Wednesday, April 13, 2016

     घोटूजी के भी अच्छे दिन आने वाले है

कल हमसे हमारे एक दोस्त मिले
और बोले 'घोटूजी,आप दिख रहे हो कुछ पिलपिले
आपका तो टावर वन है
वो तो रेस्टोरेंट वालों का 'जंकशन'है
'सिनेमन किचन' है 
चल रहा नंबर वन है
'मिस्ट्री ऑफ़ फ़ूड' है
खाना भी 'टू गुड'है
'येलो चिलीज ' है
गजब की चीज है
सुना है'वी ,दी फूडिज 'भी आरहा है
अभी से ललचा रहा है
और खुलनेवाला 'पंजाबी तड़का'है
अभी से रहा भूख भड़का है
टावर टू वालों का 'देशी वाइब्स 'भी मजेदार है
कहते है खाना और सजावट दोनों जोरदार है
इसके बावजूद भी आपका ये हाल है
हो रही पतली दाल है
घोटू बोले यार ये सब तो बड़े बड़े नाम है
ऊंची दूकान है और मंहंगे दाम है
कोई भूले से भी 'इनवाइट ' नहीं करता है
घर की रोटी से ही पेट भरना पड़ता है
मोदीजी कहते है अच्छे दिन आएंगे
देखते है ये कब खाने पर बुलाएंगे
और अगर किस्मत ज्यादा ही जोर मारे
हो सकता है ये हमे ,
अपना 'ब्रांड अम्बेसेडर' ही बनाले

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

Monday, April 11, 2016

        सांसें बहुएं एक सरीखी

औरत होकर भी औरत का ,साथ निभाना ये ना सीखी
सारी  सासें    एक सरीखी, सारी  बहुएं   एक  सरीखी
चाहे मीठी बात बना कर ,बातें करती हो शक्कर सी
पर जब भी मौका मिलता है ,आपस में देती टक्कर सी
हरी ,लाल हो चाहे काली , हर  मिरची  होती है तीखी
सारी सांसें  एक सरीखी ,सारी  बहुएं  एक  सरीखी
माँ  सोचे  बेटा बेगाना  हुआ , हुई  शादी  उस पल से
बहू सोचती कैसा पति है ,बंधा रहे माँ के   आंचल  से
 ऐसी ही तो तू तू,मै मै ,होती हर घर में है दिखी
 सारी  सांसें एक सरीखी,सारी   बहुएं  एक सरीखी
चाहे सास ,इजाजत के बिन,उसकी हिले न कोई पत्ता
बहू चाहे ,हो जाए रिटायर ,सास ,सौंप कर घर की सत्ता
बंद हो जाए टोका टाकी , ताने देना ,  बातें  तीखी
सारी  सांसें  एक सरीखी , सारी बहुएं एक सरीखी
उसको,खुद को,नहीं बहू की ,जो जो बातें कभी सुहाती
उल्टा सीधा पाठ पढ़ा कर ,बेटी को  वो ही सिखलाती
इस चक्कर में ,दोनों रहती,इक दूजे से कटी कटी सी
सारी  सांसें एक सरीखी  ,सारी  बहुएँ   एक  सरीखी
 वो भी तो थी बहू एक दिन ,उसने भी सांसें झेली है
साँसों की बॉलिंग के आगे ,बेटिंग कर, पाली खेली है
'स्पिन'और' फास्ट' थी बॉलिंग,फिर भी है मैदान पर टिकी
सारी   सांसें  एक  सरीखी ,सारी  बहुएं  एक  सरीखी
बहू दूध है  ताज़ा ताज़ा ,सास  पुराना  जमा  दही  है
करे न तारीफ़ ,कोई किसी की ,उल्टी गंगा कभी बही है
माँ बीबी के बीच फजीहत ,होती है बेचारे  पति की
सारी   सांसें  एक  सरीखी ,सारी  बहुएं  एक सरीखी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
ढलती उमर -पत्नीजी की दो सलाहें 

साजन
सूरज जब ढलने वाला होता है ,
आशिक़ मिजाज हो जाता है
अपनी माशूकाएं बदलियों पर ,
अपनी दरियादिली दिखलाता है
किसी को सुनहरी चूनर से सजाता है
किसी को स्वर्णिम 'नेकलेस' पहनाता है
प्रियतम ,
अब तुम्हारी भी उमर ढल रही है
तुम भी ढलते सूरज की तरह ,
आशिकमिजाज बन जाओ
अपनी दरियादिली दिखलाओ
मै ,तुम्हारी बदली ,
अब तक ना बदली ,
अब तो तुम भी मुझे ,
स्वर्णखचित वस्त्रों से सजाओ
मेरे लिए एक अच्छा सा ,
सोने का 'नेकलेस 'ले आओ 

प्रियतम ,
क्यों परेशान हो रहे हो तुम
अगर तुम्हारे तन में ,
बढ़ रही है 'शुगर'
तो ये क्यों भूलजाते हो ,
कि तुम्हारी बढ़ रही है उमर
अब तुम पक रहे हो
और जिस तरह पके हुए फलों में ,
आ जाता है मिठास
उसी तरह तुम्हारे जीवन में भी ,
मधुरता आ रही है ख़ास
और तुम व्यर्थ ही हो रहे हो उदास
जीवन में भर कर उल्लास
सब में बाटों अपनी मिठास
सबसे लगा लो नेह
अपने आप भाग जाएगा आपका मधुमेह


मदन मोहन बाहेती'घोटू'  

Friday, April 8, 2016

तो कहो क्या बात है

             तो कहो क्या बात है

चाय तक की भी कभी ना ,पूछता कंजूस जो,
        घर बुला,बोतल भी  ही खोले ,तो कहो  क्या बात है 
कोई महिला रूपसी ,मुस्काये,तुमको लिफ्ट दे,
           और अंकल भी न बोले , तो  कहो क्या बात  है
करने को भगवान का दर्शन जो मंदिर जाओ तुम,
            खाने  भंडारा मिले जो , तो कहो  क्या बात है
भाग्य से बिल्ली के इसको कहते छींका टूटना,
            रहे चलते सिलसिले जो, तो कहो क्या बात है
पहने वो मलमल का कुरता ,और वो भी हो सफेद ,
            पानी में हो तरबतर जो ,तो कहो क्या बात है
इसको कहते, देता देने वाला छप्पर फाड़ के
       मुंह में फिर तो घी और शक्कर ,तो कहो क्या बात है  

 मदन मोहन बाहेती'घोटू'
         

 

यही अंजाम होता है

     यही अंजाम होता है

अगर शादी करो तुम तो ,यही अंजाम होता है
तुम्हारी बीबी के पीछे ,तुम्हारा  नाम होता है
प्रबल है बल नहीं होता,प्रबल स्थान होता है
गाँव की चीज ,मालों में ,चौगुना दाम होता है
सामने तारीफें करके ,किसीके चाटना तलवे,
बुराई पीठ  के पीछे , बुरा  ये  काम  होता  है
जहां पर आस्था होती,वहां शांति बरसती है ,
जहाँ पर राम ना होते, वहां कोहराम होता है
प्रेम से गाल तुम्हारे ,सिरफ सहलाती बीबी है ,
दूसरा जो ये कर सकता  ,वो हज्जाम होता है

घोटू 

बदकिस्मती

 बदकिस्मती

मेरी बदकिस्मती की इंतहां अब और क्या होगी ,
       कि जब भी 'केच' लपका ,'बाल' वो 'नो बाल 'ही निकली
ख़रीदे टिकिट कितने ही ,बड़ी आशा लगा कर के,
          हमारी  लॉटरी  लेकिन ,नहीं  एक  बार ही  निकली
हमेशा जिंदगी में एक ऐसा दौर आता है ,
            हमे  मालूम  पड़ता जब कि क्या होती है बदहाली
सिखाता वो रहा हमको ,कि कैसे जीते मुश्किल में ,
               और हम व्यर्थ में  उसको ,यूं  ही  देते  रहे गाली
  
 घोटू
                      

Wednesday, April 6, 2016

       गूगल पर सब कुछ मिल जाता

गूगल पर सब कुछ मिल जाता ,बस माँ बाप नहीं मिलते है
 आशीषों  की  वर्षा  करते  ,     बस वो हाथ नहीं   मिलते है
जानकारियां दुनिया भर की ,बटन दबाते, मिल जाती है
'गूगल अर्थ 'खोल कर देखो ,सारी  दुनिया  दिख जाती है
खोल 'फेसबुक',यार दोस्त से ,जितनी चाहो,बातें करलो
और 'ट्विटर' पर ,मन की बातें ,सारी कह,जी हल्का करलो
शादी का 'पोर्टल' खोलो तो ,ढूढ़ सकोगे  दूल्हा, दुल्हन
'स्काइप' पर ,साथ बात के ,कर सकते हो,उनका दर्शन
घर बैठे ही,दुनिया भर की ,शॉपिंग करना अब मुमकिन है
 जिसको चाहो,लाइन मारो ,सब कुछ यहाँ 'ऑन लाइन' है
पर दिल का अंदरूनी रिश्ता ,और जज्बात नहीं मिलते है
गूगल पर सब कुछ मिल जाता ,बस माँ बाप नहीं मिलते है
अब 'ई मेल' लिखी  जाती है ,प्रेम पत्र कर गए पलायन
दुनिया भर की ,हर घटना का ,होता है 'लाइव' प्रसारण
टिकिट सिनेमा,रेल,प्लेन के ,बुक हो जाते ,सभी यहाँ है
'जी पी एस' बता देता है ,मौजूद बन्दा ,कौन , कहाँ  है  
'व्हाट्स ऐप' पर,अपने ग्रुप की, सारी बातें ,करलो शेयर
अपने फोटो ,सेल्फी भेजो, बस लगता है ,केवल  पलभर
हर पेपर की,हर चैनल की,सारी  खबरें ,मिल जाती है
'लाइव क्रिकेट ''मैच देख कर,सबकी तबीयत खिल जाती है  
हो जाता  दीदार  आपका ,लेकिन  आप  नहीं  मिलते है
गूगल पर सबकुछ मिल जाता,बीएस माँ बाप ,नहीं मिलते है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'