Wednesday, August 17, 2011

टुकड़े टुकड़े जीवन

टुकड़े टुकड़े जीवन
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बंटा हुआ है ये जीवन टुकड़ों टुकड़ों में
हमें नींद भी आती है टुकड़ों टुकड़ों में
कुछ टुकड़े झपकी के ,कुछ टुकड़े खर्राटे
और कुछ टुकड़े,करवट बदल बदल कर काटे
कुछ टुकड़े खुशियों के, कुछ टुकड़े है गम के
कुछ टुकड़े बचपन के, कुछ टुकड़े यौवन के
प्यार हमारा बंटा हुआ है टुकड़े टुकड़े
कुछ बच्चों को,जीवनसाथी को कुछ टुकड़े
अगर बचा,माँ बाप जरा सा टुकड़ा पाते
हालांकि वो बच्चों पर जी जान लुटाते
देते डाल सिर्फ रोटी के बस दो टुकड़े
दिल के टुकड़े,कर देते है  दिल के  टुकड़े
यूं ही बुढ़ापा कटता है टुकड़ों टुकड़ों में
आंसू बन, बहते दुखड़े,टुकड़ों टुकड़ों में

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

विद्रोह के स्वर

विद्रोह के स्वर
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स्वर विद्रोह के अब,उभरने लगे है
जरा सी हो आहट, वो डरने लगे है 
करे कोई इनकी,जरा भी खिलाफत,
शिकंजा उसी पर, ये कसने लगे है
तारीफ़ में खुद की ,गाते कसीदे,
बुराई सुनी तो,भड़कने लगे है
 करे कोई अनशन या सत्याग्रही हो,
डंडे उसी पर बरसने  लगे है
हुई बुद्धि विपरीत,विनाश काले,
खुद ही जाल में अपने फंसने लगे है
किये झूंठे वादे और सपने दिखाए,
हकीकत ये 'वोटर',समझने लगे है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

डुगडुगी राजा

डुगडुगी  राजा
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जब से लोगों ने दिखाए थे काले झंडे
तब से कुछ दिन तक पड़े थे ये ठन्डे
पर टी वी पर आने की लालसा इतनी प्रबल है
करने लग गए फिर से बातें अनर्गल  है
जब भी कोई विद्रोह का स्वर उठाता है
तो इनका कुनबा ,उसकी चार पुश्तों की,
जन्मपत्री खंगालने में जुट जाता है
काजल के टीके को भी,काला दाग  कह कर के,
डुगडुगी बजायेंगे
अपने गिरेबान में तो ,झाँक कर के तो देखे,
खुद को पूरा काला पायेगे
वोह तो गनीमत है की आजकल,
हाय कमांड ने लगा दिया प्रतिबन्ध है
और इनकी जुबान बंद है
वर्ना ये फिर बकवास करते कुछ ऐसे
'अन्ना के नाम में ही अन्न है,
फिर वो भूख हड़ताल पर कैसे '?

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'