Monday, May 4, 2020

गांधारी

गांधारी  
जन्मांध धृतराष्ट से ब्याह दी गयी थी बिचारी
उसकी थी लाचारी  
वह चाहती तो अपने अंधे ,
पति का सहारा बन सकती थी
उसका पथ प्रदर्शन कर सकती थी
पर उसने हस्तिनापुर का माहौल देखा
भीष्म और द्रोणाचार्य जैसे बड़े महारथी
साधे बैठे रहते है चुप्पी
तो उसने भी चुप्पी साध ली
और अपनी आँखों पर पट्टी बाँध  ली
वरना अपनी हर गलती की जिम्मेदारी ,
धृतराष्ट्र , गांधारी पर डाल सकता था
कहता मैं तो अँधा हूँ ,मुझे क्या पता था
पर तुम्हे तो दिखता है ,
तुम तो मुझे टोक सकती थी
मुझे गलत निर्णय लेने से रोक सकती थी
उसने सोचा होगा कि पति की हर गलती का
दोषारोपण क्यों अपने सर पर लेना
इससे तो अच्छा है आँखों पर पट्टी बाँध लेना
इससे बच गया उसके जी का जंजाल
और वो बन गयी पतिव्रता धर्म
निभाने वाली पत्नी की एक मिसाल
इसी में थी उसकी समझदारी
गांधारी ,एक बुद्धिमान नारी

घोटू 
लॉक डाउन के दो विषम चित्र

पति देवता ,रोज खाने के बाद
खाने की तारीफ़ करते थे और ,
चूमते थे खाना बनानेवाली पत्नी के हाथ
बाद में पता लगा कि पत्नी ,
सेनेटाइजर से करती थी हाथ साफ़
जिसमे ६५%से ज्यादा अल्कोहल होता था ,
और पति जी के मुंह लग गया था ,
सेनेटाइजर का स्वाद

लॉक डाउन के दरमियान
श्रीमती और श्रीमान
दोनों दो गज  'सोशल दूरी बना कर रखने के
सरकारी आदेश की धज्जियाँ उड़ाते है
छह फुट के पलंग पर ,दोनों ही सो जाते है

घोटू 
घोटू के पद

घोटू ,कोई हमें समझाये
दिन भर घर में बैठ अकेले ,कैसे समय बिताये
काम नहीं करने की आदत ,मेहरी भी ना आये
पति पत्नी  बूढ़े अशक्त है   ,झाड़ू  लगा न पायें  
मना निकलना ,तो सब्जी फल ,दूध कहाँ से लाये
खाना भी अब बना न पाते ,रोज रोज क्या  खायें
मुख पर पट्टी बंधी हुई है ,ज्यादा बोल न पायें
सेनेटाइजर में दारू की ,बदबू  नहीं सुहाये
'घोटू'अब तो इन्तजार है ,कब कोरोना  जाये

घोटू