Friday, June 3, 2011

बाबा! मान जाओ ना,

बाबा! मान जाओ ना,
भ्रष्टाचार  के विरुद्ध अनशन कर ,
क्यों कर  रहे हमें तंग हैं,
कैसे छोड़ दें ये आचार,
अरे ये तो राजनीती का अभिन्न अंग है
आपने कहा,धीरे धीरे साँस लो और छोडो,
हमने किया
आपने कहा एक तरफ से साँस लो,
और दूसरी तरफ से छोडो,
हमने किया
और अब आप ऐसी चीज छोड़ने को कह  रहे है,
की जिससे हमारी साँस ही रुक  जाएगी
हज़ार,पांच सो के नोट तो,
 हमारे बिस्तर के नीचे बिछे रहते हैं,
ये ही बंद हो गए ,
तो हमें नींद कैसे आएगी ?
आप विदेशों से कालाधन ,
मंगाने के लिए,नंगे बदन,
सत्याग्रह करेंगे,योग सिखायेंगे
अगर हम आपकी ये बात मान लें
तो हममें से कितने ही नंगे हो जायेंगे
बाबाजी, क्यों हमें बाबा बनाने पर तुले हो



,कृपा कर के ,हमें बक्श दो,छोड़ दो
और अनशन पर जाने की जिद छोड़ दो

मदन मोहन बहती 'घोटू'