Sunday, November 7, 2021

Re:

Wah tauji :D

Ekdum zaikedar poem hai 

On Sun, Nov 7, 2021, 12:13 PM madan mohan Baheti <baheti.mm@gmail.com> wrote:
आयुष का इंदौरी प्यार 

नाश्ते में प्यार के पोहे जलेबी,
 सेव मिक्चर जीरावन नींबू मिलाके 
 लंच में उल्फत के घी में तरमतर जो ,
 वो मुलायम बाफले खाता दबाके 
 साथ में मीठा तेरी बातों के जैसा,
 चूरमा है केसरी मन को लुभाता 
 शाम को मैं मोहब्बत से भरी पेटिस,
  नर्म भुट्टो का सुहाना किस मैं पाता 
  बहुत दिन के बाद ये पकवान पाए 
  प्यारा का मौसम त्योंहारी हो गया है 
  चाह छप्पन भोग की पूरी हुई है,
  आजकल यह मन इंदौरी हो गया है

घोटू
आयुष का इंदौरी प्यार 

नाश्ते में प्यार के पोहे जलेबी,
 सेव मिक्चर जीरावन नींबू मिलाके 
 लंच में उल्फत के घी में तरमतर जो ,
 वो मुलायम बाफले खाता दबाके 
 साथ में मीठा तेरी बातों के जैसा,
 चूरमा है केसरी मन को लुभाता 
 शाम को मैं मोहब्बत से भरी पेटिस,
  नर्म भुट्टो का सुहाना किस मैं पाता 
  बहुत दिन के बाद ये पकवान पाए 
  प्यारा का मौसम त्योंहारी हो गया है 
  चाह छप्पन भोग की पूरी हुई है,
  आजकल यह मन इंदौरी हो गया है

घोटू