Sunday, October 15, 2023

बोलो राम राम श्याम


एक हैं मेरे प्यारे राम

एक हैं मुरलीधर घनश्याम 

दोनों का में सुमरू नाम 

बोलो राम राम श्याम 


दोनों के दोनों अवतारी 

दोनों की छवि सुंदर प्यारी 

दोनों हरते कष्ट तमाम 

बोलो राम राम श्याम 


एक थे जन्मे बन रघुराई 

एकआये बन किशन कन्हाई

भाई लक्ष्मण और बलराम 

बोलो राम राम श्याम 


एक में रावण को संहारा 

एक ने मामा कंस को मारा 

सबको पहुंचा उस धाम 

बोलो राम राम श्याम 


एक की लीला वृंदावन में 

एक थे चौदह वर्षों वन में

लिया किसी ने नहीं विश्राम

बोलो राम राम श्याम 


एक थी कृष्णा बांके बिहारी 

एक राम जी अवध बिहारी 

मुक्ति देता दोनों का नाम 

बोलो राम राम श्याम 


एक थे चक्र सुदर्शन धारे 

एक थे तीरंदाज निराले 

दोनों के दोनों बलवान 

बोलो राम राम श्याम 


एक में सागर सेतु बनाया 

एक ने द्वारका नगर बसाया 

दोनों की छवि है अभिराम 

बोलो राम राम श्याम 


एक थे मर्यादा पुरुषोत्तम 

एक थे ज्ञानी और विद्वन 

दिया एक ने गीता का ज्ञान 

बोलो राम राम श्याम


मदन मोहन बाहेती घोटू

बुझते दीपक 


जिनने सदा अंधेरी रातों ,में जल किये उजाले है 

इनमें फिर से तेल भरो , ये दीपक बुझने वाले हैं


अंधियारे में सूरज बनकर, जिनने ज्योति फैलाई 

सहे हवा के कई थपेड़े ,पर लौ ना बुझने पाई 

है छोटे, संघर्षशील पर ,सदा लड़े तूफानों से 

इनकी स्वर्णिम छटा ,हमेशा खेली है मुस्कानों से 

इनके आगे घबराते हैं ,पंख तिमिर के काले हैं 

इनमें फिर से तेल भरो, ये दीपक बुझने  वाले हैं 


हो पूजन या कोई आरती दीप हमेशा जलते हैं 

दिवाली की तमस निशा को, जगमग जगमग करते हैं 

शुभ कार्यों में दीप प्रज्वलन होता है मंगलकारी 

स्वर्णिम दीप शिखा लहराती ,लगती है कितनी प्यारी 

बाती में है भरा प्रेम रस, मुंह पर सदा उजाले हैं 

इनमें फिर से तेल भरो ,ये दीपक बुझने वाले हैं 


है बुजुर्ग मां-बाप तुम्हारे,ये भी बुझते दिये हैं 

किये बहुत उपकार तुम्हारे ,सदा दिये ही दिये हैं 

खत्म हो रहा तेल ,उपेक्षा की तो ये बुझ जाएंगे 

इनमें भरो प्रेम रस थोड़ा, ये फिर से मुस्कुराएंगे 

इनकी साज संभाल करो , ये तुमको बहुत संभाले हैं 

इनमें फिर से तेल भरो , ये दीपक बुझने वाले हैं


मदन मोहन बाहेती घोटू