घोटू के पद
महिला दिवस पर विशेष
बिन घूँघरू ,नारी नाची रे
घरवाले सब नाच नचायें,फिरती भागी भागी रे
रही रात भर ,नींद उचटती ,सो ना पायी जागी रे
ससुर साहब ,खर्राटे भरते,सास रात भर खांसी रे
सुबह हुई ,जुट गयी काम में ,ले ना पायी उबासी रे
चूल्हा चौका,झाड़ू पोंछा,बन गयी घर की दासी रे
शाम पड़े तक ,पस्त होगई ,मुख पर छाई उदासी रे
सोते ही बस ,आँख लग गयी,पिया मिलन की प्यासी रे
'घोटू'कठिन,नारी का जीवन ,खेल नहीं ना हांसी रे
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
http://blogsmanch.blogspot.com/" target="_blank"> (ब्लॉगों का संकलक)" width="160" border="0" height="60" src="http://i1084.photobucket.com/albums/j413/mayankaircel/02.jpg" />
Friday, March 8, 2013
सभी जगह छाई है महिला
महिला दिवस पर विशेष
सभी जगह छाई है महिला
विद्या देवी सरस्वती जी
धन की देवी श्री लक्ष्मी जी
शक्ति की देवी दुर्गा है
इस जग की जननी ,महिला है
कांग्रेस में सोनिया गाँधी
दिल्ली की शासक शीला जी
तमिलनाडु में जय ललिता
तो फिर कोलकता में ममता
सभी जगह छाई है महिला
उनका नंबर सबसे पहला
हम सब ही नारी के बस है
अपना हर दिन,नारी दिवस है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
सभी जगह छाई है महिला
विद्या देवी सरस्वती जी
धन की देवी श्री लक्ष्मी जी
शक्ति की देवी दुर्गा है
इस जग की जननी ,महिला है
कांग्रेस में सोनिया गाँधी
दिल्ली की शासक शीला जी
तमिलनाडु में जय ललिता
तो फिर कोलकता में ममता
सभी जगह छाई है महिला
उनका नंबर सबसे पहला
हम सब ही नारी के बस है
अपना हर दिन,नारी दिवस है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
Thursday, March 7, 2013
कत्था-चूना
कत्था-चूना
देश को चूना लगाने वाले इन पनवाडियों ने
सत्ताधारियों ने
जनता के (खान)पान में ,इतना चूना लगाया है
कि सारा का सारा मुख उपड आया है
और छाले पड गए है जबान में
अब तो बस आएगा वो ही काम में
जो फटे हुए मुंह पर लगाएगा कत्था
अगली बार,वो ही पायेगा सत्ता
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
देश को चूना लगाने वाले इन पनवाडियों ने
सत्ताधारियों ने
जनता के (खान)पान में ,इतना चूना लगाया है
कि सारा का सारा मुख उपड आया है
और छाले पड गए है जबान में
अब तो बस आएगा वो ही काम में
जो फटे हुए मुंह पर लगाएगा कत्था
अगली बार,वो ही पायेगा सत्ता
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
बहुत तुम जुल्म ढाती हो
बहुत तुम जुल्म ढाती हो
जो बोसा लूं,चुभे खंजर,
लूं चुम्बन काट खाती हो
जो मै लूं हाथ हाथों में,
मुझे नाख़ून चुभाती हो
जो फेरूँ हाथ जुल्फों पर ,
तो हेयरपिन मुझे चुभते,
बहुत तुम जुल्म ढाती हो,
जब मेरे पास आती हो
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
जो बोसा लूं,चुभे खंजर,
लूं चुम्बन काट खाती हो
जो मै लूं हाथ हाथों में,
मुझे नाख़ून चुभाती हो
जो फेरूँ हाथ जुल्फों पर ,
तो हेयरपिन मुझे चुभते,
बहुत तुम जुल्म ढाती हो,
जब मेरे पास आती हो
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
अबकी होली ऐसे खेलो
अबकी होली ऐसे खेलो
घर के बुजुर्ग भी इन्सां है
उनके भी मन में अरमां है
एकाकीपन उन्हें खटकता है
मुश्किल से वक़्त गुजरता है
तुम जान तभी ये पाओगे
जब तुम बूढ़े हो जाओगे
वे जीवनदाता तुम्हारे
तुम लगते हो जिनको प्यारे
ये बात बहुत चुभती मन को
कर रहे उपेक्षित तुम उनको
वे यह अहसान चाहते है
थोडा सा ध्यान चाहते है
मेरा तुमसे ये कहना है
वे बड़े दुखी है,तनहा है
उनका मन जरा टटोलो तुम
दो शब्द प्यार के बोलो तुम
मुट्ठी भर प्यार उन्हें दे दो
सुख का संसार उन्हें दे दो
अबकी होली में ले गुलाल
उनका मुंह रंग दो,लाल लाल
पग छुवो,करो प्रणाम उन्हें
दे दो थोडा सन्मान उन्हें
उनके झुर्राये से मुख पर
उमड़ेंगे ,खुशियों के बादल
आँखों से बह कर प्रेमनीर
कर देगा तुमको भी अधीर
बस इतना सा कर देने पर
जायेंगे वो खुशियों से भर
वो दिल से तुम्हे दुआ देंगे
और आशिषे बरसा देंगे
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
घर के बुजुर्ग भी इन्सां है
उनके भी मन में अरमां है
एकाकीपन उन्हें खटकता है
मुश्किल से वक़्त गुजरता है
तुम जान तभी ये पाओगे
जब तुम बूढ़े हो जाओगे
वे जीवनदाता तुम्हारे
तुम लगते हो जिनको प्यारे
ये बात बहुत चुभती मन को
कर रहे उपेक्षित तुम उनको
वे यह अहसान चाहते है
थोडा सा ध्यान चाहते है
मेरा तुमसे ये कहना है
वे बड़े दुखी है,तनहा है
उनका मन जरा टटोलो तुम
दो शब्द प्यार के बोलो तुम
मुट्ठी भर प्यार उन्हें दे दो
सुख का संसार उन्हें दे दो
अबकी होली में ले गुलाल
उनका मुंह रंग दो,लाल लाल
पग छुवो,करो प्रणाम उन्हें
दे दो थोडा सन्मान उन्हें
उनके झुर्राये से मुख पर
उमड़ेंगे ,खुशियों के बादल
आँखों से बह कर प्रेमनीर
कर देगा तुमको भी अधीर
बस इतना सा कर देने पर
जायेंगे वो खुशियों से भर
वो दिल से तुम्हे दुआ देंगे
और आशिषे बरसा देंगे
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
होली का त्योंहार
घोटू के पद
1
होली का त्योंहार
आया होली का त्योंहार
साजन कहे ,न मलना गौरी ,मेरे गाल गुलाल
दो दिन नहीं हजामत किन्ही ,बढे हुए है बाल
कमल दलों से ,नाज़ुक,कोमल,हाथ तुम्हारे लाल
चुभ तुमको घायल ना करदे ,बालों का जंजाल
'घोटू'विहंस ,नायिका बोली,मोहे नहीं मलाल
कितनी बार चुभा तुम दाढ़ी ,घायल किन्हें गाल
इस होली मै ,तुमको रंग कर,बरसा दूँगी प्यार
2
ऐसी, ऋतू बसंत की आई
स्वेटर ,शाल ढके दुबके थे,वो तन पड़े दिखाई
सूखे,फटे कपोलन पर ,अब आने लगी लुनाई
बैठ गेलरी ,चाय पिवत ,बोली राधा ,अलसाई
तुम जल्दी घर पर आ जाना ,आज शाम कन्हाई
बहुत दिनों से ,चाट पकोड़ी ,ना है हमने खायी
देख मूड अच्छा राधा का,कान्हा मन मुस्काई
'घोटू'छुट्टी ले ,पूरे दिन ,महिला दिवस मनाई
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
1
होली का त्योंहार
आया होली का त्योंहार
साजन कहे ,न मलना गौरी ,मेरे गाल गुलाल
दो दिन नहीं हजामत किन्ही ,बढे हुए है बाल
कमल दलों से ,नाज़ुक,कोमल,हाथ तुम्हारे लाल
चुभ तुमको घायल ना करदे ,बालों का जंजाल
'घोटू'विहंस ,नायिका बोली,मोहे नहीं मलाल
कितनी बार चुभा तुम दाढ़ी ,घायल किन्हें गाल
इस होली मै ,तुमको रंग कर,बरसा दूँगी प्यार
2
ऐसी, ऋतू बसंत की आई
स्वेटर ,शाल ढके दुबके थे,वो तन पड़े दिखाई
सूखे,फटे कपोलन पर ,अब आने लगी लुनाई
बैठ गेलरी ,चाय पिवत ,बोली राधा ,अलसाई
तुम जल्दी घर पर आ जाना ,आज शाम कन्हाई
बहुत दिनों से ,चाट पकोड़ी ,ना है हमने खायी
देख मूड अच्छा राधा का,कान्हा मन मुस्काई
'घोटू'छुट्टी ले ,पूरे दिन ,महिला दिवस मनाई
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Wednesday, March 6, 2013
घोटू के दोहे
घोटू के दोहे
1
नए नए हम सीरियल ,देखा करते नित्य
किसको फुर्सत है भला ,पढ़े नया सहित्य
2
ना तो मीठे बोल है,ना सुर है ना तान
चार दिनों तक गूंजते ,फिर खो जाते गान
3
वो गजलों का ज़माना,मन भावन संगीत
अब भी है मन में बसे ,वो प्यारे से गीत
4
साप्ताहिक था धर्मयुग ,या वो हिन्दुस्थान
गीत,लेख और कहानी,भर देते थे ज्ञान
5
कवि सम्मलेन रात भर,श्रोता सुनते मुग्ध
प्रहसन ,सस्ते लाफ्टर ,कर देते है क्षुब्ध
6
अंगरेजी का गार्डन ,फूल रहा है फ़ैल
एक बरस में एक दिन,बोते हिंदी बेल
7
छोटे छोटे दल बने,सब में है बिखराव
तो फिर कैसे आयेगा ,भारत में बदलाव
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
1
नए नए हम सीरियल ,देखा करते नित्य
किसको फुर्सत है भला ,पढ़े नया सहित्य
2
ना तो मीठे बोल है,ना सुर है ना तान
चार दिनों तक गूंजते ,फिर खो जाते गान
3
वो गजलों का ज़माना,मन भावन संगीत
अब भी है मन में बसे ,वो प्यारे से गीत
4
साप्ताहिक था धर्मयुग ,या वो हिन्दुस्थान
गीत,लेख और कहानी,भर देते थे ज्ञान
5
कवि सम्मलेन रात भर,श्रोता सुनते मुग्ध
प्रहसन ,सस्ते लाफ्टर ,कर देते है क्षुब्ध
6
अंगरेजी का गार्डन ,फूल रहा है फ़ैल
एक बरस में एक दिन,बोते हिंदी बेल
7
छोटे छोटे दल बने,सब में है बिखराव
तो फिर कैसे आयेगा ,भारत में बदलाव
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
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