Wednesday, September 7, 2011

चंचला लक्ष्मी

चंचला लक्ष्मी
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आदमी की आसुरिक प्रवर्तियाँ,
और देविक  वृत्तियाँ,
जब साथ साथ मिल कर,
दुनियादारी की मथनी से,
रत्नाकर का मंथन करती हैं,
तब प्रकट होती है लक्ष्मी
लक्ष्मी,जो न देवताओं की हुई,
ना दानवों की,
इन सभी जवान चाहने वालों को छोड़,
उसने पुरुष पुरातन को चुना,
क्योंकि वो जानती  है
'ओल्ड इज गोल्ड'
और गोल्ड लक्ष्मी का ही एक रूप है
रम्भा और वारुणी,(शराब)
लक्ष्मी की सहोदर बहने है,
जिनका उपयोग,
कई समझदार लोग,
लक्ष्मी को पाने के लिए करते है
और कुछ दबंग नेता,
लक्ष्मी को पाने के लिए,
उसके भाई शंख की तरह,
अपनी बुलंद आवाज मे
भाषण बाजी करते हुए, बजते है
और लक्ष्मी के आने पर,
उसके दूसरे भाई एरावत की तरह,
मद मस्त हाथी से झूमते हुए चलते है
यह  जानते हुए भी,
की जाने कब लक्ष्मी,
अपने तीसरे भाई 'उच्चाश्रेवा'घोड़े के साथ,
तेज गति से,
कहीं भी भाग सकती है
क्योकि लक्ष्मी चंचला है,
चपला है,
गतिमान है,
अमर के घर से संसद में जा सकती है
गिरती हुई सरकार को भी बचा सकती है
उसको एक जगह बैठना,
बिलकुल पसंद नहीं ,
घूमती फिरती रहती है,
स्वीजरलेंड ,
उसकी पसंदीदा जगह है,
जहाँ की बेंकों में वो,
चैन से आराम करती है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'