Friday, April 24, 2015

गर्मी का असर

       गर्मी का असर

अब हम तुमको क्या बतलाएं ,सितम गर्मियों ने क्या ढाया
खिला खिला  सुन्दर गुलाब सा ,चेहरा   गर्मी में  मुरझाया
गरमी आगे ,अच्छे अच्छों  की ,हालत  हो जाती   ढीली
हो जो गरम  सामने वाला ,सबकी सूरत  पड़ती   पीली
 गर्मी की ऋतू मे.अक्सर ही    जो मौसम के फल आते है
आम,पपीता  या खरबूजा  ,     पीले  ही पाये  जाते  है
पीले पड़ते  सब गर्मी में  ,जो कि सहमे और डरे   है
किन्तु  हिम्मती  तरबूजों से , हरदम रहते हरे भरे है

घोटू

प्रीत का रस

                       प्रीत का रस 

प्रीत का रस ,मधुर प्यारा,कभी पीकर तो  देखो तुम,
           पियो पिय प्यार का प्याला,नशा मतवाला  आता है
न तो फिर दिन ही दिन रहता ,रात ना रात लगती  है,
            आदमी खोता है सुधबुध ,दीवानापन वो  छाता  है           
चाँद की चाह में पागल,चकोरा छूता है अम्बर,
              प्रीत   की प्यास का  प्यासा ,पपीहा  'पीयू' गाता  है
प्रीत गोपी की कान्हा से ,प्रीत मीरा की गिरधर से,
              प्रीत के रस में जो डूबा,वो बस डूबा ही जाता  है
कभी लैला और मजनू का,कभी फरहाद शीरी का,
             ये अफ़साना दिलों का है ,यूं ही दोहराया जाता है   
कोई कहता इसे उल्फत ,कोई कहता मोहब्बत है,
             शमा  पे जल के परवाना,फ़ना होना सिखाता   है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'