Saturday, July 13, 2019

ये दिल बड़ा आशिक़ मिज़ाज है

चेहरे पर शराफत है
लोगों में इज्जत है
पर ऐसी फितरत है
ताकझांक की आदत है  
दिखती हुस्न की दौलत है
कर बैठता मोहब्बत है
कितना ही समझाओ ,नहीं आता बाज है
ये दिल ,बड़ा आशिक़ मिजाज है
 
बुढ़ापे का दौर है
नज़रें कमजोर है
मगर हुस्न खोर है
मिलता चितचोर है
होता रसविभोर हो
मांगने लगता मोर है
जाल फेंकने लगता ,बड़ा जालसाज़ है
ये दिल बड़ा आशिक़ मिज़ाज है

हुस्न को देख कर
हो जाता बेसबर
उछलता इधर उधर
जैसे लग जाते पर
मचलता है जिद कर
पाने को जाता अड़
इसकी आशिकी का ,निराला अंदाज है
ये दिल बड़ा आशिक़ मिज़ाज है

मीठी सी बोली है
बातें रस घोली है  
सूरत भी भोली है
फैलाता झोली है
अगर प्रीत हो ली है
सच्चा हमजोली है
लूट जाता ,मिट जाता ,मोहब्बत पे नाज़ है
ये दिल ,बड़ा आशिक़ मिजाज है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
कांवड़ -जल संरक्षण

शिवजी के मस्तक पर ,है जिसका उदगम
उस गंगा के जल को ,कावड़ में भर कर हम
शिवजी के मस्तक पर ,करते है समर्पण
ये है जल संरक्षण का कितना अच्छा उदाहरण
स्रोतों को पुनः जल प्लावित कर ,करें जलसंचयन

घोटू 
हे भगवान ,आप  इतने सोते क्यों हो ?

हे परमपिता ,आप तो सबके पालनकरता  है
आप ही  की कृपादृष्टि  से सबका पेट भरता है
हे जगन्नाथ
आप चौबीसो घंटे रहते हो ड्यूटी पर तैनात
निश्चित ही थक जाते होंगे
परेशान  हो कर पक जाते होंगे
इसलिए गर्मियों की फसल कट जाने के बाद ,
जब अन्न का भण्डारण हो जाता है घर घर
तब  थोड़े से बेफ़िकर होकर
आप भी सोचते होंगे ,अभी कम है काम
कर लू थोड़ा सा आराम
यही सोच कर हे कमल नयन
आप चले जाते है करने को शयन
ठीक है ,थोड़ा आराम तो वाजिब है ,
पर आप तो लेटते ही ऐसे सपनो में खोते है
कि एक दो दिन नहीं ,
देव शयनी एकादशी से ,देवउठनी  एकादशी तक,
पूरे चार माह तक सोते है
चार माह की लम्बी नींद ,
प्रभुजी ये तो 'टू मच 'है
कुम्भकरण भी इतना नहीं सोता होगा ,ये सच है
आप जैसा रिस्पोंसिबल देवता ,
क्या इतनी लम्बी नींद सोता है
क्या आपको पता है ,
आप जब सोते है ,क्या क्या होता है
आप जब सो जाते है
कोई भी शुभ काम नहीं हो पाते है
न शादी न विवाह
कंवारे भरते है आह ,
लोगों में असंतोष बढ़ता है
आपके सोने से ,
शादी करके साथ साथ सो सकने वाले ,
संभावित जोड़ों को अकेला सोना पड़ता है
जैसे स्कूल में  अध्यापक जब छुट्टी पर जाते है
 तो कक्षा के बच्चे मस्ती और मौज मनाते है
इसी तरह उधर आप  सोते है माह चार
लोग मनाते है खूब त्यौहार
गुरु लोग ,अपनी पूजा करवा लेते है
गुरुपूर्णिमा मना लेते है
और शिवशंकर ,
भक्तों से कांवड़ में भरवा कर गंगाजल
अपने ऊपर चढ़वा लेते है
  जल का भंडारण करवा लेते है
उधर आप शेषनाग की शैया पर सोये होते है ,
इधर नागपंचमी मन जाती है
हरियाले मौसम में हरियाली तीज आती है
मन जाता है रक्षाबंधन,भाईबहन के प्यार का त्योंहार
जन्मष्टमी को आप  ले लेते है कृष्णावतार
और राधाष्टमी को राधारानी भी प्रकट हो जाती है
पंद्रह दिन का श्राद्धपक्ष और
नौ दिन की नवरात्रि आती है
विजयादशमी को आपके अवतार राम ,
रावण का हनन करके सीता को छुड़ा लाते है
 शरद पूर्णिमा को आपके अवतार श्रीकृष्ण ,
गोपियों संग रास रचाते है
करवा चौथ पर सुहागिने व्रत कर के ,
अपने पति की लम्बी उमर का वरदान पाती है
और तो और आपकी पत्नी लक्ष्मीजी
आपको छोड़कर ,दीवाली पर ,
सबसे अपना पूजन करवाती है
अन्नकूट होता है ,सूर्यषष्ठी होती है
और गोवर्धन की भी पूजा होती है
मतलब हरदिन ,
कुछ न कुछ त्योंहार मनाये जाते है
आपके सोये रहने का  लोग पूरा मजा  उठाते है
हे  परमेश्वर ,हम सब आपकी संताने है
नित्य काम करते है और आराम भी करते है नित्य
यही प्रकति  का नियम है ,
तो हमारी समझ में नहीं आता ,
आपके चार माह लगातार सोने का औचित्य
आज जरूरी आपको ये बताना है
क्या ये आपकी कोई लीला है ,
या लक्ष्मीजी से पेअर दबवाने का बहाना है
ऐसे हालात होते क्यों है  
हे भगवान ,आप इतने दिन सोते क्यों है ?

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '