Saturday, April 25, 2020

कोरोना की  देन

कहते हर एक बुराई के पीछे कुछ छुपी भलाई है
इस कोरोना के संकट ने ,हमको ये बात बताई है
ये सच है कि इसके कारण ,हमने दुःख बहुत उठाया है
पर आई क्षमता लड़ने की ,हमने कितना कुछ पाया है
सब रखते ख्याल सफाई का ,धोते है हाथ सलीके से
सब्जी फल जो भी लाते है ,धो खाते ,सही तरीके से
ना  भीड़  सिनेमा हालों में ,ना यूं ही विचरणा ,मालों में
आपस में आई निकटता है ,और प्यार बढ़ा घरवालों में
बचने को बोरियत से दिन भर ,कुछ महिलाओं ने ठीक किया
गूगल में रेसिपी पढ़ कर ,पकवान बनाना सीख लिया
अब  बहुत न होते  भंडारे ,मातारानी के जगराते
शादी सगाई की भीड़ घटी ,ना लम्बी चौड़ी बारातें  
ना नेताओं की वो रैली ,ना स्नेह मिलन के सम्मेलन
लग गयी लगाम ,नहीं होते ,अब भीड़ भाड़ वाले फंक्शन
कितना ज्यादा सुख मिलता था वो अपनी शान दिखाने में
शोशेबाजी ,गाना ,डीजे ,पकवान पचीसों खिलाने  में
अपनानी पड़ी सादगी है ,इस कीट कोरोना के कारण
सब कोशिश करते ,ना खाएं ,बाजारों से आया भोजन
इतना परिवर्तन आ ही गया है लोगो के व्यवहारों में
रखते सामजिक दूरी बना ,हर उत्सव और त्योहारों में
जरुरतमंदो को दान दिया ,लोगों ने खाना,राशन का
मानवता मन में जगा गया ,यह कठिन पर्व अनुशसन का
जब भी आता बदलाव कभी होती है सबको कठिनाई
चालीस दिन करी प्रेक्टिस फिर नव जीवन पद्धिति अपनाइ
अपव्यय छूटा ,मितव्ययी हुए ,हम स्वालम्बी बन पाये
ये सच है पर हम बदल गए ,जीवन में कितने सुख आये
कुछ परेशानिया आयी मगर ,हो गए आत्मनिर्भर है हम
निज सेहत के प्रति जागरूक ,अब फुर्तीले तत्पर है हम

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 
आओ तुम्हे इंसान बना दे

मनुज रूप में जन्मे हो तुम ,आओ तुम्हे इंसान बना दें
वाधाओं  से लड़ना सिखला , जीवनपथ आसान बना दें

पढ़ा लिखा अच्छी शिक्षा दे ,तुम्हारा अज्ञान मिटा दे
भाईचारा ,प्यार सिखा कर , नफरत की दीवार हटा दें
मदद करो जरुरतमंदों की ,सद्भावों की खान बना दें
मनुज रूप में जन्मे हो तुम ,आओ तुम्हे इंसान बना दें

प्राणायाम,श्वसन क्रियाऔर तुमको थोड़ा ध्यान सिखा दें
अपना लक्ष्य प्राप्त करलो तुम ,तुमको ऐसी राह दिखा दें
सदाचार व्यवहार सिखा कर ,नम्र और गुणवान बना दें
मनुज रूप में जन्मे हो तुम ,आओ तुम्हे इंसान बना दें

प्रगति पथ पर रहो अग्रसर ,ऐसा मन में भाव जगा दें
लक्ष्य प्राप्ति की लगन लगी हो ,मन में वो उत्साह जगा दे
देशप्रेम की ज्योति प्रज्वलित करें,वतन की शान बना दें
मनुज रूप में जन्मे हो तुम ,आओ तुम्हे इंसान बना दें

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '  

Friday, April 24, 2020

  कोरोना - तीन   सवैये
  १
दीनी मचाई  त्राहित्राहि सारे जग माही ,चीन तूने 'चीट 'कियो कछु ऐसो
फैल रह्यो दिन  दूनो दानव सो पग पसार ,चीन तूने कीट दियो कछु  ऐसो  
मन है उदास ,कोई आये नहीं पास, त्रास , वाइरस ढीठ दियो  कछु  ऐसो
 आई जानी मानी इकोनॉमी पे सुनामी जैसे ,चीन तूने पीट दियो कछु ऐसो


ठीक से भी सांस नहीं,आवत जावत रही ,मुंह पे  ऐसो कपडा को बंधन अड्यो है
 आफत ये दुहरी है ,आवत नहीं महरी है ,काम घर को सब खुद करनो  पड्यो है
घर पर ही रुको, नहीं बाहर  निकल सको ,सड़क  पे  डंडा लिए ,दरोगा   खड्यो  है
दिन में भी सोनो ,दुखी होके चैन खोनो  ,ऐसो कारण कोरोना के  रोनो पड्यो  है

हुई जबसे तालाबंदी ,लगी सभी पे पाबंदी हालत हुई चिन्दी चिन्दी अब जल्दी ना सुधरनी
नाई नहीं बड़े केश ,धोबी नहीं बिगड़ा भेष ,रहे मन में कलेश,चीन ऐसी तेरी करनी
 घर के जो राजा, करे आज बासन मांजा ,काम करो सारे साजा ,खुश रहे तभी घरनी
ऐसी आई मजबूरी ,बना रखो सबसे दूरी ,ऐसा करना है जरूरी ,ये है कोरोना को हरनी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

मदन मोहन बाहेती ;घोटू '









 

कोरोना

न पड़ता गले  जो ,कदाचित कोरोना
नहीं इतनी मुश्किल ,हमें पड़ती ढोना

चालीस दिनों की ,हुई घर में बंदी
बाहर न निकलो ,लगी है पाबंदी
अपने मिलने वालो से कहदो मनाकर
आपस में दूरी ,रखें सब   बनाकर
हरेक घंटे में हाथ साबुन से धोना
नहीं इतनी मुश्किल ,हमें पड़ती ढोना

हुआ खुल के साँसे भी लेना मनाही
मुंह पर सभी ने है ,पट्टी लगाईं
करो काम खुद अब ,महरी न नौकर
पड़ा सबके के पीछे ,है ये हाथ धोकर
बोअर हो गए ,रात  दिन सोना सोना
नहीं  इतनी मुश्किल ,हमें पड़ती ढोना

नहीं चाट मिलती ,समोसे ,मिठाई
कहीं दाल रोटी ही  ,सदा जाये खाई
है वीरान सारे ,गली और मोहल्ले
रहो बैठे दिनभर तुम घर में निठल्ले
मोटापे से फूला ,तन का कोना कोना
नहीं इतनी मुश्किल ,हमें पड़ती ढोना

चले रेल ना बस ,है बंद आना जाना
नहीं चल रहा है कोई कारखाना
थे करते दिहाड़ी ,जो मजदूर सारे
भगे गाँव घर को ,मुसीबत के मारे
सुधरेगी कब तक ,ये हालत कहो ना
नहीं इतनी मुश्किल ,हमें पड़ती ढोना

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

लॉक डाउन उठने के बाद

प्रकृती के संग हमने जो खिलवाड़ करी है
बदले में सहना  पड़  रही मार दुहरी  है
भोग रहे हम अपनी करनी ,कर्मो का फल
तरह तरह के रोग ,बिमारी  आते  पल पल
चक्रावत  तूफ़ान कभी भूकम्प , सुनामी
तरह तरह की विपदायें है आनी  जानी
प्रदूषणों  में हमने जीना सीख लिया है
दूषित और गंदा जल  पीना सीख लिया है
चिकनगुनिया की विभीषिका हमने झेली
एच वन एन वन फ्लू बिमारी अब भी फैली
कैंसर ,हृदयरोग ,ब्लूडप्रेशर पड़े पुराने
अब आ गयी कोरोना व्याधि हमें सताने
इससे बचने ,इतने दिन तक करी कवायत
इसे भगाने को डाली कुछ अच्छी आदत
धोना हाथ ,सफाई रखना ,मुंह पर पट्टी
घर का खाना ,होटल के खाने से कुट्टी  
भीड़भाड़ से रखी बना कर हमने  दूरी
चाहे इसे विवशता बोलो या मजबूरी  
अब भी सामजिक दूरी की आवश्यकता
कोरोना से दूर रखेगी हमें सजगता
अगर सोचते जब लॉक डाउन उठ जाएगा
सब कुछ नॉर्मल पहले जैसा हो जाएगा
तो मित्रों यह सबसे बड़ी गलत फहमी है
बहुत दिनों तक यह विपदा हमको सहनी है  
इसीलिये यदि  पहले जैसा जीना  जीवन
कोरोना से लड़े  ,सावधानी रख हर क्षण
कुछ दिन भुगतो ,फिर एक दिन ऐसा आएगा
इसका भी हमको निदान मिल ही जाएगा
ज्यादा भय और चिंता मत निज मन में पालो
कोरोना के संग जीने की आदत डालो
इस बंदी के बीच बंद था सब उत्पादन
दुकाने और गमन आगमन के सब साधन
रिश्ता चालक ,रोज दिहाड़ी करने वाले
परेशान हो गए  ,पड़े खाने के लाले
घबरा कर सबने गाँवों को किया पलायन
अस्त व्यस्त हो गया कई लोगों का जीवन
आने वाला वक़्त कठिन है ,मुश्किलों भरा
आज देश की अर्थव्यवस्था  गयी चरमरा
वक़्त लगेगा ,वापस पटरी पर लाने में
महीनो गुजर जाएंगे हमे सम्भल पाने में
अर्थव्यवस्था को सुधारना ,आगे बढ़ना
महामारी से कोरोना की भी है लड़ना
मित्रों  कस लो  कमर ,और तैयार रहो तुम
भारत माता से बस  करते प्यार रहो तुम

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
  कोरोना - दो  सवैये
  १
दुनिया में त्राहि त्राहि  मचाई है ,चीन ने 'चीट 'कियो कुछ ऐसो
फेल रह्यो  दिन  दिन  दूनो  यह ,चीन ने कीट दियो कुछ ऐसो  
दे रहयो त्रास, न आने दे पास ,यह वाइरस ढीठ दियो कुछ ऐसो
दुनिया की अर्थव्यवस्था बिगाड़ी ,चीन ने पीट दियो कुछ ऐसो


ठीक से सांस भी न आवत जावत ,मुंह पे  बंध्यो एक मास्क जड्यो है
न आवत  महरी ,है आफत दुहरी ,काम सभी खुद करनो  पड्यो है
निकल  सको नहीं बाहर घर से , लेकर के डंडा ,दरोगा   खड्यो  है
दिन भर घर में ही सोनो पड्यो है ,ऐसो कोरोना को रोनो पड्यो  है

मदन मोहन बहती 'घोटू '

Wednesday, April 22, 2020

कोरोना ने क्या सिखा दिया

कोरोना तेरी दहशत ने ,हमको है क्या क्या सिखा दिया
चालीस दिन तक,डर के मारे,घर के अंदर ही टिका दिया

पहले हफ्ते में कम से कम ,एक दिन तो होटल जाते थे
वह खाना मिर्च मसालों का ,चटकारे ले ले  खाते  थे
भरते होटल का मोटा बिल ,चाहे अजीर्ण ही हो जाता  
लॉक डाउन में सब बंद हुए ,अब छूटा होटल से नाता
पर जब खाये रोज गरम ,फुल्के पत्नी के हाथ  बने
और दाल हींग तड़के वाली ,सब्जी चटनी भी साथ बने
फिर प्यार भरा वो मनुहार ,सच खाने में रस आया है
है  पेट ठीक ,खाने में भी ,अब हमने  हाथ बटाया है
कैसे बनते खिचड़ी ,पुलाव ,और कैसे दलिया,सिखा दिया
कोरोना तेरी दहशत ने ,हमको है क्या क्या सिखा दिया

ये सच है संग संग रहने से ,आपस में प्यार पनपता है
कुछ तू तू मैं मैं भी होती ,पर रिश्ता गहरा बनता  है ,
झाड़ू  पोंछा ,डस्टिंग ,बर्तन ,हर घर की है आवश्यकता
किसने सोचा बिन महरी कामवालियों के घर चल सकता
लेकिन जब मुश्किल आती है ,एक जुट हो जाते घरवाले
आपस में काम बाँट कर के ,चुटकी में निपटाते  सारे
यह दौर कठिन था शुरु शुरु तकलीफ पड़ी सबको सहना
लेकिन अब हमने सीख लिया ,किस तरह आत्मनिर्भर रहना
मेहरी की किचकिच  बंद हुई ,आइना उसको दिखा दिया
कोरोना तुम्हारी दहशत ने ,हमको है क्या क्या सिखा दिया

ना बेमतलब का खर्चा करना ,ना व्यर्थ घूमना  मालों में
सबसे कम खर्च हुआ इन दिन ,पिछले कितने ही सालों में
हम सीख गए झाड़ू पोंछा ,बरतन सफाई ,कपडे धोना
थोड़े ही दिन में चमक गया ,है अब घर का कोना कोना
अब शुद्ध हवा में सांस ,आसमां नीला ,दिखते है  तारे
है मिलना जुलना बंद ,फोन पर हालचाल मिलते सारे
दारू गुटखा  तम्बाखु की,आदत से भी मुक्ति पायी
कोरोना से भी बचे रहे ,जीवन में नियमितता  आयी
कर्तव्यपरायण पतियों में ,है नाम हमारा लिखा दिया
कोरोना तेरी दहशत ने ,हमको है क्या क्या सिखा दिया

मेहमान नवाजी बंद हुई ,उन पर खर्चों की बचत हुई
गाड़ी ,स्कूटर बंद पड़े , ना पेट्रोल की खपत हुई
ना गरम समोसे मिलते है और गरम जलेबी भी अलभ्य
अब हाथ धो रहे बार बार ,रहते स्वस्थ और अधिक सभ्य
चुप रहते मुख पर मास्क  बाँध ,छुट्टी अब सारे लफड़ो की
दफ्तर ना  जाते ,जरूरत ना ,अब प्रेस किये सब कपड़ो की
दिन यूं ही गुजारा करते है ,हम कुर्ते और पाजामे में
या बरमूडा ,टी शर्ट, निकर,खर्चा न प्रेस करवाने में
मितव्ययी हो गए हम इतने ,खर्चा आधा कर दिखा दिया
कोरोना तेरी दहशत ने ,हमको है क्या क्या सिखा दिया  

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '