Tuesday, February 7, 2012

बड़ा सराफा की चौपाटी

बड़ा सराफा की चौपाटी
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(इन्दोर शहर की इस जगह पर रात को जो खानेपीने
की महफ़िल सजती है उसका आनंद अकथनीय है
कोई भी भोजनप्रेमी इस स्वाद से वंचित न हो इसी
कामना के साथ यह मालवी कविता प्रस्तुत है )

बड़ा सराफा की चौपाटी,खानपान को जंक्शन है
रात होय तो एसो लागे,जेसे कोई  फंक्शन है
गेंदा जेसा बड़ा दहीबड़ा,साबूदाना की खिचड़ी
गरम गरम झर्राट गराडू,और ठंडी ठंडी रबड़ी
देसी घी किआलू टिक्की,भुट्टा को किस नरम नरम
बड़ी बड़ी रसभरी केसरी,मिले जलेबी गरम गरम
मद्रासी इडली और डोसा,बम्बई का भाजी पाव
चाइनीज की मंचूरियन,चाउमीन जी भर खाव
खाओ पताशा पानी का छै स्वादों को पानी मेली
गरम दूध केसर को पियो और शिकंजी अलबेली
गाजर,मूंगदाल को हलवो,तिल का लड्डू मावा का
सर्दी में भी मज़ा उठाओ,ठंडी कुल्फी  खावा का
पेट भले ही भरी जाय है ,लेकिन भरे नहीं मन है
बड़ा सराफा की चौपाटी,खानपान को जंक्शन है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

घुटने की तकलीफ

घुटने की  तकलीफ
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होती हमें बुढ़ापे में है ,घुटने की तकलीफ बहुत है
बचपन में चलते घुटनों  बल,चलना तभी सीख पाते है
मानव के जीवन में घुटने,सबसे अधिक काम आते है
करो प्रणाम झुकाओ
,घुटने,प्रभु पूजन में घुटने टेको
दफ्तर में साहब के आगे,झुकना पड़ता है घुटने को
बैठो तो घुटने बल बैठो,लेटो,करवट लो, घुटने बल
योगासन में,भागदौड़ में,घुटने ही देते है संबल
जगन,शयन और मधुर मिलन में,घुटने का सहयोग बहुत है
सीढ़ी चढ़ने  और उतरने   में घुटनो  का  योग बहुत  है
पत्नी जी यदि जिद पर आये,उनके आगे टेको  घुटने
हम इतना झुकते जीवन भर,की घुटने लगते है दुखने
इस शरीर का सारा बोझा,बेचारे घुटने सहते है
कदम कदम पर ,घुटनों के बल,हम आगे बढ़ते रहते है
एक  तो उमर बुढ़ापे की और उस पर ये घुटने की पीड़ा
उस पर बच्चे ध्यान न देते,मन ही मन घुटने की पीड़ा
मन की घुटन,दर्द घुटने का,तन मन रहती पीड़ बहुत है
होती हमें बुढ़ापे में है,घुटने की तकलीफ बहुत है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

दो दो बातें

   दो दो बातें
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औरतों के दो ही हथियारों से डरता आदमी,
        एक आंसूं आँख में और एक बेलन हाथ में
औरतों की दो ही चीजों पर फिसलता आदमी,
         एक उनकी मुस्कराहट,एक रसीली बात  में
औरतों की बात दो ही मौकों पर ना टालता,
         एक उसके मायके में, एक मिलन की रात में
दो ही मौको पर खरच करने में घबराता नहीं,
          एक सासू सामने हो,एक साली    साथ में
  प्यार करने  दो ही मौकों पर हिचकता आदमी,
          एक बच्चे साथ में हो,एक हो जब तन थका
औरतों की दो ही चीजे लख मचलता  आदमी,
           एक  चेहरा खूबसूरत,एक चलने की अदा
औरतों की दो ही चीजे आदमी को है पसंद,
            एक सजना सजाना और एक अच्छा पकाना
औरतों  की दो अदाओं पर फ़िदा है आदमी,
           एक उसकी ना नुकुर और एक नज़रें झुकाना
औरतों के रूप का रस इनसे पीता आदमी,
          नशीले दो नयन चंचल और दो लब  रसीले
दो दिनों की जिंदगी को हंस के जीता आदमी,
         गौरी की दो गोरी बाहों का अगर बंधन मिले

मदन मोहन बाहेती'घोटू'