Saturday, August 20, 2011

तुम्हे क्या आपत्तियां है

तुम्हे क्या आपत्तियां है
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आज हमतुम है अकेले,बुझ गयी सब बत्तियां है
                    तुम्हे क्या आपत्तियां है
तुम्हे कोई देख ना ले,इसलिए  आती शरम है
तुम्हे ढंग से अँधेरे में,देख भी पाते न हम है
देख तुम्हारी शरम को,चाँद छुप कर झांकता है
रूप का कैसा खजाना,छुपा कर तुमने रखा है
तुम्हे छूने में हवांए,भी सहम ,कतरा रही है
आई जो खुशबू तुम्हारी,चमेली शरमा रही है
छुई मुई की तरह तुम,लाजवंती हो लजीली
तुम्हारा स्पर्श मादक,तुम्हारी नज़रें नशीली
मै मधुप प्रेमी तुम्हारा,चाहता रसपान करना
कभी शरमा कर सिमटना,कभी मुस्का कर झिझकना
हुई बेकल मधु मिलन को,हमारी अनुरक्तियाँ है
                      तुम्हे क्या आपत्तियां है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

अब सुनामी आ गया है

अब सुनामी आ गया है
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देख कर अन्ना का अनशन
और जनता का    प्रदर्शन
 अरे भ्रष्टों,संभल जाओ, अब सुनामी आ गया है
जड़ तुम्हारी हिला देगा
और तुमको मिटा देगा
गिरा देगा महल,जन सैलाब एसा  छा गया  है
बहुत लूटा देश तुमने,
         और जनता को सताया
बढाई मंहगाई इतनी,
           खून के आंसू  रुलाया
जोश जनता में भरा है
भर गया अब तो घड़ा है
पाप-घट के फूट जाने का समय अब आ गया है
अरे भ्रष्टों संभल जाओ,अब सुनामी आ गया है
बहुत घोटाले हुए है,
                  और भ्रष्टाचार  फैला
मिटाने को अब करप्शन ,
                  नहीं अन्ना है अकेला
सभी मिल कर जुट गए है
हाथ लाखों उठ  गए है
बांध टूटा सबे का है, और विप्लव आ गया है
अरे भ्रष्टों संभल जाओ, अब सुनामी आ गया है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'