Thursday, May 20, 2021

बीज का बीज गणित 

पहले उपजी कुछ लतिकाये
तीव्र गति से जो बढ़ जाए 
अल्पकाल में दे देती फल 
खरबूजा लौकी या परमल
 लेकिन एक चीज है इनमें  
 ढेरों बीज भरें हैं सब में
 
 फिर ऐसी कुछ उगी झाड़ियां 
 जिनमें लगी बहुत सी फलिया 
 हरेक फली में चंद बीज थे 
 स्वाद भरे थे  और  लजीज थे 
 जैसे मूंग मटर और अरहर 
 दलहन बनकर दले गए पर
  उगे बीज फिर कुछ तिलहन बन 
 दिया तेल करने को पोषण 
 
 फिर कुछ ऐसे वृक्ष उगाये
 बड़े हुए, हरियाली लाए 
 जिनमें शीतल हवा छांव थी
 पंछी के भी लिए ठांव थी 
 फैल हुए यह बहुत घनेरे 
 कुछ में फल आए बहुतेरे 
 जैसे जामुन बेर आम्रफल
 सब में एक बीज था केवल 
 
 बीज बाद में ऐसे आए 
 जो माटी में गए उगाए 
 पर उनका हर फल ऐसा था
 जो कि स्वयं बीज  जैसा था 
 मक्का गेहूं बाजरा आया
  हमने अन्न कहा और खाया 
  
  अंतर्मुखी बीज कुछ आए 
  जो बाहर तो ना दिखलाएं 
  लेकिन जो माटी में दब कर 
  फैल फूल कर,बढ़े निरंतर 
  लगे चाहने जिनको हम सब
   गाजर मूली आलू अदरक 
   
   बीज बनाए फिर ईश्वर ने 
   कुछ नारी में और कुछ नर में
    आपस में जब यह है मिलते 
  बाल बालिका बनकर खिलते
  एक अकेला बीज फले ना 
  बिना मिले पर काम चले ना 
  
   यह प्रकृति का बीज चक्र है
   क्या है क्यों है नहीं तर्क है
    हमें समझ ना बिल्कुल आता
    सोचो उतना उलझा जाता

घोटू