Sunday, August 2, 2020

पति की शिकायत -पत्नी से

नचाती हो हमको ,तुम उँगलियों पर ,
शराफत के मारे है ,हम नाचते  है
गृहस्थी के कामों में सहयोग देते ,
जरूरत पे बरतन भी हम मांजते है
बड़े प्रेम भाव से ,मख्खन लगाते ,
फिसलती नहीं तुम ,बहुत भाव खाती
खरे आदमी हम ,अखर हम को जाती ,
मोहब्बत जब मांगें ,तुम नखरे दिखाती

जबाब पत्नी का -पति को

यूं तो तुम प्यार जता कर के ,
कहते रहते मुझको 'जानू '
लेकिन मेरी हर फरमाइश ,
पर करते रहते हो 'ना नू'
जब मतलब होता तो मेरी ,
तारीफ़ के पुल  बाँधा करते
मेरा ना मूड बिगड़ जाये ,
रखते हो ख्याल ,बहुत डरते
जैसे ही मतलब निकल गया
व्यवहार बदल सा जाता है
ना मान मनोवल रहती है ,
सब प्यार बदल सा जाता है
तुम हो मतलब के यार पिया ,
 यह  बात ठीक से मैं जानू
मै नहीं बावली या मूरख ,
फिर बात तुम्हारी क्यों मानू ?

घोटू      
शिकवा शिकायत पत्नी से

एक
मैं सहमा सहमा ,डरा डरा ,जब धीमे स्वर में बात करूं ,
तुम झल्ला कर के कहती हो ,ऊंचे क्या बोल नहीं सकते
यदि मैं ऊंचे स्वर में बोलूं ,ये भी न सुहाता है तुमको ,
कहती हो क्या मैं बहरी हूँ , इतना चिल्ला कर जो बकते
मैं चुप रह कुछ भी ना बोलूं ,ये भी तुमको मंजूर नहीं ,
कहती गुमसुम क्यों बैठे हो,तुम मुझको रहे 'अवोइड 'कर
क्या करूं समझ जब ना आता ,रहता दुविधा, शंशोपज में ,
तो मैं तुम्हारी बातों का ,उत्तर देता बस मुस्कराकर

दो
मैं जब भी कोई बात करूं ,सीधे से नहीं मानती तुम ,
कोई 'इफ 'का या फिर 'बट 'का ,तुम लगा अड़ंगा देती हो
मेरा कोई भी हो सुझाव ,तुम मान जाओ ,ना है स्वभाव ,
मेरे हर निर्णय का विरोध ,कर मुझसे पंगा लेती हो      
छोटी  छोटी  सी बातों पर ,होने लगता है चीर हरण ,
और युद्ध महाभारत जैसा ,छिड़ जाता ,व्यंग बाण चलते
बस कुछ ही मौके आते है ,जब मैं प्रस्ताव कोई रखता ,
तुम नज़रें झुका मान जाती , लेकिन वो भी ना ना करते  

घोटू