Wednesday, July 31, 2019

यह युग रिकमंडेशन का है

यह युग रिकमंडेशन का है
पुश ,रेकमंडेशन या जरिया ,चांदी  के बल पर चलते है
रिश्तेदारी का भोजन कर ,पैसों के साये पलते है
मख्खन की मालिश होती है ,ये चमकीले चमक रहे है
दौलत के बल दाल दल रहे ,दिन दिन दूने दमक रहे है
दुनिया के चप्पे चप्पे में , चारों  और नज़र आते है
पुश पाकर पापी से पापी ,बेतरणी को तर जाते है
जर के बल पर जरिया होता ,पर्स देख कर पुश मिलता है
है प्रचंड रिकमंड ,फंड गर ,नहीं काम कैसे चलता है
रिकमंडेशन ही फैशन है,आज जमाना फैशन का है
यह युग रिकमंडेशन का है
भारत की प्रगति में देखो ,कितना बड़ा साथ है इसका
बेकारी के उन्मूलन में ,कितना बड़ा हाथ है  इसका  
जितने थे बेकार भतीजे ,भाई मामा चाचा बेटे
रिकमंडेशन की महिमा है ,आज सभी कुर्सी पर बैठे
यह जरिये का ही जादू है ,आज धूल में फूल खिले है
उनके साले के साले ने ,डाली कितनी दाल मिलें है
उस सफ़ेद बंगले के अंदर ,छुपी हुई काली कमाई है
नेता ठेकेदार आफिसर ,चोर चोर सब ,भाई भाई है
क्या क्या होता है मत पूछो ,अजब ढंग यह जीवन का है
यह युग रिकमंडेशन का है
लोग आदमी नहीं देखते ,आमदनी देखा करते है
बटुवे के भारीपन को लख ,दाव  बहुत फेंका करते है
अब बस मख्खन बाजी चलती ,रिश्वत आम रिवाज हो गया
पत्रपुष्प जो अगर चढ़ा तो ,पुश भी पाया ,पास हो गया
अब शादी से रिश्तेदारी तक रिकमंडेशन चलती है
बिना शिफारिश की चिट्ठी के ,दाल किसी की ना गलती है
चपरासी रिकमंड न करदे ,तो साहब ना मिल सकते है
तुम्ही बताओ गर्मी के बिन ,कच्चे आम कभी पकते है
रिश्वत का बाजार गरम है ,गूँज रहा उसका डंका है
ये युग रिकमंडेशन का है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
 दीपक अभिनन्दन

जो जल कर भी जगमग करता ,जन जीवन के आंगन को
भू के ऐसे एक दीप  पर ,सौ सौ चाँद निछावर है

थका बटोही ठहरे ,उसको चैन मिले
रात हुई ,चकवा चकवी के नैन मिले
बया घोसले में बच्चों के साथ रहे
जहाँ हमेशा सरगम की बरसात रहे
कलरव गूंजे,गए विहंग भी नहीं थके
एक डाल पर ,काग कोकिला बैठ सके
जो पत्थर के उत्तर में भी ,फल दे मीठे रसवाले ,
भू का ऐसा एक वृक्ष ,सौ कल्पतरु से बढ़ कर है
भू के ऐसे एक दीप पर सौ सौ चाँद निछावर है

माना नभ में रोज दिवाली होती है
पर निर्धन की कुटिया काली होती है
जिसके मन में घोर अँधेरा छाया है
वहीँ प्रेम का दीपक भी मुस्काया है  
कड़वा रहता तेल ,कांति पर देता है
घुट घुट जलता हुआ कांति पर देता है
जो तूफानों को सह कर भी ,मुस्काता जलता जाता ,
एक किरण ऐसे दीपक की ,रवि रश्मि से सुन्दर है
भू के ऐसे एक दीप पर ,सौ सौ चाँद  निछावर है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 
एकता गीत

हाथ में ,हाथ दे
साथ साथ हम चलें
साथ साथ रे ,साथ साथ रे
एक साथ ,साथ साथ ,साथ साथ रे
वाधा से झुके नहीं
हम कभी रुके नहीं
मुश्किलों से खेलते
आँधियों को झेलते
दुःख को भी लगा गले
हम चले,बढे चले
एक लक्ष्य है ,एक साध रे
एक साथ साथ साथ साथ साथ रे
दिल में आग है
प्रेम राग है
जीत के लिए
हम सदा जिये
जब तलक है दम में दम
कदम कदम मिला के हम
बढ़ते जाएंगे ,साथ साथ रे
एक साथ साथ साथ साथ साथ रे

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
पश्चाताप

मैं शादी करके पछताया ,उस बड़े बाप की बेटी से

थी बीस बरस की उमर अभी ,मूंछों की रेख न उघड़ी थी
शैशव का साथ  छोड़ मैंने ,यौवन की  ऊँगली पकड़ी थी
पर प्रथम चरण में यौवन के ,मैं बुरी तरह से भटक गया
जो आसमान से टपका तो आकर खजूर में लटक गया
जाने क्यों मेरी शादी का ,एक  ऑफर मिला रावले  से
तगड़े दहेज़ की बात सुनी ,घर वाले  हुए  बावले  से
मुझ से बिन बोले ,बिन पूछे ,मेरी शादी करदी पक्की
और मैं कुछ बोला  तो बोले ,राजा बेटा ,तू है लक्की
सुनते है बहू साहजी की ,प्यारी इकलौती बेटी है  
आ करे निहाल ,हमें ,उसके ,पैरों में लक्ष्मी बैठी है
उनके मुनीमजी कहते थे ,वो तुझको फॉरेन  भेजेंगे
यदि नयी नहीं सेकंड हैंड मोटर दहेज़ में वो देंगे
अच्छा बंगला है ,इज्जत है ,दो दो अंग्रेजी कारे है
तेरी तक़दीर तेज  बेटा ,अब तो बस वारे न्यारे है
मैं बोला वो सब ठीक मगर मुझसे भी तो पुछवा लेते
लड़की न दिखाई ,कम से कम ,फोटो ही तो दिखला देते
'फोटो को, क्या चाटेगा ,वो सुन्दर भोली भाली  है
है सभी बात में अच्छी ,बस कुछ लम्बी है कुछ काली है
लम्बी तो तेरी माँ भी है और काले कृष्ण कन्हैया थे
हमको क्या जब वो दहेज़ में क्रीम पाउडर सब देंगे
है बूढ़े ससुर और बेटी उनकी इकलौती   वारिस है
अब ना मत करो लाल मेरे ,बस मेरी यही गुजारिश है
फादर को न बहू लेकिन ,था प्यार दहेजी पेटी  से
मैं शादी करके पछताया ,उस बड़े बाप की बेटी से

इतनी चिकनी चुपड़ी बातें सुन मेरा मन भी डोल गया
फॉरेन जाने के चक्कर में ,मैं ख़ुशी ख़ुशी हाँ बोल गया
फिर महीने भर के अंदर ही गूंजी शादी की शहनाई
पहने सुधारवादी चोगा ,सारी रस्मो की भरपाई
शादी थी हुई बिना परदे  ,पर वह परदा ना तो क्या था
उनके मुख पर परदा न मगर मेरी आँखों पर परदा था
वह झीना झीना परदा था ,मोटे  दहेज़ और मोटर का
फॉरेन जाने की आशा का ,दौलत पाने के चक्कर का
होगयी खैर शादी मेरी ,लेकिन दहेज़ में क्या पाया
नखरे,ताने देनेवाली ,है धन्य प्रभु तेरी  माया
मिल गया एक हेलिकॉफ्टर ,जो पग जमीन पर नहीं रखे
बीबी न रेडियो एक मिला ,जो दिन भर बोले ,नहीं थके
कार दहेजी नहीं मिली ,लेकिन सरकार मिली मुझको
पहले थी आँखें चार और फिर आँखे चार मिली मुझको
यार दोस्त ये कहते है बीबी तो बड़ी हसीन मिली
जो स्वयं रेडियो ,हेलिकॉफ्टर ,ऐसी एक मशीन मिली
एक ऐसी मैना मिली मुझे जो मैका मैका जाती है
ससुराल पिंजरा लगता है ,अम्मा की याद सताती है
चूल्हा फूंके ,आंसू आवे ,रोटी सेके तो हाथ जले
क्या खूब मिली बीबी मुझको ये पूर्व जनम के कर्म फले
खोदा पहाड़ निकली चुहिया ,अपनी करनी पर पछताए
अब राम भला करदे मेरा ,अबके से तो गंगा नहाये
जला दूध का ,रहूँ छाछ से ,एक हाथ की  छेटी  से
मैं  शादी करके पछताया ,उस बड़े बाप की बेटी से

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
(यह रचना १९६२ में लिखी गयी थी )

Tuesday, July 30, 2019

ओ डैडी !

मैं तो बडा निराश हो गया ओ डैडी
अब दहेज़ बिल पास हो गया ओ डैडी

कितना दुखी है आफत का मारा मै
बीस बरस की उमर हुई पर कंवारा मैं
कितने ऑफर आये कितने भाव बढे
लेकिन तुम तो अपनी जिद पर रहे अड़े
एक लाख से कम दहेज़ के ऑफर पर ,
दिया नहीं कुछ ध्यान आपने ओ डैडी
किया न मम  कल्याण आपने ओ डैडी

अब तक चेक समझ कर मुझको बैठे थे
चढ़ते शंकर जी को, मावे के पेठे थे
ऐसी बहू दिला बेटे को ए शंकर
भैंस सरीखी देवे दूध बाल्टी भर
दूध दहेजी कम दे लेकिन सुन्दर हो ,
मै तो उजली गाय मांगता ओ डैडी
यही आपसे राय मांगता ओ डैडी

मैं अब भी कहता हूँ मेरा ख्याल करो
मेरी शादी ओ फादर अगले साल करो
जितना मिले दहेज़ वही लो ,मत अकड़ो
भाग रहा है भूत लंगोटी ही पकड़ो
अगर फंसे जो कहीं दहेजी चक्कर में ,
डर लगता बहुत बड़े घर से अब ओ डैडी
मित्र हुए मेरे मैरिड सब ओ डैडी

घोटू 


हाय  राम  मै इंटरव्यू में फ़ैल हो गया

बहुत दिनों के बाद सास की आस मिली थी
या यूं समझो मुर्दा दिल को सांस मिली थी
क्या सोचा था मैंने पर क्या हाय  हो गया
सपनो का बेलून हवा में  फ्लाय हो गया
महल बना था ,अरमानो का ,ढेर हो गया
हाय राम मैं इंटरव्यू में फ़ैल हो गया

मन में जिसका डर था उसको फेक्ट कर दिया
लड़की की अम्मा ने मुझे रिजेक्ट कर दिया
शादी माँ को तो ना बेटी को करनी थी
लेकिन दुःख की लुटिया तो मुझको भरनी थी
दालभात में मूसरचंद का मे हो गया
हाय राम मैं इंटरव्यू में फ़ैल हो गया

माना मोटे होठ नाक मेरी चौड़ी है
लेकिन मेरी सूरत क्या इतनी भोंडी है
यूं ही नर्वस था मैं बोला हौले हौले
जैसे ही सर मुंडा पड़  गए सर पर ओले
जीते जी दुनिया में रहना जेल हो गया
हाय राम मैं इंटरव्यू में फ़ैल हो गया

घोटू 
बारिश है पर  दूर सजन है

बारिश है पर दूर सजन है
चूल्हा ठंडा पड़ा हुआ है ,सिगड़ी बिगड़ी ,नहीं अगन है
बारिश है पर दूर सजन है

 है स्टोव बिसूरता उसमे पर मिट्टी का तेल नहीं है
ओ  पीहर की प्यारी  प्रियतम मेरा घर भी जेल नहीं है
आज केटली खाली खाली ,भाग गयी है चाय निगोड़ी
ठंडा मौसम,भूख लगी पर ,कौन खिलाये  मुझे पकोड़ी
तेल पड़ा मीठा तिल्ली का  ,मगर पास  में  ना बेसन है
बारिश है पर दूर सजन है

नहीं आग सुलगा सकता हूँ ,क्योंकि सील गयी है माचिस
भुट्टा छिलकों बीच दबा है ,कैसे  पाऊं भुट्टे का किस
बाहर रिमझिम है गीलापन ,लेकिन मेरा उर सूखा है
ओ दिलवाली ,ये दीवाना ,तेरे दरशन का भूखा है
पी घर से तो मन उकताता ,पर पीहर से लगी लगन है
बारिश है पर दूर सजन है

घोटू 
शादी का विज्ञापन

मैं अब तक बैठा कंवारा हूँ
अब  शादी  करने वाला हूँ

बहुत दिनों तक सहन किया ,लेकिन अब सहा नहीं जाता
मम्मी सुनती ही नहीं कभी ,डैडी  से कहा नहीं जाता
शादी की मीठी बातों से ही पेट न मेरा भरता भरता है
मुझ सामाजिक प्राणी को सूनापन बहुत अखरता है
दिल मेरा खाली पड़ा हुआ ,कोई ना जिससे  प्यार करूं
मेरी अब तक शादी न हुई ,बोलो कब तक इन्तजार करूं
शादी का नाम कभी सुनता ,मुंह में पानी भर आता है
लक्ष्मी घर में आ जायेगी ,फिर फादर का क्या जाता है
मम्मी डैडी ना सुनते है तो खुद पर है अधिकार मुझे
आखिर कभी बसाना ही तो है अपना संसार मुझे
नहीं कंवारा रह कर अब मैं  काट सकूंगा निज जीवन
होकर निर्लज्ज कर रहा हूँ मैं निज शादी का वज्ञापन
ऐसी बीबी की चाह मुझे ,पाकर जिसको ,मुझको सुख हो
थोड़ी काली भी चल सकती पर पढ़ीलिखी हो ,नाजुक हो
ज्यादा फेशनवाली न बने जो हरदम सजधज कर निकले
एम ए ,बी ए की चाह नहीं ,बस चिट्ठीपत्री पढ़ लिख ले
परदे से हो परदा  जिसको ,लेकिन फिर भी शरमीली हो
नाक कान कट अच्छा हो ,आँखें जिसकी चटकीली हो
जो चूल्हा भी फूंक सके हो पाकशास्त्र का ज्ञान जिसे
घर और बच्चों कीउलझन में भी रहे पति का ध्यान जिसे
गाना आता तो अच्छा है ,मीठी बातें करना  जाने
देवर ननदों से प्यार करे ,सासूजी का कहना माने
छरहरा बदन ,दुबली पतली लेकिन ना फुदके तितली सी
आँखे चमकीली तो होंगी ,लेकिन ना चमके बिजली सी
सुन्दर  हो पर निज  सुंदरता पर ज्यादा ना इतराये वो
खुद नाच न जाने चल सकता पर मुझको नहीं नचाये वो
ध्यान रहे कि अधिक दिनों तक रह न सकेगी पीहर में
संतुष्ट  उसे रहना होगा ,मेरे छोटे ,अपने घर में
यदि गुस्से में कुछ कह दूँ तो वो मेरा बुरा न मानेगी
देवी सी पूजूंगा उसको यदि वो पति को परमेश्वर जानेगी
दिल नहीं टूट जाए उसका  यह ख्याल रखूंगा मैं हर क्षण
पर मुझको गरजू ना समझे ,शादी की देकर विज्ञापन
मेरा दिल भी आखिर दिल है ,बचपन की सीढ़ी पार करी
मैं बहुत दिनों से कंवारा हूँ ,अब मेरी राखो लाज हरी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

(उपरोक्त कविता साथ वर्ष पूर्व लिखी गयी थी )

Monday, July 29, 2019

 तुझको  नींद नहीं  आये

मेरी नींद चुराने वाले ,तुझको नींद नहीं आये
तुम खर्राटे भरो और मैं जागूँ ,यह ना हो पाय

रोज लिपट कर सोते थे हम ,रात बिताते मतवाली
तुमने तकिये रखे बीच में ,और दीवार बना डाली
बिन तेरे तन की खुशबू के मुझको नींद नहीं आती
तुम बिन मैं तड़फा करता हूँ ,रात नहीं काटी जाती
पास प्रिया पर छू ना पायें ,कैसे दिल को समझायें
मेरी नींद चुराने वाले ,तुझको नींद नहीं आये

राम करे कि भूत चुड़ैलों के सपने तुमको आये
घबराहट से सो न सके तू ,डरे  ,पसीने आ जाये
या जंगल में गुम होवे तू  ,शेर बबर तुझ  पर झपटे
इतनी ज्यादा तू डर जाये ,झट से मुझसे आ लिपटे
मैं तुझको बाहों में बाँधूँ ,ढाढ़स दूँ ,हम सो जाये
मेरी नींद  चुराने वाले ,तुझको नींद नहीं आये  

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 
कबूतरों से

हे प्रेम के प्रतीक परिंदों !
अपनी चमकती गर्दन को मटका कर ,
तुम्हारे प्रेमप्रदर्शन का अंदाज
सचमुच है लाजबाब
तुम्हे अपनी प्रेमिका के साथ
गुटरगूँ करते हुए देख कर ,
कितने ही नवप्रेमी ,भावुक हो जाते है
प्रेमशास्त्र का पहला  अध्याय सीख कर ,
एक दूसरे में खो जाते है

हे पंख फड़फड़ाते हुए आशिकों !
तुम तो हो मोहब्बत के फ़रिश्ते
हर तीसरे चौथे दिन किसी नई कबूतरनी संग ,
जोड़ लिया करते हो रिश्ते
और घर की मुंडेरों पर हो नज़र आते
उनके संग इश्क़ लड़ाते
खुले आम ,सामने सारे जहाँ के
हमें भी बता दो
लड़की पटाने का ये हुनर ,
तुमने सीखा है कहाँ से

हे मुकद्दर के सिकंदरों !
तुमने मेहरुन्निसा के हाथो से उड़ ,
उसका मुकद्दर चमका दिया
और एक दिन  उसे नूरजहां बना दिया
वैसी ही तक़दीर हमारी भी चमका दो
किसी बड़ी हस्ती का ,
लख्तेजिगर बनवादो

हे चापलूस चुहलबाजों !
तुम अक्सर
आते हो नज़र
'हाँ 'कहनेवाली मुद्रा में ,
गर्दन हिलाते हुए ,
ऊपर से नीचे ,नीचे से ऊपर
दाएं बाए गरदन हिलाकर ,
कभी भी नहीं करते हो नाहीं
क्या इसी तरह हर बात मान कर ,
 लड़की जाती है पटाई

हे गगन बिहारी प्रेमियों !
तुम्हारा दिशाज्ञान
सचमुच है महान
तुम्हे कितना ही छोड़ दो खुला
पर जैसे ही दिन ढला
तुम आज्ञाकारी पतियों की तरह ,
लौट कर ,सीधे आ जाते हो घर
और बन जाते हो लोटन कबूतर

हे प्रेमसन्देश के वाहकों !
एक जमाने में  प्रेमिकाएं ,
अपने पहले प्यार की पहली चिट्ठी
तुम्हारे माध्यम से भिजवाती थी
और कबूतर जा जा गाना जाती थी
लेकिन तुम खुद तो ,
कभी प्रेम संदेशा भिजवाने की ,
नौबत ही नहीं आने देते हो
गुटरगूँ करते हुए ,गरदन मटका कर ही
कबूतरनी को पटा  लेते हो

हे शांति के दूतों !
तुम्हारे श्वेतवर्णी भाइयों को ,
शांति का प्रतीक मान कर लोग है उड़ाते
पर तुम शांति से बैठे हुए ,
कभी भी हो नज़र नहीं आते
हमेशा देखा है तुम्हे व्यस्त ,
किसी न किसे कबूतरनी के साथ ,
टांका बिठाते

हे कुलबुलाते हुए कपोतों !
तुम भी आजकल के कपूतों की तरह ,
उड़ना सीख लेने पर
चले जाते हो अपने माँ बाप को छोड़कर
अपना अलग घर बसा लेते हो
उनके प्यार और त्याग का ,
यही सिला देता हो

हे कलाबाज कबूतरों !
तुम दिखने में इतने सीधे सादे हो
पर क्या सचमुच ही वैसे हो जैसे दिखते हो
मुझे तो तुम आवारा प्रेमी लगते हो
कभी भी  एक जगह नहीं टिकते हो

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '


   

Saturday, July 27, 2019

हम सब कांवड़िये है

जीवन में हर एक काँधे पर होती  कांवड़
संभल संभल जो  चलते वो पाते आगे बढ़    

एक तरफ कांवड़ में परिवार और घर है
और दूसरी तरफ काम है और दफ्तर है
दोनों पर ही पूर्ण ध्यान देना आवश्यक ,
ऊंच नीच थोड़ी सी भी कर देती गड़बड़
जीवन में हर एक काँधे पर होती  कांवड़

कांवड़ में एक तरफ पत्नी का अधिकार है  
एक तरफ माँ और पिता का भरा प्यार है
दोनों का संतुलन अगर थोड़ा  बिगड़ा ,
जीवन यात्रा में कितनी मुश्किल जाती पड़
जीवन में हर एक काँधे पर होती  कांवड़

हर कावड़ में एक तरफ खुशियां  सुख है
परेशानियां ,दूजी और  भरे   दुःख है
सुख दुःख में संतुलन बना कर जो जीते ,
वो ही सफलता की मंजिल को पाते चढ़
जीवन में हर एक  काँधे पर होती कांवड़  

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Thursday, July 25, 2019

       मुझसे झगड़ा न करो रानी

मुझ भोले भाले ,बैठे ठाले ,ढीले ढाले मानव से ,
तुम नए निराले नखरों से ,हरदम अकड़ा न करो रानी
                                   मुझसे झगड़ा न करो रानी
 
माना तुम गोरी चमड़ी की ,चिकनी हो ,लाल चुकंदर सी
मैं बुद्धू, श्याम वरन का हूँ ,मेरी सूरत है  बंदर  सी  
तुम पहलवान हो किंगकॉन्ग सी ,मुझे मर्ज है टीबी का
पर मुझसे क्यों झगड़ा करती ,क्या यही फर्ज है बीबी का
मुझ दुबले पतले प्राणी पर ,बेलन के वार चलाती हो
सलवार धार कर तानो की तीखी तलवार चलाती हो
मैं तंग आ गया तुम्हारी ,जिव्हा की तेज कतरनी से
घरवाला  तो हूँ ,हार मानता लेकिन अपनी घरनी  से
मेरे चूहे से कान ,मानता हूँ ,लेकिन ये कोमल है ,
इनको इतनी आज़ादी से ,ऐसे पकड़ा न करो रानी
                               मुझसे झगड़ा न करो रानी

देखो मैं तुम्हारे कितने ,नखरे और नाज़ उठाता हूँ
पर फिर भी तुम्हारे खिलाफ ,मैं ना आवाज उठाता हूँ
पिक्चर का मूड कभी होता तो तुमको राजी करता हूँ
तुम्हारी रूप प्रशंसा कर ,मैं मख्खनबाजी करता हूँ
लेकिन तुम एक टके  जैसा उत्तर दे टरका देती हो
मेरे पॉकेट के सब रूपये ,चुपके से सरका लेती हो
मैं  इतना काम किया करता पर फिर भी भीगी बिल्ली सा
तुम बम्बई सी भड़कीली ,मैं मौन शांत हूँ दिल्ली सा
तुम्हारी बिना इजाजत के ,मैं नहीं कहीं भी जा सकता ,
भारत स्वतंत्र फिर बंधन में ,मुझको जकड़ा न करो रानी
                                     मुझसे झगड़ा न करो रानी

तुम पढ़ीलिखी हो समझदार हो ,दो बच्चों की मम्मी हो
मैं एक नए पैसे जैसा हूँ तो तुम एक अठन्नी हो
तुम एवरेस्ट सी ऊंची हो तो मैं हूँ एक टिबड्डा सा
तुम पेसेफिक सी गहरी हो मैं हूँ बरसाती गड्डा सा
सब कहते है मैं हूँ गदहा पर  मैंने हथिनी पायी है
लेकिन है गर्व मुझे ,मैंने तुम जैसी पतनी पायी है
तुम मच्छरदानी जैसी हो मैं मच्छर जैसा हूँ सजनी
पर मैं तुम्हारा पति जो हूँ ,परमेश्वर जैसा हूँ सजनी
मेरी पूजा यदि नहीं करो तो मुझको भक्त बना लो तुम ,
मेरी पूजा स्वीकार करो दिल यूं सकडा  न करो रानी
                                 मुझसे झगड़ा न करो रानी

वो तो मैं ही हूँ ढीठ बना सब बात तुम्हारी सुन लेता
एक बात के उत्तर में ,मैं आठ तुम्हारी सुन लेता
पर अब ये अल्टीमेटम है कि तुमसे नहीं डरूंगा मैं
यह हड़ताली युग आया देवीजी हड़ताल करूँगा मैं
इन रोज रोज की झिड़की से जो लगी एक भी बात मुझे
तो निश्चित ही बनना होगा फिर कोई तुलसीदास मुझे
मैं साधू कवि बन गया तो ,मेरी जग में इज्जत होगी
लेकिन इतना तो सोचो तुम ,तुम्हारी क्या हालत होगी  
मुझको बैरागी बनने से ,जो अगर बचाना है तुमको
ना झगडोगी लो कसम प्रिये ,हमसे अकड़ा न करो रानी
                                    मुझसे झगड़ा न करो रानी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 
एक सलाह -शादी के बारे में

मेरे मित्रों ,उस लड़की से शादी करना,जो काली हो
सास ससुर हो दिलवाले ,वो भले जेब से खाली हो

चिकनी चमड़ी ही मत देखो शादी जीवन का सौदा है
रंग रूप दिखावा है केवल ,असली तो दिल ही होता है
मत देखो गोरा तन केवल ,बाहर से सभी चमकते है
ऊंची दूकान वाले फीके पकवान सजा कर रखते है
बासी सफ़ेद रसगुल्लों से ,ताज़ा गुलाबजामुन अच्छा ,
काली लड़की है ,हाँ भर दो ,चाहे ना देखी  भाली हो
मेरे मित्रों उस लड़की से शादी करना जो काली हो

उजले तन को क्या चाटोगे ,असली होता उजला मन है
चमकीला कांच तभी होगा ,जब पीछे काला रोगन  है
जिसको निज रूप सदा प्यारा वो प्यार पति को क्या देगी
मेकअप से छुट्टी नहीं जिसे, उपहार पति को क्या देगी
गोरी बीबी को बाज़ारों में ,लोग घूर कर तकते  है ,
इससे काली बीबी अच्छी जो लम्बे घूंघट वाली हो
मेरे मित्रों उस लड़की से शादी  करना जो काली हो

जो लक्ष्मी के दीवाने है ,कोई से प्यार न करते है
पैसे वाले ये सास ससुर ,दामाद ख़रीदा करते है
पैसे वालों की बेटी जी को पतिगृह नहीं सुहाता है
अक्सर पीहर में मन लगता ,पीघर से मन उकताता है
उस बड़े बाप की बेटी से जो नहीं पकाना तक जाने ,
अच्छी गरीब की बेटी ,कामधाम  तो करने वाली हो
मेरे मित्रों उस लड़की से शादी करना जो काली हो

मेरे मत में संसार सार ,केवल ससुराल हुआ करता
ससुराल बड़े घर के में तो ,कैदी सा हाल हुआ करता
इससे गरीब ही अच्छे है ,जो दिल का रिश्ता समझेंगे
बेटी का बोझ किया हल्का ,वो तुम्हे फरिश्ता समझेंगे
भोले भाले हो सास ससुर ,काली बीबी जीवन साथी ,
ससुराल स्वर्ग बन जाएगा ,यदि कोई छोटी साली हो
मेरे मित्रों उस लड़की से शादी करना जो काली हो

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
मात शारदे

मात  शारदे !
मुझे प्यार दे
वीणा वादिनी ,
नव बहार दे

मन वीणा को ,
झंकृत  कर दे
हंस वाहिनी ,
ऐसा वर दे
सत पथ अमृत ,
मन में भर दे
बुद्धि दायिनी ,
नव विचार दे
मात शारदे !
 
ज्ञान सुधा  की ,
घूँट पिला  दे
प्रेम भाव का ,
जलज खिला दे
नयी चेतना ,
मन में ला दे
डगमग नैया ,
लगा पार दे
मात शारदे !

भटक रहा मैं ,
दर दर ओ माँ
नवप्रकाश दे ,
तम हर  ओ माँ
नव लय  दे तू ,
नव स्वर ओ माँ
ज्ञान सुरसरी ,
प्रीत धार दे
मात शारदे !

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Wednesday, July 24, 2019

कॉम्पिटिशन



समझ न पड़ता ,किस रस्ते पर ,आज जमाना आमादा है

काम  भले ही कम होता है ,पर कॉम्पिटिशन  ज्यादा  है

कल बीबीजी का खत आया ,दो पन्नो में ,सौ अक्षर थे

उनमे भी आधे से ज्यादा ,प्यारे प्रियतम या डिअर थे

उनकी एक मैरिड बहन है ,हुआ बरस भर ही शादी को

मगर  चीन से लड़ने के हित  बढ़ा रही है आबादी  को

तो मेरी उन सालीजी और बीबी में कॉम्पिटिशन  है

किसका पति ज्यादा अच्छा ,किसमें लेटर लिखने का फ़न है
तो अबके से चेत गयी है ,देखें किसको कौन हराये

वो जीतेगी ,जिसके पति का ,जितना लम्बा लेटर आये

वल्लाह ये भी बात हुई क्या ,लेटर से पति को तौलेगी

बीबी लिखती लम्बा खत लिखना वरना वो ना बोलेगी  

सौ बार भले ही नाम हमारा लिखदो पर लम्बा हो लेटर

अबके से मैं ही जीतूंगी ,अबके से हारेगी सिस्टर

तो अब बढ़ गयी भैया ,कॉम्पिटिशन तगड़ा होगा

दूर तमाशा देखे मुर्गी ,अब मुर्गो में झगड़ा होगा

मैंने साफ़ लिख दिया उनको ,जो तुम झगड़ो चीज चीज में

तुम जानो और काम तुम्हारा जाने मैं क्यों पडूँ बीच में

आज बात लेटर की ही है ,जाने कल बाजी लग जाए

देखें उनमे अब से पहले ,मौसी किसको कौन बनाये

बात औरतों की है भैया कौन खबर कल फिर बढ़ जाए

वो जीते जो सबसे पहले ,फूटबाल की टीम बनाये

उनका कॉम्पिटिशन ठहरा ,अपनी मगर मुसीबत होगी

कंवारे रहते ,अगर जानते ,शादी ऐसी आफत होगी

पर कॉम्पिटिशन के चक्कर में हमने शादी कर डाली

सभी फ्रेंड ,मैरिड हो गए ,केवल हामी पड़े थे खाली

डाला सर ओखली में जिनने ,उनमे अपना नंबर आया

इस कॉम्पिटिशन के चक्कर से कोई भी ना बच पाया
 
फिर भी बात मान बीबी की ,लम्बा खत लिखने बैठा हूँ

देती दूध गाय की लात सहूंगा ,बनिए का बेटा हूँ

क्षमा कीजिये श्रीमती जी ,यदि लेटर में कुछ गलती है

क्योंकि लम्बा खत लिखना है ,इसीलिये कविता लिख दी है


मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
तुमने अचार बना डाला

वैभव के सपने देखे थे ,मैंने जीवन के शैशव में
अभिलाषाओं का बहुत शोर ,करता था मैं किशोर वय में
यौवन के वन में आ जाना ,वह तो थी मृगतृष्णा कोरी
लेकिन अब हूँ मैं समझ सका ,जीवन भाषा थोड़ी थोड़ी
मे बनने वाला था कलाकार ,तुमने बेकार बना डाला  
केरी ना पक कर आम बनी ,तुमने अचार  बना डाला

 मेरी सारी आशाओं पर ,उस रोज तुषारापात हुआ
जिस दिनसे कि इस जीवन में ,मेरा तुम्हारा साथ हुआ
मैंने सोचा था पढ़ी लिखी,,तुम मेरा काव्य सराहोगी
तुम स्वयं धन्य हो जाओगी ,जो मुझसे कवि पति पाओगी
थी मधुर यामिनी की बेला ,मैं था तुम पर दीवाना सा
तुम्हारी रूप प्रशंसा में ,मैंने गाया कुछ गाना सा
मैं भाव विभोर हो गया था ,सोचा था तुम शरमाओगी  
या तो पलकें झुक  जाएगी या बाहों में आ जाओगी
पर पलकें झुकी न शरमाई ,तुम झल्ला बोली मत बोर करो
बाहर मेहमान जागते है ,अब चुप भी रहो न शोर करो
फिर यह सुन अभिलाषाओं ने था,बाँध सब्र का फांद दिया
जब तुम बोली हे राम मुझे ,किस कवि  के पल्ले बाँध दिया
फिर दिया लेक्चर लम्बा सा ,तुमने घर जिम्मेदारी का
मुझको अहसास दिलाया था ,तुमने मेरी बेकारी का
उस मधुर यामिनी में तुमने ,फीका अभिसार बना डाला
केरी ना पक कर आम बनी ,तुमने अचार बना डाला

फिर मुझे  प्यार से सहला कर ,कुछ ऐसी मीठी बात करी
रह गयी छुपी दिल ही दिल में ,मेरी कविताई  डरी डरी
मैं रूपजाल में बंधा हुआ ,जो तुम बोली सब सच समझा
फिर वही हुआ जो होना था ,मैं नमक तेल में जा उलझा
तुम्हारा कहना मान लिया ,हो गया किसी का नौकर मैं
बेचारी काव्य पौध सूखी ,जो पछताता हूँ बो कर मैं
बाहर कोई का नौकर पर ,घर में नौकर तुम्हारा था
तुम्हारी रूप अदाओं ने ,एक कलाकार को मारा था
इससे अच्छा यदि उसी रात ,जो प्यार मुझे तुम ना देती
मीठी बातों के बदले में,फटकार मुझे जो तुम देती
तो हिंदी जग में आज नया ,एक तुलसीदास नज़र आता
पत्नी ताड़ित यदि बन जाता ,पत्नी पीड़ित ना कहलाता
कितने ही काव्य रचे होते ,मैं कालिदास बना होता
मुरझाती यदि ना काव्य पौध ,तो अब वह वृक्ष घना होता
पर बकरी बन ,उस पौधे को ,तुमने आहार बना डाला
केरी ना पक कर आम बनी ,तुमने अचार बना डाला

मैं कई बार पछताता हूँ ,यदि तुमसे प्यार नहीं होता
मैं कुछ ना कुछ बन ही जाता ,मेरा ये हाल नहीं होता
लेकिन मुझसे भी ज्यादा तो ,अब कलाकार हो अच्छी तुम
हर साल प्रकाशित कर देती ,कोई बच्चा या बच्ची तुम
ना जाने क्यों मेरे मन को ,रह रह यह बात कचोट रही
तुम सौत समझती कविता को ,क्यों गला कला का घोट रही
मैं जब भी कुछ लिखने लगता ,सब काम याद क्यों आते है
अब तुम्ही बताओ उसी समय ,बच्चे क्यों शोर मचाते है
मैं भली तरह से समझ गया ,यह तुम्ही उन्हें हो सिखलाती
क्या लिखूं रात में खाख , तुम्हे ,लाइट में नींद नहीं आती
घंटों तक बोर नहीं करती ,सखियों की बातचीत तुमको
तो बतलाओ क्यों चुभते है ,मेरे ये मधुर गीत तुमको
मैं अलंकार की बात करू ,तुम आ जाती हो गहनों पर
मेरे कविता के टॉपिक को  ,ले आती हो निज बहनो पर
कहती हो रचना को चरना ,कवि  को कपिकार बना डाला
केरी ना पक कर आम बनी,तुमने अचार बना डाला

मैं बात काव्य रस की करता ,जाने क्यों मुंह बिचकाती हो
जब गन्ने और आम का रस ,दो दो गिलास पी जाती हो
मैं जब भी समझाने लगता ,कविता का भाव कभी तुमको
आ जाता याद बाजार भाव ,लगता है महंगा घी तुमको
जब मेरी काव्य साधना की ,दो बात नहीं सुन सकती हो
उस मुई सिनेमे वाली के ,घंटों तक चर्चे करती हो
क्यों गज भर दूर ग़ज़ल से तुम ,क्यों है रुबाई से रुस्वाई
क्यों डरती  हो तुम शेरों  से ,क्यों नज़म तुम्हे ना जम पाई
क्यों है नफरत क्या इन सबसे ,है पूर्व जन्म का बैर तुम्हे
या मैं ही सीधसादा  हूँ ,ना मिला कोई दो सेर तुम्हे
मत समझो ये सीधा प्राणी ,केवल घर का वासिन्दा है
मैं भले गृहस्थी में उलझा ,मेरा कवि  अब भी ज़िंदा है
पर जब तुम घर में रहती हो तो कहाँ काव्य लिख सकता हूँ
यदि चार माह पीहर रहलो तो महाकाव्य लिख सकता हूँ
हे राम फंसा किस झंझट में ,मेरे सर भार बना डाला    
केरी ना पक कर आम बनी ,तुमने अचार बना डाला

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '


 

Wednesday, July 17, 2019

खो गयी जाने कहाँ वो उँगलियाँ

जिन उँगलियों में मैंने ,सगाई की अंगूठी पहनाई थी
जिन उँगलियों में ऊँगली फंसा ,जीने मरने की कसम खाई थी
वो उँगलियाँ जो हाथ हिला कर मुझे बाय बाय किया करती थी
वो उंगलिया जो मुझे देख कर 'फ्लाइंग किस 'दिया करती थी
वो उँगलियाँ जो कभी कभी मुझे प्रेम भरे पत्र लिखा  करती थी
वो उँगलियाँ ,जो पूजा के बाद ,मेरे मस्तक पर टीका करती थी
वो उँगलियाँ जो मेरे दुखते हुए सर को प्यार से सहलाती थी
वो उँगलियाँ जो जरुरत पड़ने पर मेरी पीठ को खुजाती  थी
वो उँगलियाँ जो मेरे दर्दीले पावों में एक्यूप्रेशर दिया करती थी
वो उँगलियाँ जो मेरे दुःख में बहते आंसूं पोंछ दिया करती थी
वो उँगलियाँ जो हाथ में सलाइयां लेकर उलटे सीधे फंदे  डाल
मेरे लिए गरम  ऊन का नया स्वेटर बुना करती थी  हरेक साल
वो उँगलियाँ जिनके बने पकवान खा ,मैं उँगलियाँ चाटा करता था
वो उँगलियाँ जिनके इशारों पर मैं दिन रात नाचा करता था
वो उँगलियाँ जो फुर्सत के क्षणों में खेलती थी मेरे संग ताश
जाने कहाँ खो गयी है वो उँगलियाँ ,मुझे है उनकी तलाश
सुना है वो व्हाट्सएप और फेसबुक की बिमारी से ग्रस्त है
और दिनरात मोबाईल को थामे हुए ,उसी में रहती मस्त है
उन्हें क्या मालूम है मेरा क्या हाल हो गया है उनके बिन
कोई उनका ये भूत उतार दे और लौटा दे मेरे बीते हुए दिन

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Monday, July 15, 2019

प्यार करो तुम 'स्टाइल 'से

इश्क़ नहीं आसान जरा भी ,
ये तो है एक आग का दरिया
इसमें डूबो ,तब जानोगे ,
तकलीफें होती है क्या क्या
मुश्किल बहुत पटाना लड़की ,
कई बेलने पड़ते पापड़
उसके  घर के और गलियों के ,
कई लगाने पड़ते चक्कर
अपनी चाह प्रकट करने का
कोई खोजना होगा रस्ता
,प्रेम प्रदर्शन करना होगा ,
लेकिन आहिस्ताआहिस्ता
उसके मन को मोहित करने ,
के उपाय अपनाने होंगे
प्रेम नीर से सींचों उपवन  
तब ही पुष्प सुहाने होंगे
कई जतन करने पड़ते है ,
यार मिला करता मुश्किल से
इसीलिये यदि प्यार करो तो ,
प्यार करो तुम स्टाइल से

लड़की होती है शरमीली ,
धीरे धीरे हाथ आएगी  
जल्दी जल्दी अगर करोगे ,
तो वो शायद भड़क जायेगी
जैसी तड़फ तुम्हारे दिल में ,
उतनी उसमे भी जगने दो
थोड़ी थोड़ी आग मिलन की
उसके दिल में भी लगने दो
उसका हृदय जीतना होगा ,
धीरे धीरे ,नहीं एकदम
मत बरसो घनघोर घटा से ,
बरसो तुम सावन से रिमझिम
अगर प्यार के मीठे फल का ,
सच्चा स्वाद तुम्हे है चखना
तो फिर उसके पक जाने तक ,
तुम्हे पड़ेगा धीरज रखना
समय लगेगा ,किन्तु लगेगी ,
तुम्हे चाहने ,सच्चे दिल से
इसीलिये यदि प्यार करो तो ,
प्यार करो तुम स्टाइल से

टाइम लगता ,आसानी से ,
नहीं कोई लड़की पटती है
उसके मन की झिझक हमेशा ,
धीरे धीरे ही घटती है
तुम्हे प्रतीक्षा करनी होगी ,
झटपट की मत करना गलती
तुम उतावले हो जाते हो ,
वो न पिघलती इतनी जल्दी
दे उपहार ,उसे बहलाओ ,
उसकी जुल्फों को सहलाओ
दिल में घुसो ,नयन द्वारे से ,
'आई लव यू 'उससे कहलाओ
इतनी मन में आग लगा दो ,
कि वह भी हो जाय दीवानी
मिलन प्रेमियों का हो जाए ,
हो सुखांत यह प्रेमकहानी
लाये दिवाली फिर जीवन में ,
प्रेम दीप ,अपनी झिलमिल से
अगर प्यार करना है तुमको ,
प्यार करो तुम स्टाइल से

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
 
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Sunday, July 14, 2019

【SEAnews:India Front Line Report】 July 11, 2019 (Thu) No. 3934

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Latest Top News(vol.190710)
(最新ニュース 33件)
2019-07-10 ArtNo.46517(1/33)
◆大阪G20モディト・トランプ会談、印米関係促進ロードマップ提供




【ニューデリー】騒々しく、また持続的で刺々しい挑戦が控えているにしろ、先週の大阪におけるG20会議の間に実現したナレンドラ・モディ首相とドナルド・トランプ大統領の会談を契機にインドと米国の二国間関係には、明らかにポジティブな動向が生じた。
○5G技術開発では他国との提携が不可欠、それは中国か?
○米国、パキスタンを完全に除外した新インド太平洋地域戦略提起
○日印、モディ安倍会議に先立って初の2+2協議(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46518(2/33)
◆大阪G20 莫迪-特朗普会谈,提供促进印美关系的路线图




【新徳里】尽管喧嚣的起步并棘手挑战将继续下去,总理纳伦徳拉·莫迪和总统唐纳徳·特朗普上周在大阪20国集团会议中见面以来在印度与美国的关系上已经产生了一个明显积极的轨迹。
○在开发5G技术方面必须建立伙伴关系,是中国吗?
○美国,提起完全排除巴基斯坦的新印度太平洋区域战略
○印日,在莫迪安倍会议之前举办第一次2+2会谈(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46519(3/33)
◆Modi-Trump meet at Osaka G20 provides a road map to moving Indo-US relations forward




【New Delhi】Despite a noisy run-up and continuing, thorny challenges, the Indo-US relationship has emerged from last week's G-20 meeting in Osaka between Prime Minister Narendra Modi and President Donald Trump with a decidedly positive trajectory.
○India has to forge partnerships in developing 5G technology. Will it be China?
○New US strategy excludes Pakistan
○India-Japan maiden 2+2 talks ahead of Modi-Abe meeting(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46520(4/33)
◆モディ首相が目指す5兆ドル経済とは




【ニューデリー】ナレンドラ・モディ首相は6月15日に催された政府直属のシンクタンク『インド改造全国評議会(NITI Aayog:National Institution for Transforming India Aayog)』の会合で、2024年までにインド経済を5兆米ドルに拡大する目標を提起した。
○5兆ドル経済目標を達成するためにもオウン・ゴール回避を
○インドは5兆ドル経済を実現できるか(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46521(5/33)
◆莫迪总理标榜的5亿美元经济是什么样子




【新徳里】印度政府的主要政策智囊团『全国改革印度学会(NITI Aayog:National Institution for Transforming India Aayog)』在5月15日举办的会议上,纳伦徳拉·莫迪总理提起到2024年底之前将印度经济扩展到5亿美元的目标。
○要实现5亿美元经济目标,那么必须回避乌龙球
○印度能否成为5万亿美元的经济体?(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46522(6/33)
◆What a $5 trillion economy would look like




【New Delhi】At the meeting of the Governing Council of the NITI Aayog on June 15, Prime Minister Narendra Modi announced the target of a $5 trillion economy for India by 2024.
○To achieve its '$5-trn economy' goal, India must stop scoring own goals
○Can India become a $5 trillion economy? (...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46523(7/33)
◆新予算案は農業所得倍増目指す長期農業政策に照準




【ニューデリー】近く上程される2019年度予算案には、農業部門に対する各種施策が盛り込まれるものと見られる。報告書によれば、2022年までに農業所得を倍増させるという目標を達成するため、政府は投資目的の長期借入にインセンティブを提供する必要もありそうだ。インド国立銀行(SBI:State Bank of India)はその調査報告書エコラップにおいて、「農業部門の資本形成は著しく停滞している」と述べている。
○デジタル・テックで農業所得倍増支援(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46524(8/33)
◆新年预算可能侧重于长期农业措施,以使农民收入翻倍




【新徳里】即将到来的2019年联邦预算案被预料为农业部门提供大量措施。根据报告,为了实现到2022年前农业收入翻番的目标,政府似乎还需要在即将到来的预算中为投资目的农业贷款提供奖励。印度国家银行(SBI:State Bank of India)在其研究报告Ecowrap中说「农业部门,资本形成明显地停滞不前。」
○数字技术帮助农民的收入増加一倍(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46525(9/33)
◆Budget 2019 may focus on long-term agricultural measures to double farmers' income




【New Delhi】The coming Union Budget 2019 may see a plethora of measures for the agriculture sector. In order to achieve the objective of doubling farm income by 2022, the government also needs to provide an incentive to agri term loans for investment purpose in the upcoming budget, the report said. The capital formation in agriculture has significantly stagnated, SBI said in its research report Ecowrap.
○Digital tech to help in doubling farmers' income(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46526(10/33)
◆中銀、電子マネーを現金に転換する小売り店網構築目指し専門委設置




【ムンバイ】ナンダン・ニレカニ氏に率いられるハイレベルの専門委員会は、中央銀行が、郊外のタウン・センターで電子マネーを現金に転換するキャッシュ・ポイントとして機能する一群の地元事業者や小売り店舗を選任するよう提案した。
○中央銀行、デジタル決済インフラ大幅拡張を議題に乗せる可能性検討
○銀行、現金還流業者利用し、手数料引き上げ待つ(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46527(11/33)
◆央行,设立专委会而研究将电子货币兑换成现金的当地零售店网的可行性




【孟买】由南丹•尼勒卡尼(Nandan Nilekani)先生领导的高级委员会已建议中央银行应该选任一群当地商务人士和零售店作为在郊区城镇中心将电子货币转换成现金的所谓的现金点(cash points)。
○央行考虑将重大扩展数字付款基础设施课题列入议程的可能性
○银行利用现金环流商,等待交换费上调(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46528(12/33)
◆RBI formed panel suggests roping in local retailers to act as cash points




【Mumbai】A high-level Nandan Nilekani-led panel has suggested the RBI rope in local business correspondents and local retail stores to act as cash points in semi-urban centres.
○RBI study moots boost to acceptance infra for digital payments
○Banks use cash recyclers, wait for hike in interchange fee (...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46529(13/33)
◆インド有権者、モディ首相にハイファイブ




【ニューデリー】インド人民党(BJP)は、第七回国会下院選挙において自らの牙城のインド北部に加え、西ベンガル州とオリッサ州でも大躍進し、同党だけで300議席以上を確保、ナレンドラ・モディ首相は、二期目の航海に乗り出した。
○2019年下院選挙結果は、宗教的分裂深刻化の現れ(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46530(14/33)
◆印度选民在第七届下院大选中给莫迪击掌




【新徳里】纳伦徳拉·莫迪总理在第七届国会下院大选中,除了在印度北部确保自己的堡垒之外,在西孟加拉州和奥里萨州取得了重大进展,仅仅人民党(BJP)而已已经获得300以上的议席,而启动第二任期的航行。
○2019年大选结果是宗教分裂深化的表现(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46531(15/33)
◆India gives Modi a high five




【New Delhi】Making major gains in West Bengal and Odisha while holding his own in northern India, Prime Minister Narendra Modi cruised to a second term in office, with the BJP alone looking set to win just over 300 seats in the seven-phase Lok Sabha election.
○The 2019 verdict is a manifestation of the deepening religious divide in India 【New Delhi】It (...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46532(16/33)
◆パキスタンのモディ・ジレンマ




【イスラマバード】モディ首相の先月のインド総選挙における劇的勝利により、パキスタンのインドとの緊張関係は大幅に緩和された。
○『無関与』
○『選択的関与』
○『制約』
○パキスタンの『核開発の父』カーン氏の回顧(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46533(17/33)
◆巴基斯坦的莫迪困境




【伊斯兰堡】随着莫迪总理在上个月的印度大选中取得了惊人的胜利,巴基斯坦与印度的紧张关系已经大大缓解。
○『无参与』
○『选择性参与』
○『约束』
○巴基斯坦核武之父汗先生的回忆(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46534(18/33)
◆Pakistan's Modi dilemma




【Islamabad】With Prime Minister Modi's spectacular win in the Indian general elections last month, Pakistan's fraught relations with India have been thrown into sharp relief.
○"Disengagement"
○Selective engagement
○"Constrainment"
○'Father of Pakistan's Nuclear Development' Mr. Khan's reminiscence (...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46535(19/33)
◆インド、パキスタンの二国間交渉再開提案を受諾:ソース




【イスラマバード】消息筋が地元パキスタンのジオ・ニュースに6月20日、語ったところによると、インドのナレンドラ・モディ首相は、パキスタンのイムラン・カーン首相のカシミール問題を含む全ての問題に関する二国間協議を再開する提案を受け入れた。
○二国間協議再開要請は受けていない:インド
○インド、パキスタンにカルタープール回廊問題協議提案(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46536(20/33)
◆印度接受恢复印巴双边谈判提案:来源




【伊斯兰堡】消息人士于6月20日告诉巴基斯坦的地理新闻(Geo News)说,印度总理纳伦徳拉·莫迪接受了巴基斯坦总理伊姆兰·汗的恢复克什米尔问题在内的所有课题的双边会谈的提议。
○没有受到重开双边会谈的提议:印度
○印度关于卡尔塔尔普尔走廊问题向巴基斯坦提议会谈(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46537(21/33)
◆India accepts PM Imran's offer for talks: sources




【Islamabad】Indian PM Narendra Modi has accepted PM Imran Khan's offer for resumption of talks between the two countries on all issues including Kashmir, sources told Geo News on June 20.
○No request for talks with Pakistan: India
○India proposes meeting with Pakistan on Kartarpur Corridor(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46538(22/33)
◆資金洗浄監視機関、パキスタンにテロ組織融資抑止遵守勧告




【オーランド】国際的な資金洗浄監視機関『マネーロンダリングに関する金融活動作業部会(FATF:Financial Action Task Force)』は6月21日、パキスタンに対し10月までに国際行動計画合意書に基づきテロ組織に対する金融抑止環境を改善するよう求め、同指示に従わない場合には制裁を科すと警告した。
○パキスタン、FATFブラックリスト入り回避
○パキスタン、本国送還者に対する死刑廃止(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46539(23/33)
◆全球监管机构警告巴基斯坦到10月前遵守威慑恐怖主义金融行动计划




【奥兰多】国际性货币洗钱管理机构『反洗钱金融行动特别工作组(FATF:Financial Action Task Force)』于6月21日向巴基斯坦警告说「到10月前改善其威慑恐怖组织金融的环境,否则将面临制裁。」
○巴基斯坦避免被列入FATF黒名单
○巴基斯坦撤销被遣返人的死刑(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46540(24/33)
◆Global watchdog give Pakistan until October to curb terror financing




【Orlando】Pakistan has until October to improve its counter-terror financing operations in line with an internationally agreed action plan or face actions against it, a global watchdog said on June 21.
○Threat of FATF blacklist averted
○Pak to revoke capital punishment for extradited people(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46541(25/33)
◆パキスタン、米国とアフガン紛争の政治的解決で合意




【イスラマバード】タリバーンが「イード停戦はない。ラマダン(断食月)が終わっても戦闘を継続する」と発表した直後の日曜日、パキスタンは、警戒を喚起する一方で、全ての関係方面に政治決着を通じ長期にわたる紛争を終結させる機会をつかむよう呼びかけた。
○パキスタン、アフガン内対話の必要性強調
○カーン首相、防衛予算を自主的に削減した軍を称賛(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46542(26/33)
◆巴基斯坦和美国同意在政治上解决阿富汗冲突




【伊斯兰堡】塔利班(Taliban)宣布将不会有开斋节休战,即使拉马赞即将结束,他们也会继续战斗。不久巴基斯坦周日一方面呼吁警戒,不过的同时,敦促所有有关各方抓住通过政治解决办法来结束长期冲突的机会。
○巴基斯坦强调需要阿富汗内部对话来结束战争
○汗总理称赞军方自愿削减国防预算(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46543(27/33)
◆Afghan conflict: Pakistan, US agree on political settlement




【Islamabad】Soon after the Taliban announced that there would be no Eid truce and they would continue to fight even as Ramazan was coming to a close, Pakistan on Sunday advised caution and said it encouraged all sides to seize the moment to end the prolonged conflict through a political settlement.
○Pakistan stresses need for intra-Afghan dialogue to end war
○PM Imran Khan lauds Pakistan Military for voluntarily cutting defence budget(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46544(28/33)
◆スリランカ、停職警察長官と元国防次官を逮捕




【コロンボ】スリランカの停職中の警察長官と前国防次官が7月4日、260人近くが犠牲になった復活祭(Easter Sunday)爆弾テロを予防できなかった廉で刑事捜査局(CID:Criminal Investigation Department)に逮捕された。
○復活祭テロ事件を審理する最高裁判事7人を指名
○スリランカ情勢は既に危殆:イスラム協力機構大使(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46545(29/33)
◆斯里兰卡当局,逮捕了被停职的警察总长和前国防次长




【科伦坡】斯里兰卡被停职的警察总长和前国防部常务秘书于7月4日被刑事调查局(CID:Criminal Investigation Department)逮捕,因为他们涉嫌未能阻止造成近260人死亡的复活节爆炸事件。
○提名七位最高法院法官以审理复活节恐怖袭击事件
○斯里兰卡局势非常担忧:伊斯兰会议组织特使(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46546(30/33)
◆Sri Lanka's suspended police chief, ex-Defence Secretary arrested




【Colombo】Sri Lanka's suspended police chief and former Defence Secretary were on July 04 arrested by the Criminal Investigation Department for their alleged failure to prevent the Easter Sunday bombings that claimed nearly 260 lives.
○CJ nominates seven-judge-bench to hear Easter Sunday FR petitions
○Sri Lanka situation 'extremely worrying', say OIC envoys(...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46547(31/33)
◆《新刊》キリスト教の起源:契約の民の流浪史




[序文]

 チグリス川とユーフラテス川に挟まれたメソポタミアからパレスチナにかけた地域には、古くから農耕民と遊牧民が共生する都市国家が興亡して来た。大部分の都市国家の主役は農耕民だったが、遊牧民は、西方のエジプトのみならず東方のインドや中国とも交易し、異文化融合の触媒を務めて来た。
[序文]
[ハイライト]
○文書仮説
○パウルス一族
○贖罪信仰の起源
○聖霊のバプテスマ(因縁所生)
○棕櫚の行進
○『申命記』成立の経緯
[第六版謝辞と発刊の経緯]
[第一版謝辞]
[著者略歴](...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46548(32/33)
◆《新书》基督教的起源:盟约之民的史诗故事




 从底格里斯-幼发拉底两条河流之间的美索不达米亚到巴勒斯坦的地区,自古以来农业民族和游牧民族共同生活的城邦兴亡。在大多数的这些城市里农业民族扮演主角。
[前言]
[亮点(Highlights)]
○底本说(Documentary Hypothesis)
○保罗斯家属
○赎罪信仰的起源
○圣灵的施洗(因缘所生)
○骑驴进耶路撒冷
○《申命记》诞生的经过
[第六版谢辞]
[第一版谢辞]
[作者简历](...Read more)
2019-07-10 ArtNo.46549(33/33)
◆New book:The origin of Christianity: An Epic Tale of the People of the Covenant




 In the region from Mesopotamia situated within the Tigris–Euphrates river to Palestine, city states, where agricultural and nomadic people had lived together, have risen and fallen since ancient times. The agricultural people played leading role in the most of these city states. However, the nomads traded not only with Egypt in the west but also with India and China in the east and served as catalysts for cross-cultural fusion.
[Preface]
[Highlights]
○Documentary hypothesis
○Paulus' family
○The origin of "Faith of Atonement"
○The baptism of the Holy Spirit (Born of causes and conditions)
○Jesus' Triumphant Entry of Jerusalem
○The story of the birth of Deuteronomy
[Acknowledgement for the sixth edition]
[Acknowledgements for the first edition]
[Notes about the Author] (...Read more)
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Saturday, July 13, 2019

ये दिल बड़ा आशिक़ मिज़ाज है

चेहरे पर शराफत है
लोगों में इज्जत है
पर ऐसी फितरत है
ताकझांक की आदत है  
दिखती हुस्न की दौलत है
कर बैठता मोहब्बत है
कितना ही समझाओ ,नहीं आता बाज है
ये दिल ,बड़ा आशिक़ मिजाज है
 
बुढ़ापे का दौर है
नज़रें कमजोर है
मगर हुस्न खोर है
मिलता चितचोर है
होता रसविभोर हो
मांगने लगता मोर है
जाल फेंकने लगता ,बड़ा जालसाज़ है
ये दिल बड़ा आशिक़ मिज़ाज है

हुस्न को देख कर
हो जाता बेसबर
उछलता इधर उधर
जैसे लग जाते पर
मचलता है जिद कर
पाने को जाता अड़
इसकी आशिकी का ,निराला अंदाज है
ये दिल बड़ा आशिक़ मिज़ाज है

मीठी सी बोली है
बातें रस घोली है  
सूरत भी भोली है
फैलाता झोली है
अगर प्रीत हो ली है
सच्चा हमजोली है
लूट जाता ,मिट जाता ,मोहब्बत पे नाज़ है
ये दिल ,बड़ा आशिक़ मिजाज है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
कांवड़ -जल संरक्षण

शिवजी के मस्तक पर ,है जिसका उदगम
उस गंगा के जल को ,कावड़ में भर कर हम
शिवजी के मस्तक पर ,करते है समर्पण
ये है जल संरक्षण का कितना अच्छा उदाहरण
स्रोतों को पुनः जल प्लावित कर ,करें जलसंचयन

घोटू 
हे भगवान ,आप  इतने सोते क्यों हो ?

हे परमपिता ,आप तो सबके पालनकरता  है
आप ही  की कृपादृष्टि  से सबका पेट भरता है
हे जगन्नाथ
आप चौबीसो घंटे रहते हो ड्यूटी पर तैनात
निश्चित ही थक जाते होंगे
परेशान  हो कर पक जाते होंगे
इसलिए गर्मियों की फसल कट जाने के बाद ,
जब अन्न का भण्डारण हो जाता है घर घर
तब  थोड़े से बेफ़िकर होकर
आप भी सोचते होंगे ,अभी कम है काम
कर लू थोड़ा सा आराम
यही सोच कर हे कमल नयन
आप चले जाते है करने को शयन
ठीक है ,थोड़ा आराम तो वाजिब है ,
पर आप तो लेटते ही ऐसे सपनो में खोते है
कि एक दो दिन नहीं ,
देव शयनी एकादशी से ,देवउठनी  एकादशी तक,
पूरे चार माह तक सोते है
चार माह की लम्बी नींद ,
प्रभुजी ये तो 'टू मच 'है
कुम्भकरण भी इतना नहीं सोता होगा ,ये सच है
आप जैसा रिस्पोंसिबल देवता ,
क्या इतनी लम्बी नींद सोता है
क्या आपको पता है ,
आप जब सोते है ,क्या क्या होता है
आप जब सो जाते है
कोई भी शुभ काम नहीं हो पाते है
न शादी न विवाह
कंवारे भरते है आह ,
लोगों में असंतोष बढ़ता है
आपके सोने से ,
शादी करके साथ साथ सो सकने वाले ,
संभावित जोड़ों को अकेला सोना पड़ता है
जैसे स्कूल में  अध्यापक जब छुट्टी पर जाते है
 तो कक्षा के बच्चे मस्ती और मौज मनाते है
इसी तरह उधर आप  सोते है माह चार
लोग मनाते है खूब त्यौहार
गुरु लोग ,अपनी पूजा करवा लेते है
गुरुपूर्णिमा मना लेते है
और शिवशंकर ,
भक्तों से कांवड़ में भरवा कर गंगाजल
अपने ऊपर चढ़वा लेते है
  जल का भंडारण करवा लेते है
उधर आप शेषनाग की शैया पर सोये होते है ,
इधर नागपंचमी मन जाती है
हरियाले मौसम में हरियाली तीज आती है
मन जाता है रक्षाबंधन,भाईबहन के प्यार का त्योंहार
जन्मष्टमी को आप  ले लेते है कृष्णावतार
और राधाष्टमी को राधारानी भी प्रकट हो जाती है
पंद्रह दिन का श्राद्धपक्ष और
नौ दिन की नवरात्रि आती है
विजयादशमी को आपके अवतार राम ,
रावण का हनन करके सीता को छुड़ा लाते है
 शरद पूर्णिमा को आपके अवतार श्रीकृष्ण ,
गोपियों संग रास रचाते है
करवा चौथ पर सुहागिने व्रत कर के ,
अपने पति की लम्बी उमर का वरदान पाती है
और तो और आपकी पत्नी लक्ष्मीजी
आपको छोड़कर ,दीवाली पर ,
सबसे अपना पूजन करवाती है
अन्नकूट होता है ,सूर्यषष्ठी होती है
और गोवर्धन की भी पूजा होती है
मतलब हरदिन ,
कुछ न कुछ त्योंहार मनाये जाते है
आपके सोये रहने का  लोग पूरा मजा  उठाते है
हे  परमेश्वर ,हम सब आपकी संताने है
नित्य काम करते है और आराम भी करते है नित्य
यही प्रकति  का नियम है ,
तो हमारी समझ में नहीं आता ,
आपके चार माह लगातार सोने का औचित्य
आज जरूरी आपको ये बताना है
क्या ये आपकी कोई लीला है ,
या लक्ष्मीजी से पेअर दबवाने का बहाना है
ऐसे हालात होते क्यों है  
हे भगवान ,आप इतने दिन सोते क्यों है ?

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Thursday, July 11, 2019

कॉम्पिटिशन

समझ न पड़ता ,किस रस्ते पर ,आज जमाना आमादा है
काम  भले ही कम होता है ,पर कॉम्पिटिशन  ज्यादा  है
कल बीबीजी का खत आया ,दो पन्नो में ,सौ अक्षर थे
उनमे भी आधे से ज्यादा ,प्यारे प्रियतम या डिअर थे
उनकी एक मैरिड बहन है ,हुआ बरस भर ही शादी को
मगर  चीन से लड़ने के हित  बढ़ा रही है आबादी  को
तो मेरी उन सालीजी और बीबी में कॉम्पिटिशन  है
किसका पति ज्यादा अच्छा ,किसमें लेटर लिखने का फ़न है
सौ बार भले ही नाम हमारा लिखदो पर लम्बा हो लेटर
अबके से मैं ही जीतूंगी ,अबके से हारेगी सिस्टर
तो अब बढ़ गयी भैया ,कॉम्पिटिशन तगड़ा होगा
दूर तमाशा देखे मुर्गी ,अब मुर्गो में झगड़ा होगा
मैंने साफ़ लिख दिया उनको ,जो तुम झगड़ो चीज चीज में
तुम जानो और काम तुम्हारा जाने मैं क्यों पडूँ बीच में
आज बात लेटर की ही है ,जाने कल बाजी लग जाए
देखें उनमे अब से पहले ,मौसी किसको कौन बनाये
बात औरतों की है भैया कौन खबर कल फिर बढ़ जाए
वो जीते जो सबसे पहले ,फूटबाल की टीम बनाये
फिर भी बात मान बीबी की ,लम्बा खत लिखने बैठा हूँ
देती दूध गाय की लात सहूंगा ,बनिए का बेटा हूँ
क्षमा कीजिये श्रीमती जी ,यदि लेटर में कुछ गलती है
क्योंकि लम्बा खत लिखना है ,इसीलिये कविता लिख दी है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
दो सौ दिन और दो सौ रातें


मुझको छोड़ अकेला घर में
गयी परीक्षा के चक्कर में
बीबीजी ने बी ए कर लिया ,पर आने का नाम नहीं था
इम्तहान मेरे धीरज का ,ये उनका इम्तहान नहीं था

उनके मन में डिग्री पाने की बस एक चाह थी केवल
मैंने उन्हें केजुअल छुट्टी ,दी थी एक माह की केवल
लेकिन बार बार एक्सटेंशन को उनने अप्लाय कर दिया
मेरे सभी तार और चिट्ठी ,को बस नो रिप्लाय  कर दिया
और कैजुअल छुट्टी को जब ,अर्नलीव  उनने कर डाला
एक बार यूं लगा पड़ गया है मेरी किस्मत पर ताला
मुझे न सिर्फ विरह की पीड़ा ,खाने की भी तो दिक्कत थी
सूना सूना घर लगता था  चली गयी घर की रौनक थी
लेकिन तीर धनुष से छूटा ,लौट आना आसान नहीं था
इम्तहान मेरे धीरज का ,ये उनका इम्तहान नहीं था

गए राम वनवास मगर क्या वो सीता को छोड़ सके थे
पांडव गलने गए ,द्रौपदी से पर क्या मुख मोड़ सके थे
किसको कौन छोड़ता है जी ,रावण जब सीता ले भागा
हुआ भयंकर युद्ध ,राम ने ,अरे समंदर भी था लांघा
लेकिन मेरा धीरज देखो ,देखो मेरी मर्यादा  को
रहा अकेला बिन बीबी के ,सात माह से भी ज्यादा को
सात माह किसको कहते है ,दो सौ दिन और दो सौ रातें
जी हाँ मैं इसका सबूत हूँ ,मैंने स्वयं अकेले काटे
सच बतलाना मुझको क्या यह ,मेरा त्याग महान नहीं था
इम्तहान मेरे धीरज का ,ये उनका इम्तहान नहीं था

कोई मेरे दिल से पूछे ,कैसे महीने सात गुजारे
मैं उन बिन कितना तड़फा हूँ ,रात गुजारी गिन गिन तारे
एक एक दिन महीने सा था ,बरस बरस सी रात लगी थी
प्राणप्रिया बिन जिया ,जिंदगी मुझको बड़ी अनाथ लगी थी
यही ख़ुशी है ,इस जुदाई में ,थोड़ा पैसा जोड़ सका हूँ
उनकी धमकी से न डर सकूं ,खुद को ऐसा मोड़ सका हूँ
वैसे भी मैं रहा लाभ में ,बनिए का  बेटा हूँ भाई  
गयी अकेली ,ब्याज सहित वो ,दो होकर के वापस आयी
यही मिला है फल धीरज का ,इसमें भी नुक्सान नहीं था
इम्तहान मेरे धीरज का ,ये उनका इम्तहान नहीं था

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Wednesday, July 10, 2019

रिश्ते

न तेरे हुस्न में बाकी वो करारापन है
न मुझमे बेकरारी और वो बावलापन है
होगये इतने बरस ,हमने निभाये रिश्ते ,
आज भी संग है,खुश है,भला ये क्या कम  है

बीच में कितने ही झगडे हुए ,तकरार हुई ,
हममे से कोई झुका अपना अहम छोड़ दिया
हमारे रिश्तों में जब जब पड़ी दरार कोई ,
उसे सीमेंट से समझौते की ले  जोड़ दिया
कभी ठन्डे थे कभी गर्म ,कभी बरसे  भी ,
अपने रिश्ते रहे ,जैसे बदलता  मौसम है
हो गए इतने बरस ,हमने निभाये रिश्ते ,
आज भी संग है ,खुश है ,भला ये क्या कम है

ख्वाइशें सभी के मन में हजारों होती है ,
नहीं जरूरी है कि सब की सब ही हो पूरी
कोई संतुष्ट नहीं रहता सदा जीवन में ,
कुछ न कुछ तो कहीं पे आ ही जाती मजबूरी
जो भी मिल जाए ,मुकद्दर समझ के खुश हो लो,
कभी है जिंदगी में खुशियां तो कभी गम है
हो गए इतने बरस ,हमने निभाए रिश्ते    ,
आज भी संग है ,खुश है भला ये क्या कम है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '