Wednesday, February 26, 2014

कच्चा पक्का

   

आओ तुमको बतलाते है ,कुछ पक्के ,कच्चे की बातें 

कच्चे आमों को चटखारे,ले लेकर ,दुनिया खाती है 
अमिया का बना मुरब्बा या फिर पना अचार बनाती है 
जब पकते है  तो आम मुलायम ,होते रसवाले ,मीठे 
कोई खाता है काट काट ,तो कोई मुंह ले रस चूसे 
है राजा आम फलों के पर ,ज्यादा दिन तक ना टिक पाते 
आओ तुमको बतलाते है,कुछ पक्के ,कच्चे की बातें 

जब कच्ची उमर हमारी थी ,हम नटखट थे ,शैतान बहुत 
दुनियादारी में कच्चे थे ,जीवन पथ से अनजान बहुत 
जब थोड़े पके,जवानी आयी ,शादी की ,मुस्तैद हुए 
जिम्मेदारी आयी सर पर ,तो पक कर बाल सफ़ेद हुए 
अब ढीले ढाले और  निर्बलहै,हम अब बूढ़े कहलाते 
आओ तुमको बतलाते है,कुछ पक्के,कच्चे की बाते 

बिजनैस में आये तो देखी फिर डीलिंग अच्छे अच्छे की 
जिसको भी देखो ,वही बात,करता था पक्के,कच्चे  की 
बिलकुल कच्चे थे बिजनेस में ,पर अकल आयी जब थोड़ी सी 
फिर किया बहुत कच्चा पक्का ,और टैक्स बचाया,चोरी की 
पर गायब मन का चेन हुआ ,हर पल रहते थे घबराते 
आओ तुमको बतलाते है ,कुछ पक्के ,कच्चे की बातें 

मदन मोहन बाहेती'घोटू '

तीन युगल त्रिपदियां

  

                 प्रथम 
                    १ 
    चार पहियों के नीचे , 
    चार नीबू शहीद हुए ,
     किसी की नयी कार आयी 
                    २  
     वधू  का बाप ,
      भारी कर्ज से लदा ,
      वर के घर,बहार आयी 
           
               द्वितीय 
                     १ 
  सास के चेहरे पर ,
   छाई हुई उदासी ,
   बहू ने बेटी जनी
                २ 
मातृत्व सुख पाकर भी,
सहमी सी बहू है ,
थोड़ी सी अनमनी 

            तृतीय  
                १ 
 सब कुत्ते भोंक रहे ,
लगता है गली में ,
आया है नया कुत्ता 
               २ 
देश के कर्णधार ,
देश की संसद में ,
हो रहे गुत्थमगुत्था 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'