Thursday, July 21, 2011

रेखा

            रेखा
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मैंने जब रेखा को देखा,मै था छोटा ,वो थी जवान
फिर बार बार उसको देखा,वो थी जवान ,मै था जवान
लेकिन इन धुंधली आँखों से,अब भी उसको देखा करता
वो अब भी लगती है  जवान लेकिन मै हूँ बूढा लगता
तो मैंने उनसे पूछ लिया,एक बात बताओ रेखा जी
क्यों नहीं तुम्हारे चेहरे पर है चढ़ी उम्र की रेखा जी
थी कितनी स्लीम सायरा जी,कितनो के दिल की रानी थी
दुबला पतला छरहरा बदन,सारी दुनिया दीवानी थी
पर जब से पति का प्यार मिला,दूना हो गया दायरा है
पहले जैसी दुबली पतली, अब ना वो रही सायरा  है
वह सुन्दर  कटे बाल वाली ,लड़की छरहरे बदन की थी
था नाम साधना, हिरोइन,मेरे महबूब   फिलम की थी
पर जब उसको महबूब मिला,वो फूली फूली फूल गयी
हो गया घना साधना बदन,अब जनता उसको भूल गयी
तो शादी कर लेने पर जब आहार प्यार का मिलता है
अच्छा खासा छरहरा बदन,शादी के बाद फूलता है
तो कम खाना और योग,साथ में अब तक मै जो क्वांरी हूँ
इसलिए चिरयुवा लगती हूँ,मै सुन्दर हूँ मै प्यारी हूँ


मदन मोहन बहेती 'घोटू'

पंच तत्व

पंच तत्व
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पंचतत्व से   बना   हुआ है ,ये सारा   संसार
जल,नभ,पृथ्वी,वायु और अग्नि,जीवन का आधार
हुआ इन्ही तत्वों से मिल कर ,ये शरीर निर्माण
इन्ही पंच तत्वों को कहते है हम सब
भगवान
' भ 'याने भूमि या पृथ्वी,अपनी धरती माता
हमें अन्नजल सब कुछ देती ,सहनशील और दाता
अस्थि,मांस,नख,केश ,त्वचा सब,इस माटी से बनते
और शरीर का अंत होने पर माटी में जा मिलते
'ग'गरमीया अगन तत्व है,उर्जा का है साधन
इस की शक्ति से ही होता,खान पान का पाचन
'व'है वायु तत्व जीवन का,यही प्राण कहलाता
सांस,सांस,में भीतर जाता,नस नस में बस जाता
'अ'याने अपसु या पानी, कहलाता है जीवन
यहीतरल  है जिससे बहता,रक्त नसों में हर क्षण
'न ',नभ या आकाश हर जगह,व्यापक तत्व यही है
नस,नाड़ी या उदर जहाँ भी,खाली जगह  यही है
 जिनमे गुण इन पांच तत्व के,वो महान कहलाता
  इसीलिए कहते शरीर को है भगवान  बनाता

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

तू कमाल है

तू कमाल है
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तेरे गाल है गुलाबी
तेरे होंठ है शराबी
तेरी अदायें मदमाती
            तू कमाल है
तेरा रूप है सलोना
तेने किया जादूटोना
तेरे तन का कोना  कोना
              मालामाल है
तेरी बातें मदमाती
मुझ पे प्यार लुटाती
नाज़ नखरों से रिझाती
               तेरी चाल है
मेरी  प्यारी प्यारी मैना
मेरे दिल में ही रहना
तेरे चंचल चंचल नैना
             बेमिसाल है

घोटू