती है सबसे ज्यादा
हर मौसम का मज़ा ,उसी मौसम में आता
बारिश में बारिश पड़ती है सब से ज्यादा
बारिश बाद बहुत होती है जब बीमारी,
सब से ज्यादा ,खुश होते है ,तभी डॉक्टर
दीवाली पर मिठाई की दूकानों में,
सबसे ज्यादा भीड़ लगाते ,कई कस्टमर
सबसे ज्यादा शहद बना करता बसंत में ,
सब से ज्यादा च्यवनप्राश बिकता सर्दी में
सबसे ज्यादा छतरी बिकती है बारिश में ,
धोबी परेशान ज्यादा दिखता सरदी में
सब से ज्यादा आइसक्रीम लुभाती मन को,
जब होता है गरम गरम मौसम गर्मी का
गरमा गरम पकोड़ी भाती है बारिश में,
सर्दी में गाजर का हलवा ,देशी घी का
सबसे ज्यादा आशिक खुश होते सर्दी में,
क्योंकि दिन छोटे होते और लम्बी रातें
सबसे ज्यादा,पति घबराता है बीबी से,
दुनिया में सबसे लम्बी ,औरत की बातें
एक बरस में ,पंदरह दिन,बस श्राद्ध पक्ष के ,
पंडित जी है सबसे ज्यादा मौज मनाते
तीन,चार यजमानो के घर भोजन करते ,
और दक्षिणा भी अच्छी खासी पा जाते
सबसे अच्छा ,मुझे फरवरी महिना लगता ,
पूरी तनख्वाह ,काम मगर बस अठ्ठाइस दिन
जब चुनाव का मौसम आने वाला होता ,
सबसे ज्यादा ,तब नेताजी,देते दर्शन
सबसे ज्यादा प्यार जताती है पत्नी जी ,
पहली तारीख को,जिस दिन मिलती पगार है
सबसे ज्यादा खुश होते स्कूल के बच्चे,
छुट्टी मिलती,टीचर को आता बुखार है
कभी आपने सोचा भी है ,इस जीवन में,
जाने क्या क्या ,कब कब होता ,सबसे ज्यादा
कई बार देते तुमको दुःख सबसे ज्यादा ,
जिनको आप प्यार करते है सबसे ज्यादा
मदन मोहन बाहेती'घोटू '
मेरा दिल कमजोर हो गया
मेरा दिल कमजोर हो गया
तब भी था कमजोर हुआ जब देखा पहली बार तुम्हे
होकर पागल दीवाना सा ,ये कर बैठा प्यार तुम्हे
ऐसी डोर बंध गयी फिर तो,तुम्हारे संग नातों में
पड़ जाता कमजोर बिचारा ,तुम्हारी हर बातों में
इतना तुमने प्यार जताया ,मन आनंद विभोर हो गया
मेरा दिल कमजोर हो गया
फिर बच्चों की जिद या हठ का,इस पर इतना जोर पड़ा
कभी प्यार से या गुस्से से ,ये हरदम कमजोर पड़ा
दफ्तर में साहब की घुड़की ,इस दिल को धड़काती थी
सीमित साधन और बढती मंहगाई इसे सताती थी
अब तो देखो ये विद्रोही बनकर के मुंहजोर हो गया
मेरा दिल कमजोर हो गया
धीरे धीरे ,साथ उमर के ,आई ऐसी कमजोरी
सांस फूलने लग जाती है,करने पर मेहनत थोड़ी
डोक्टर ने चेकिंग की और बतलाया कारण मुश्किल का
रक्त प्रवाह हो गया है कम ,तुम्हारे नाजुक दिल का
बढती उमर ,परेशानी का,अब कुछ ऐसा दौर हो गया
मेरा दिल कमजोर हो गया
मदन मोहन बहेती'घोटू'
तब भी था कमजोर हुआ जब देखा पहली बार तुम्हे
होकर पागल दीवाना सा ,ये कर बैठा प्यार तुम्हे
ऐसी डोर बंध गयी फिर तो,तुम्हारे संग नातों में
पड़ जाता कमजोर बिचारा ,तुम्हारी हर बातों में
इतना तुमने प्यार जताया ,मन आनंद विभोर हो गया
मेरा दिल कमजोर हो गया
फिर बच्चों की जिद या हठ का,इस पर इतना जोर पड़ा
कभी प्यार से या गुस्से से ,ये हरदम कमजोर पड़ा
दफ्तर में साहब की घुड़की ,इस दिल को धड़काती थी
सीमित साधन और बढती मंहगाई इसे सताती थी
अब तो देखो ये विद्रोही बनकर के मुंहजोर हो गया
मेरा दिल कमजोर हो गया
धीरे धीरे ,साथ उमर के ,आई ऐसी कमजोरी
सांस फूलने लग जाती है,करने पर मेहनत थोड़ी
डोक्टर ने चेकिंग की और बतलाया कारण मुश्किल का
रक्त प्रवाह हो गया है कम ,तुम्हारे नाजुक दिल का
बढती उमर ,परेशानी का,अब कुछ ऐसा दौर हो गया
मेरा दिल कमजोर हो गया
मदन मोहन बहेती'घोटू'
Subscribe to:
Posts (Atom)