Monday, April 4, 2011

चोंचले

     चोंचले
एक रेस्तरां में
आया खाना खाने
एक बढती उम्र का कपल
बेयरे ने पूछा 'क्या लाऊं सर'
बुजुर्ग पति ने, एक प्लेट बैंगन का भरता,
और दो तंदूरी मिस्सी रोटी का ऑर्डर दिया
इस पर प्रोढ़ा पत्नी ने की ,ये प्रतिक्रिया
'खाते थे रोज प्रेम  से जो दाल माखनी
अब मांगते है भरता,खुद भरते से हो चले
तन दूरी भी चाहिए,मिस सी भी चाहिए
अच्छे लगे हैं क्या ये बुढ़ापे में चोंचले?

                                          

उम्मीद

   उम्मीद
कहते है ,उम्मीद के सहारे
 दुनिया चल रही है
और ये भी कहा जाता है
किसी से कोई उम्मीद मत रखो,
क्योंकि उम्मीद पूरी नहीं होने पर
दिल टूट जाता है
कुछ भी हो,मैंने अपनी उम्मीदों को,
एक गमले में,
खिले हुए फूलों के संग सजा रखा है
इस उम्मीद से ,
की कभी न कभी तो
मेरी उम्मीदें विकसेगी ,पूरी होंगी
पर शायद मै गलत हूँ,
क्योंकि उम्मीद पूरा करने के लिए
सिर्फ आस ही नहीं ,
करना पड़ता है प्रयास
और प्रयास करने पर ही
मेरी उम्मीदें पूरी होंगी,
एसा है मेरा विश्वास
   मदन मोहन बाहेती 'घोटू'


तेरा मेरा प्यार नया है

तेरा मेरा प्यार नया है
अपना ये अभिसार नया है
यूँ तो हम मिलते रहते है
मिलना पर हर बार नया है
गुन गुन गुंजन करता भंवरा
देता रहता कली पर पहरा
कली को जब विकसा पता है
रस पीता,चुप हो जाता है
प्रेम भरा संसार नया है
तेरा मेरा प्यार नया है
सूर्य रश्मियों ने चमकाया
पुरवैया ने आ थपकाया
तुमने ज्यों ही आँखें खोली ,
तो सारा कानन महकाया
यौवन का उपहार नया है
तेरा मेरा प्यार नया है
मधुमख्खी सा चुम्बन मेरा
घूंट घूंट रस पीता तेरा
मधुकोष में कर मधु संचन
रसमय रहता सारा जीवन
सपनो का आकार नया  है
तेरा मेरा प्यार नया है
       Er  मदन मोहन बाहेती 'घोटू'