Monday, September 19, 2011

आठों प्रहर तुम्ही छायी हो

आठों प्रहर तुम्ही छायी हो
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मेरे मन के नीलाम्बर में,तुम आती हो,छा जाती हो
धवल धवल से बादल जैसी,स्मृति पटल पर मंडराती हो
भोर अरुण की आभा से  जब,रूप चमकता प्यारा,स्वर्णिम
मन्त्र मुग्ध सा तुम्हे देखता,हो जाता आनंद विभोर मन
दोपहरी की प्रखर किरण से,जगमग प्रखर रूप की आभा
सांध्य रश्मियाँ तुम्हे सजाती,जैसे सोने संग सुहागा
जैसे जैसे जब दिन ढलता,तुम तारों संग  रास  रचाती
खिलता रूप चाँद सा प्यारा,रजनीगंधा सी महकाती
कभी लता सी लिपटी मन से,कभी फूल सी मुस्काई हो
मेरे मन में,इस जीवन में,आठों प्रहर  तुम्ही छायी हो

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

आजकल मेरी आँखों पर बाईफोकल चश्मा है

जवानी में,
हसीनो को,
कमसिनो को
पड़ोसिनो को,
ताकते, झांकते,
मेरी दूर की नज़र कमजोर हो गयी,
और मेरी आँखों पर,
दूर की नज़र का चश्मा चढ़ गया
बुढ़ापे तक,
अपनी बीबी को,
रंगीन टी वी को
कुछ करीबी को
पास से देखते देखते ,
मेरी पास की नज़र कमजोर हो गयी,
और मेरी आँखों पर,
पास की नज़र का चश्मा चढ़ गया
जवानी के शौक,
और बुढ़ापे की आदतें,
ये उम्र का करिश्मा है
आजकल  मेरी आँखों पर ,
बाईफोकल  चश्मा है 

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

.....और लगता भूकंप आगया

.....और लगता भूकंप आगया
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अन्नाजी के आन्दोलन से
या नेताओं के अनशन से
सोनिया के वापस आने से
या अमर के जेल जाने से
                 धरती सहमी
पेट्रोल के दाम बढ़ने से
मंहगाई के ऊपर चढ़ने से
बढती हुई ब्याज की दर से
गेस के दाम बढ़ने की खबर से
                  धरती हिली
आतंकवादियों के विस्फोट से
पडोसी के मन की खोट से
घोटाले और भ्रष्टाचार से
हमारे नेताओं के  व्यवहार से
                  धरती  दहली
मंत्रियों की बढती हुई वेल्थ से
जनता की बिगडती हुई हेल्थ से
सड़कों की खस्ता हालत से
रोज रोज बढती हुई मुसीबत से
                 धरती कांपी
........ और लगता भूकंप आ गया

मदन मोहन बाहेती'घोटू'