Thursday, May 25, 2023

बदला छोड़ो ,खुद को बदलो

 तुमने मुझ को गाली दी है,
 मैं भी तुमको गाली दूंगा 
 तुमने पीटा, मैं पीटूंगा,
  तुमसे पूरा बदला लूंगा 
  एक दूसरे के आगे हम ,
  लेकर के तलवार खड़े हैं 
  यही भावनाएं बदले की 
  युद्ध कराती बड़े बड़े हैं 
  इसीलिए तुम थोड़ा संभलो
  बदला छोड़ो, खुद को बदलो 
  
यदि जो तुम खुद को बदलोगे 
बदला बदला जगत लगेगा 
नफरत की बदली छट कर के
 प्यार भरा सूरज चमकेगा 
 सदभावों के फूल खिलेंगे ,
 जीवन की बगिया महकेगी 
 कांव-कांव का शोर हटेगा
  कुहू कुहू कोयल कूकेगी
  गुस्सा भूलो,थोड़ा हंस लो 
  बदला छोड़ो ,खुद को बदलो 
  
अपशब्द अगर कोई बोले 
चुपचाप सुनो ,मन शांत रखो 
कोई कितना भी उकसाये,
 व्यवहार मगर संभ्रांत रखो 
 कितनी भी विकट परिस्थितियां
  तुम्हारे जीवन में आए 
  तुम पार करोगे हर मुश्किल,
  विश्वास डगमगा ना पाये 
  मत अपने गले मुसीबत लो
बदला छोड़ो ,खुद को बदलो 

मदन मोहन बाहेती घोटू 
प्रेम संकेत 

तूने अपनी नजर झुका ली 
छाई कपोलों पर भी लाली 
बादल यह संकेत दे रहे ,
अब बारिश है होने वाली 

हल्की पवन, मंद मुस्काए 
आंख गुलाबी डोरे, छाये
ढलक गया सीने से आंचल,
लाज शर्म कुछ भी ना आए 
अंग अंग पर रंग चढ़ा है ,
हुई बावली ,तू मतवाली 
बादल यह संकेत दे रहे 
अब बारिश है होने वाली 

बढ़ी हुई है दिल की धड़कन 
हुआ मिलन को आतुर है मन 
सोंधी सोंधी खुशबू तन की ,
मौन,दे रही है आमंत्रण 
तन का रोम-रोम आनंदित,
 मन मस्ती ना जाए संभाली 
 बादल यह संकेत दे रहे ,
 अब बारिश है होने वाली

मदन मोहन बाहेती घोटू
नेत्रदान 

आंख मैंने दान कर दी, बस इसी उम्मीद से ,
मर के भी करता रहूंगा, हुस्न का दीदार मैं
करके आंखें चार ,कोई संग डूबूं प्यार में ,
और किसी की जिंदगी को कर सकूं गुलजार मैं

घोटू 
सात जन्म का साथ

मुझको पंडित जी ने बोला ,जो करेगा दान तू अप्सराएं स्वर्ग में पाएगा संगत के लिए 

मौलवी ने भी बताया करेगा खैरात तो 
तुझे जन्नत में मिलेगी हूरें खिदमत के लिए 

स्वर्ग पहुंचा तो खड़ी थी बीबी स्वागत के लिऐ,
स्वर्ग में भी,फिर वही,अफसोस था इस बात का 
बोली मैंने भी किया था दान ,आई हूं यहां ,
सात जन्मों का मुझे तुम संग निभाना साथ था 

घोटू 
जीवन संध्या 

सर की खेती उजड़ गई है 
तन की चमड़ी सिकुड़ गई है 
मुंह में दांत हो गए हैं कम 
आंखों से दिखता है मध्यम
 सहमी सहमी चाल ढाल है 
 याददाश्त का बुरा हाल है 
 नींद आती है उचट उचट कर 
 सोते, करवट बदल-बदल कर 
 बीमारी का जोर हुआ है 
 पाचन भी कमजोर हुआ है 
 कांटे वक्त नहीं है कटता 
 बार-बार मन रहे उचटता 
 हाथ पांव में बचा नहीं दम 
 थोड़ी मेहनत कर थकते हम 
 बढ़ा हुआ रहता ब्लड प्रेशर 
 मीठा खा लो, बढ़ती शक्कर 
 चाट पकोड़े खाना वर्जित 
 खाओ दवाई ,पियो टॉनिक 
 खेल बुढ़ापे ने है खेला 
 आई जीवन संध्या बेला 
 किंतु बुलंद हौसले फिर भी 
 मस्ती से हम जीते फिर भी

मदन मोहन बाहेती घोटू