राजभोग से
भोज थाल में सज,सुन्दर से
भरे हुऐ ,पिस्ता केसर से
अंग अंग में ,रस है तेरे
लुभा रहा है मन को मेरे
स्वर्णिम काया ,सुगठित,सुन्दर
राजभोग तू ,बड़ा मनोहर
बड़ी शान से इतराता है
तू इस मन को ललचाता है
जब होगा उदरस्त हमारे
कुछ क्षण स्वाद रहेगा प्यारे
मज़ा आएगा तुझ को खाके
मगर पेट के अन्दर जाके
सब जाने नियति क्या होगी
और कल तेरी गति क्या होगी
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
http://blogsmanch.blogspot.com/" target="_blank"> (ब्लॉगों का संकलक)" width="160" border="0" height="60" src="http://i1084.photobucket.com/albums/j413/mayankaircel/02.jpg" />
Monday, February 18, 2013
अपने अपने ढंग
अपने अपने ढंग
जब भी ये आये है तो ,रोकी नहीं जाये फिर ,
करोगे नहीं तो देगी ,दम ये निकाल कर
बैठे बैठे नारी करे,खड़े खड़े नर करे ,
सड़क किनारे कभी ,तो कभी दीवार पर
शिशु करे सोते सोते ,गोदी में या रोते रोते,
पंडित करे है कान पे जनेऊ डाल कर
कोई डर जाये करे,कोई पिट जाये करे,
बूढ़े करे धीरे धीरे ,देर तक ,संभाल कर
टांग उठा ,करे कुत्ता,जगह को सूंघ सूंघ ,
बिजली का खम्बा कोई,पास देख भाल कर
करने के सबके है ,अपने तरीके अलग,
बड़ा ही सुकून मिले ,इसको निकाल कर
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
जब भी ये आये है तो ,रोकी नहीं जाये फिर ,
करोगे नहीं तो देगी ,दम ये निकाल कर
बैठे बैठे नारी करे,खड़े खड़े नर करे ,
सड़क किनारे कभी ,तो कभी दीवार पर
शिशु करे सोते सोते ,गोदी में या रोते रोते,
पंडित करे है कान पे जनेऊ डाल कर
कोई डर जाये करे,कोई पिट जाये करे,
बूढ़े करे धीरे धीरे ,देर तक ,संभाल कर
टांग उठा ,करे कुत्ता,जगह को सूंघ सूंघ ,
बिजली का खम्बा कोई,पास देख भाल कर
करने के सबके है ,अपने तरीके अलग,
बड़ा ही सुकून मिले ,इसको निकाल कर
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
Sunday, February 17, 2013
माँ की महानता
माँ की महानता
माँ महान है बुद्धि दायिनी
माँ उड़ान है सुख प्रदायिनी
स्वाभमान है -माँ जन्मदायिनी--माँ
माँ विशेष है ज्ञान सुरसरी
माँ सन्देश है प्यार से भरी
माँ स्वदेश है -माँ ममता माधुरी -माँ
माँ तरंग है माँ जीवन है
माँ उमंग है माँ आँगन है
सदा संग है -माँ वृन्दावन है-माँ
माँ संगीत है माँ है जननी
माँ पुनीत है ज्ञान वर्धिनी
प्रेमगीत है --माँ पथप्रदार्शिनी -माँ
माँ है शिक्षा माँ गंगा है
माँ है दीक्षा जगदम्बा है
और परीक्षा -माँ अनुकम्पा है-माँ
सद विचार है बुद्धि प्रदाता
प्रीत धार है सुख की दाता
मधुर प्यार है -माँ भाग्य विधाता -माँ
माँ भोली है माँ कविता है
माँ डोरी है माँ सरिता है
माँ लोरी है-माँ और गीता है -माँ
माँ विकास है आशीषें भर
माँ प्रकाश है करे निछावर
माँ मिठास है-माँ जो जीवन भर -माँ
माँ अनूप है माँ पोषण है
ज्ञान कूप है माँ चन्दन है
देवी रूप है -माँ आराधन है -माँ
माँ दीया है माँ ममता है
कुछ न लिया है, माँ समता है
सदा दिया है-माँ माँ बस माँ है -माँ
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
माँ महान है बुद्धि दायिनी
माँ उड़ान है सुख प्रदायिनी
स्वाभमान है -माँ जन्मदायिनी--माँ
माँ विशेष है ज्ञान सुरसरी
माँ सन्देश है प्यार से भरी
माँ स्वदेश है -माँ ममता माधुरी -माँ
माँ तरंग है माँ जीवन है
माँ उमंग है माँ आँगन है
सदा संग है -माँ वृन्दावन है-माँ
माँ संगीत है माँ है जननी
माँ पुनीत है ज्ञान वर्धिनी
प्रेमगीत है --माँ पथप्रदार्शिनी -माँ
माँ है शिक्षा माँ गंगा है
माँ है दीक्षा जगदम्बा है
और परीक्षा -माँ अनुकम्पा है-माँ
सद विचार है बुद्धि प्रदाता
प्रीत धार है सुख की दाता
मधुर प्यार है -माँ भाग्य विधाता -माँ
माँ भोली है माँ कविता है
माँ डोरी है माँ सरिता है
माँ लोरी है-माँ और गीता है -माँ
माँ विकास है आशीषें भर
माँ प्रकाश है करे निछावर
माँ मिठास है-माँ जो जीवन भर -माँ
माँ अनूप है माँ पोषण है
ज्ञान कूप है माँ चन्दन है
देवी रूप है -माँ आराधन है -माँ
माँ दीया है माँ ममता है
कुछ न लिया है, माँ समता है
सदा दिया है-माँ माँ बस माँ है -माँ
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Saturday, February 16, 2013
भाग्य का आलेख
भाग्य का आलेख
कोई कितना भ्रमित करदे ,स्वप्न सुनहरे दिखा कर
हमें बस मिलता वही है,लाये है जो हम लिखा कर
भाग्य के आलेख को ,कोई बदल सकता नहीं है
लिखा है तकदीर में जो,हमें बस मिलता वही है
हम कहाँ की सोचते है,पहुँचते है कहाँ जाकर
हमें बस मिलता वही है ,लाये हैं जो हम लिखा कर
कर्म निज करते रहें हम,स्वयं में विश्वास रख कर
बढ़ें आगे ,लक्ष्य पाने ,धेर्य को निज,साथ रख कर
नियति अपने आप देगी,सफलताओं से मिला कर
हमें बस मिलता वही है,लाये है जो भी लिखा कर
दिग्भ्रमित करने तुम्हारी,राह में अड़चन मिलेगी
कभी कांटे भी चुभेंगे , कभी ठोकर भी लगेगी
अँधेरे में ,पथ प्रदर्शन,करे वो दिया जलाकर
हमें बस मिलता वही है,लाये है,जो भी लिखाकर
भाग्य में यदि महाभारत ,लिखी है जो विधाता ने
कृष्ण खुद ही आयेंगे ,बन सारथी ,रथ को चलाने
युद्ध में तुमको जिताएंगे तुम्हारा हक दिला कर
हमें बस मिलता वही है ,लाये हैं हम जो लिखा कर
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
कोई कितना भ्रमित करदे ,स्वप्न सुनहरे दिखा कर
हमें बस मिलता वही है,लाये है जो हम लिखा कर
भाग्य के आलेख को ,कोई बदल सकता नहीं है
लिखा है तकदीर में जो,हमें बस मिलता वही है
हम कहाँ की सोचते है,पहुँचते है कहाँ जाकर
हमें बस मिलता वही है ,लाये हैं जो हम लिखा कर
कर्म निज करते रहें हम,स्वयं में विश्वास रख कर
बढ़ें आगे ,लक्ष्य पाने ,धेर्य को निज,साथ रख कर
नियति अपने आप देगी,सफलताओं से मिला कर
हमें बस मिलता वही है,लाये है जो भी लिखा कर
दिग्भ्रमित करने तुम्हारी,राह में अड़चन मिलेगी
कभी कांटे भी चुभेंगे , कभी ठोकर भी लगेगी
अँधेरे में ,पथ प्रदर्शन,करे वो दिया जलाकर
हमें बस मिलता वही है,लाये है,जो भी लिखाकर
भाग्य में यदि महाभारत ,लिखी है जो विधाता ने
कृष्ण खुद ही आयेंगे ,बन सारथी ,रथ को चलाने
युद्ध में तुमको जिताएंगे तुम्हारा हक दिला कर
हमें बस मिलता वही है ,लाये हैं हम जो लिखा कर
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
पेट पूजा
पेट पूजा
आओ हम तुम बैठ
हाथों में ले प्लेट,
पहले पेट पूजा करें
अपना पेट भरें
क्योंकि कोई भी काम ठीक से,
तभी होता है,जब पेट भरता है
इस पापी पेट के कारण ,
आदमी क्या क्या नहीं करता है
पेट,शरीर का वो अंग है,
जो सबसे ज्यादा आलसी और सुस्त है
हाथ ,पाँव,मुंह,आँख और दांत,
सभी काम करते है,चुस्त है
पर पेट आराम से बैठा ,
इन अंगों से काम करवाता है
और बैठा बैठा ,मजे से खाता है
पेट,पेटी जैसा है,
इसमें सब कुछ समा जाता है
पेट की अपनी कोई पसंद नहीं होती,
वो जिव्हा की पसंद पर निर्भर है
जिव्हा ,स्वाद ले ले कर खाती है,
और बेचारा पेट,जाता भर है
जो भी मुंह,पीता या खाता है
पेट में चला जाता है
और पेट,बैठा बैठा उसे पचाता है
पेट में सिर्फ खाना पीना ही नहीं ,
कई चीजें जाती है
जैसे कोई खबर हो या राज की बात ,
औरतों के पेट में जाती है ,
मगर पच ना पाती है
नेताओं का पेट बड़ा मोटा होता है,
जिसमे करोड़ों की रिश्वत समां जाती है
फिर भी उनकी भूख नहीं जाती है
गरीब का पेट ,पिचका हुआ होता है,
और मेहनत मजदूरी करके ,जब वो कुछ खाता है
तब पीठ और पेट का अंतर नज़र आता है
लालाओं के पेट,काफी बड़े रहते है
जिसे तोंद कहते है
ये ऐसे लोग होते है,जो खूब खाते है ,
तोंद बढ़ाते है,
फिर तोंद के कारण ही परेशान रहते है
घबराहट में ,आदमी के पेट में पानी पड जाता है
और ज्यादा हंसने पर पेट में बल पड़ने लगते है
और ज्यादा भूख लगने पर,
पेट में चूहे दौड़ने लगते है
बाबा रामदेव ने टी वी पर
अपना पेट हिला हिला कर ,
करोड़ों भक्त बना लिए है
और अरबों कमा लियें है
समझदार महिलायें ,जानती है ,
कि पति को किस तरह पटाया जाता है
वो पति के पेट का ,पूरा ख्याल रखती है,
क्योंकि ,दिल का रास्ता ,पेट से होकर जाता है
पेट के खातिर ,कितनी ही नर्तकियां
बेली डांस करती है,पेट को नचा नचा
कोई भी काम ,अच्छी तरह करने के पहले ,
पेट की पूजा की जाती है
और कोई भी काम की सिद्धि के लिए,
बड़े पेट वाले याने लम्बोदर गणेश जी ,
को पूजा चढ़ाई जाती है
आदमी की जिंदगी का उदयकाल,
नौ महीने तक माँ के पेट में ही रहता है
और जिंदगी भर,आदमी ,पेट के चक्कर में ही,
दिन रात काम में ही लगा रहता है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
आओ हम तुम बैठ
हाथों में ले प्लेट,
पहले पेट पूजा करें
अपना पेट भरें
क्योंकि कोई भी काम ठीक से,
तभी होता है,जब पेट भरता है
इस पापी पेट के कारण ,
आदमी क्या क्या नहीं करता है
पेट,शरीर का वो अंग है,
जो सबसे ज्यादा आलसी और सुस्त है
हाथ ,पाँव,मुंह,आँख और दांत,
सभी काम करते है,चुस्त है
पर पेट आराम से बैठा ,
इन अंगों से काम करवाता है
और बैठा बैठा ,मजे से खाता है
पेट,पेटी जैसा है,
इसमें सब कुछ समा जाता है
पेट की अपनी कोई पसंद नहीं होती,
वो जिव्हा की पसंद पर निर्भर है
जिव्हा ,स्वाद ले ले कर खाती है,
और बेचारा पेट,जाता भर है
जो भी मुंह,पीता या खाता है
पेट में चला जाता है
और पेट,बैठा बैठा उसे पचाता है
पेट में सिर्फ खाना पीना ही नहीं ,
कई चीजें जाती है
जैसे कोई खबर हो या राज की बात ,
औरतों के पेट में जाती है ,
मगर पच ना पाती है
नेताओं का पेट बड़ा मोटा होता है,
जिसमे करोड़ों की रिश्वत समां जाती है
फिर भी उनकी भूख नहीं जाती है
गरीब का पेट ,पिचका हुआ होता है,
और मेहनत मजदूरी करके ,जब वो कुछ खाता है
तब पीठ और पेट का अंतर नज़र आता है
लालाओं के पेट,काफी बड़े रहते है
जिसे तोंद कहते है
ये ऐसे लोग होते है,जो खूब खाते है ,
तोंद बढ़ाते है,
फिर तोंद के कारण ही परेशान रहते है
घबराहट में ,आदमी के पेट में पानी पड जाता है
और ज्यादा हंसने पर पेट में बल पड़ने लगते है
और ज्यादा भूख लगने पर,
पेट में चूहे दौड़ने लगते है
बाबा रामदेव ने टी वी पर
अपना पेट हिला हिला कर ,
करोड़ों भक्त बना लिए है
और अरबों कमा लियें है
समझदार महिलायें ,जानती है ,
कि पति को किस तरह पटाया जाता है
वो पति के पेट का ,पूरा ख्याल रखती है,
क्योंकि ,दिल का रास्ता ,पेट से होकर जाता है
पेट के खातिर ,कितनी ही नर्तकियां
बेली डांस करती है,पेट को नचा नचा
कोई भी काम ,अच्छी तरह करने के पहले ,
पेट की पूजा की जाती है
और कोई भी काम की सिद्धि के लिए,
बड़े पेट वाले याने लम्बोदर गणेश जी ,
को पूजा चढ़ाई जाती है
आदमी की जिंदगी का उदयकाल,
नौ महीने तक माँ के पेट में ही रहता है
और जिंदगी भर,आदमी ,पेट के चक्कर में ही,
दिन रात काम में ही लगा रहता है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
Friday, February 15, 2013
तुम बसंती -मै बसंती
तुम बसंती -मै बसंती
तुम बसंती ,मै बसंती
लग रही है बात बनती
गेंहू बाली सी थिरकती,
उम्र है बाली तुम्हारी
पवन के संग झूमती हो,
बड़ी सुन्दर,बड़ी प्यारी
आ रही तुम पर जवानी,
बीज भी भरने लगे है
और मै तरु आम्र का हूँ,
बौर अब खिलने लगे है
तुम बहुत मुझको लुभाती,
सच बताऊँ बात मन की
तुम बसंती, मै बसंती
लग रही है बात बनती
खेत सरसों के सुनहरे ,
में खड़ी तुम,लहलहाती
स्वर्ण सी आभा तुम्हारी,
प्रीत है मन में जगाती
डाल पर ,पलाश की मै ,
केसरी सा पुष्प प्यारा
मिलन की आशा संजोये ,
तुम्हे करता हूँ निहारा
पीत तुम भी,पीत मै भी,
आयें कब घड़ियाँ मिलन की
तुम बसंती,मै बसंती
लग रही है बात बनती
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
तुम बसंती ,मै बसंती
लग रही है बात बनती
गेंहू बाली सी थिरकती,
उम्र है बाली तुम्हारी
पवन के संग झूमती हो,
बड़ी सुन्दर,बड़ी प्यारी
आ रही तुम पर जवानी,
बीज भी भरने लगे है
और मै तरु आम्र का हूँ,
बौर अब खिलने लगे है
तुम बहुत मुझको लुभाती,
सच बताऊँ बात मन की
तुम बसंती, मै बसंती
लग रही है बात बनती
खेत सरसों के सुनहरे ,
में खड़ी तुम,लहलहाती
स्वर्ण सी आभा तुम्हारी,
प्रीत है मन में जगाती
डाल पर ,पलाश की मै ,
केसरी सा पुष्प प्यारा
मिलन की आशा संजोये ,
तुम्हे करता हूँ निहारा
पीत तुम भी,पीत मै भी,
आयें कब घड़ियाँ मिलन की
तुम बसंती,मै बसंती
लग रही है बात बनती
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
मन- बसंत
मन- बसंत
मन बसंत था कल तक जो अब संत हो गया
अभिलाषा ,इच्छाओं का बस अंत हो गया
जब से मेरी ,प्राण प्रिया ने करी ,ठिठौली ,
राम करूं क्या ,बूढा मेरा कंत हो गया
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
मन बसंत था कल तक जो अब संत हो गया
अभिलाषा ,इच्छाओं का बस अंत हो गया
जब से मेरी ,प्राण प्रिया ने करी ,ठिठौली ,
राम करूं क्या ,बूढा मेरा कंत हो गया
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
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