Wednesday, April 11, 2012

रखो ख्याल तुम बुजुर्गों का

रखो ख्याल तुम बुजुर्गों का
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उठालो फायदा जी भर के तुम बुजुर्गों का
ये तो हैं,एक समन्दर भरा ,तजुर्बों  का
प्रेम से जब भी उसमे डुबकियाँ लगाओगे
थोड़े गहरे से ही ,मोती को ढूंढ लाओगे
मिला है साया बुजुर्गों का बड़ी किस्मत से
खजाना भरलो उनकी दुआओं की दौलत से
बड़ी तकदीर से ही साथ मिलता है इनका
इनका साया ओ सर पे साथ मिलता है इनका
ये खुशनसीबी है कि तुमको मिला है मौका
करो सन्मान,रखो ख्याल तुम बुजुर्गों का

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

बूढी सत्ता

बूढी सत्ता

हमारे देश की है लाचारी

बूढ़े है अधिकतर सत्ताधारी
बड़ी कमजोर इनकी सेहत है
एनीमिक,खून की जरूरत है
इसलिए  एसा बजट है बनता
प्रेम से खून चुसाए   जनता
स्वर्ण पर टैक्स  ये लगाते है
आजकल स्वर्ण भस्म खाते है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

किसी से प्यार करो तो जानो

किसी से प्यार करो तो जानो
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नशा कितना किसी की चाहत में,
                          किसी से प्यार करो तो जानो
मज़ा क्या रूठने, मनाने में,
                          कभी मनुहार करो तो जानो
तुम्हारी 'ना' से टूट जाता दिल,
                          कभी इनकार  करो तो जानो
कैसे पत्थर भी पिघल जातें है,
                           कभी इसरार करो,तो जानो
अहमियत वादों की क्या होती है,
                           कभी इकरार  करो  तो जानो
 रास्ता दिल का कितना टेढ़ा है,
                          निगाहें चार करो तो जानो
तुम्हे जो चाहता है उस दिल को,
                          कभी   गुलजार करो तो जानो
दिया है दिल तो जां भी दे देंगे,
                             कभी एतबार करो,तो जानो

मदन मोहन बाहेती'घोटू'          

खाते पीते नेता

खाते पीते नेता

देश के प्रेम की बातें हमें सिखाते है

छेदते है उसी थाली को,जहाँ खाते है
ये जो नेताजी,सीधे सादे से दिखाते है
बड़े खाऊ है,खूब रिश्वतें ये खाते  है
है बिकाऊ,बड़े मंहगे में  बिकाते है
हमने पूछा कि आप इतना पैसा खाते है
फिर भी क्यों  आप सदा भूखे ही दिखाते है
छुपा के ये कमाई,कहाँ पर रखाते  है
हमारी बात सुन,नेताजी मुस्कराते  है
अजी हमारे स्विस कि बेंकों में खाते है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'