Sunday, June 19, 2011

गर्दभ कहे गदही से,

बैशाखनंदन ने,क्रंदन कर ,मन खोला,
                 रेंक गदही से बोला,प्यार मेरा सच्चा है
तू इतनी है प्यारी,चल चले मतवाली,
                 रूप तेरा अच्छा और गान तेरा अच्छा है
मुझे रोज करती तंग,धोबी के बेटे संग,
                 घाट चली  जाती है,दे जाती गच्चा है
गर्दभ कहे गदही से,आँख मूँद,कर जोड़,
                   सच सच बतला दे ना, तेरे मन में क्या है  

मदन मोहन बहेती'घोटू'

हाँ, हम भ्रष्ट है

हाँ, हम भ्रष्ट है
आपको क्या कष्ट है
जनता की भीड़ में,
भाषण देते हो,चिल्लाते हो
हमें भ्रष्टाचारी बताते हो
चुप रहा करो,
नहीं तो हम बता देंगे,
क्या  औकात है तुम्हारी
तुम्हे पता नहीं, हम है सत्ताधारी
कल ही हमारे प्रवक्ता,
डुगडुगीबजा कर ,
दुनिया को देंगे बता
की तुम्हारे दादा के दादा ने,
एक दलित लड़की को छेड़ा था
तुम्हारे दादा ने भी ,
किया कुछ बखेड़ा था
, तुम्हारे पिता ,जो मिठाई की दुकान चलाते थे
सिंथेटिक खोवा काम  में लाते थे
चोरी की चीनी की चासनी से,
जलेबी बनाते थे
तुम्हारी झोपड़ी में जो घांस लगायी गयी है
वो रिजर्व फोरेस्ट से चुरायी गयी है
हम इन आरोपों की जांच के लिए
 एक कमीशन भी बेठा देंगे
हमसे मत लो पंगा
जनता के बीच में,
हम को मत करो नंगा
वर्ना तुम नहीं जानते,
हम तुम्हारा जीना हराम कर सकते है
तुम्हारे हर आयोजन को,
चार जून का रामलीला मैदान कर सकते है


मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

फादर डे

फादर डे
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साल भर में
 एक दिन पिता का
एक दिन माता का,
उस दिन ,माता या पिता को,
धन्यवाद का कार्ड या भेंट देकर,
हो जाती कर्तव्य की पूर्ती है
अरे! ये तो विदेशी संस्कृति है
हमारे संस्कार तो,
हर पल ,हर दिन,
माँ बाप को समर्पित होना सिखाते है
फिर भी हम माता पिता का ऋण,
नहीं चुका पाते हैं
आज हम जो,
सांसें ले रहे है,
फलफूल रहे है,
खुशहाल और आबाद है
ये पिताजी की प्रेरणा और तपस्या है,
और माँ का आशीर्वाद है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'



शाश्वत सत्य

शाश्वत सत्य
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भारत की धर्मपरायण जनता,
जब श्रद्धा लुटाती है
मंदिर और मठों की,
साधू और संतों की
चांदी ही चांदी है
भक्त लोग गुरुओं पर,
श्रद्धा के पत्र पुष्प,
प्रेम से चढातेहैं
चमत्कार होता है,
ये  सारे पत्र पुष्प,
नोटों के बण्डल में ,
बदल बदल जाते है
अगर धर्म गुरुओं के,
सोने के कमरे में
मिलता जो सोना है 

अचरज क्यों होना है?

मंदिर के गर्भगृह में ,
मिलता यदि अरबों का खजाना है
तो क्यों चकराना है?
मगर इस जीवन का,
सत्य ये शाश्वत है
राजा हो,रानी हो
संत,गुरु,ज्ञानी हो
खाली हाथ आता है
खाली हाथ जाता है'
 मदन मोहन बाहेती'घोटू'