Tuesday, April 12, 2011

धूल में लट्ठ

      धूल में लट्ठ
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एक नव विवाहिता से पूछा उसकी सहेली ने
कैसी रही तुम्हारी सुहाग रात?
बतलाओ न सब बात
नव विवाहिता बोली शरमा कर
क्या बतलाऊ तुम्हे डियर
उनकी प्यार भरी बातों ने अमृत घोला
मैंने उनसे बस इतना बोला
मै चाहती हूँ,हमारे बेटा आये
बात सुन कर ये थोड़े मुस्काए
बोले बेटा हो या बेटी,
इसकी नहीं होती है गारंटी
इन बातों को अभी से क्या विचारना
ये तो होता है धूल में लट्ठ मारना
मुझे गुस्सा आ गया ,मुझे कहा धूल
ये थी उनकी भूल
और हम में झगडा हो गया
मै करवट बदल कर इधर सो गयी
वो करवट बदल कर उधर सो गया

मदन मोहन बहेती 'घोटू'



,नशे के लिए

 छलकते जाम से है लब तुम्हारे अंगूरी,
           नशीली है तुम्हारे नैन की चितवन चंचल
उम्र भर पीते रहो पर कभी न खाली हो
            तुम्हारा जिस्म है पूरी शराब की बोतल
प्यार से देख भी लेती हो नशा आता है,
             तेरे हाथों की छुवन काफी है नशे के लिए
तुम्हारी बातें नशीली है,साथ मदमाता,
             हमने छोड़ दी पीनी शराब ,नशे के  लिए
  
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

ट्वेंटी-ट्वेंटी

    ट्वेंटी-ट्वेंटी
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विश्व कप के बाद
जब आया  आई पी  एल का ट्वेंटी ट्वेंटी
तो अपने चमचे से, बोले ये नेताजी
ये फिफ्टी फिफ्टी तो समझ में आता है
आधा तुम्हारा और आधा हमारा हो जाता है
पर ये ट्वेंटी ट्वेंटी क्या है?
हमारा बस ट्वेंटी परसेंट ,
तुम्हारा भी ट्वेंटी परसेंट ,
तो फिर ये बाकी सिक्सटी परसेंट किसका है?

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
नोयडा उ.प्र


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