Monday, April 5, 2021

ओ भूमण्डल  की सुंदरियों

ओ इस धरती की ललनाओं ,ओ भूमण्डल की सुंदरियों
तुम रूप का अमृत बरसाओ ,जुगजुग जियो जुगजुग जियो

सब देवलोक की अप्सरा , देवों के खातिर आरक्षित
करती मनरंजन बस उनका ,यह बात सर्वथा है अनुचित
देवताओं ने कर रख्खा है ,उन पर अपना एकाधिकार
उनको चिर यौवन देकर वो ,सुख उठा रहे ,पा रहे प्यार
पृथ्वी पर उनसे भी सुन्दर ,है रमणी कई रूपवाली
पर कुछ वर्षों में खो देती,निज यौवन ,चेहरे की लाली
इसलिए ख्याल रख्खो अपना ,मेकअप का टॉनिक रोज पियो
तुम रूप का अमृत बरसाओ ,जुगजुग जियो ,जुगजुग जियो  

अपने तन की शोभा ,कसाव ,अक्षुण  रखना आवश्यक है
जब तक हो सके जवां रहना ,यह तुम्हारा भी तो हक़ है
लाली लगाओ तुम होठों पर ,और रखो गुलाबी गालों को
अच्छे शेम्पू ,कंडीशनर से ,तुम रखो मुलायम बालों को
आँखों को करके कजरारी ,नैनों के बाण चलाओ तुम
बन जाओ उर्वशी धरती की ,सबके उर में बस जाओ तुम
नखरे और अदा दिखा कर के ,सबका दिल लूटो सुंदरियों
तुम रूप का अमृत बरसा कर ,जुगजुग जियो ,जुगजुग जियो

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
सुबह सुबह होती है

सुबह सुबह होती है
ओस की बूँदें भी ,
बन जाती मोती है

बचपन जैसी निश्छल
धुली धुली  कोमल सी
मंद समीरण जैसी ,
कुछ चंचल चंचल सी
तरु के नव किसलय सी ,
खिलती हुई कली सी
खुशबू से महक रही ,
लगती है भली सी
अम्बर में तैर रही ,
एक पगली बदली सी
कुछ उजली उजली सी ,
कुछ धुंधली धुंधली सी
फुदक रहे पंछी सी ,
चहक रही चिड़िया सी
टुकुर टुकुर देख रही ,
नन्ही सी गुड़िया सी
थकी हुई रजनी ज्यों ,
लेती अंगड़ाई सी
आलस को भगा रही ,
आती जम्हाई सी
बालों को सुलझा कर ,
चमक रहे आनन की
हाथ में झाड़ू ले
बुहारते आँगन सी
पनिहारिन के सर पर ,
छलक रही गगरी सी
चाय की चुस्की सी
कुरमुरी मठरी सी
बछड़े की रम्भाहट
गाय के दूहन सी
मंदिर की घंटी सी ,
और घिसते चन्दन सी
सूरज की आभा जब ,
ज्योतिर्मय होती है
शुरुवात शुभ दिन की ,
सभी जगह होती है
सुबह, सुबह होती है  

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

इम्युनिटी

रूपसी (C ),रूपसी (C )
कोई ना तुमसी (C )हसीं  (C )
बहुत मादक छवि तुम्हारी ,
तुम मेरे मन बसी (C )
तुम्हारी हर अदा प्यारी ,
और प्यारी है हंसी (C )
मुझपे तुम अहसान कर दो ,
बन के मेरी प्रेयसी (C )
क्योंकि मेरी जिंदगी में ,
आ गयी है  बेबसी (C )
कोरोना के जाल में है ,
जिंदगी मेरी फंसी (C )
और तुममे प्रचुर मात्रा ,
में भरा विटामिन (C )
तुम मिलोगी तो मेरी ,
बढ़ जायेगी फिर इम्युनिटी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '