Wednesday, May 25, 2011

पौ फटी

 पौ  फटी
कलियाँ चटकी
भ्रमरों के गुंजन स्वर
महके
डाल डाल पर पंछी
चहके
गौ रम्भाई
मंदिर से घंटा ध्वनि आई
शंखनाद भी दिया सुनाई
मंद समीरण के झोंको ने आ थपकाया
प्रकृति ने कितने ही स्वर से मुझे जगाया
लेकिन मेरी नींद  न टूटी
किन्तु फ़ोन की एक घंटी से मैं जग बैठा
कितना भौतिक
मुझको है धिक्

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

थकान का सुख

थकान का सुख
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थकान,
है एक शारीरिक स्तिथि
और सुख ,
एक मानसिक अनुभूति
थकान का भी एक सुख होता है
जिसका स्वाद,
गूंगे के गुड की तरह,
बिना थके प्राप्त नहीं होता
जो सुख थके हुए रही को,
मंजिल पर पहुँचने पर,
या दिन भर के  परिश्रम के बाद,
मजदूरी मिलने पर,
पति पत्नी के मधुर संबंधों में,
या प्रसव के बाद,
नवजात शिशु को देख कर
माँ की आँखों में झलकता है
वो थकान का सुख ही तो है,
जिसमे संतोष छलकता है
जो लोग बिना थके सुख पाते है
जल्दी ही,सुख से थक जाते है

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

धंधा -बाबागिरी का

     धंधा -बाबागिरी  का
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नहीं नौकरी ,पढ़े लिखे हो ,है बेकारी
तो फिर तुमको ,सच्ची,अच्छी,राय हमारी
बहुत धर्मप्रिय है जनता ,तुम लाभ उठाओ
छोडो सारे चक्कर ,तुम बाबा बन जाओ
सभी सफलताओं का फिर तो द्वार खुला है
बाबाजी बनने का सिंपल फ़ॉर्मूला है
संस्कृत के दो चार मन्त्र पहले रट डालो
और गले में रुद्राक्षों की माला डालो
सिर मुंडवालो,या फिर लम्बे बाल बढाओ
भगवा सा चोला पहनो,सिर तिलक लगाओ
एक मूर्ती,कुछ तस्वीरें,भजन ,कीर्तन
घंटी,पूजा,चेला,चेली,कुछ अपने जन
बने प्रचारक,करें आपकी ,महिमा मंडित
और आपको बतलाएं ,अति ज्ञानी पंडित
अच्चा होगा ,कुछ ज्योतिष का ज्ञान जरूरी
और हस्त रेखाओं की पहचान जरूरी
कुछ ड्रामेबाजी आती हो ,थोडा गाना
सबसे ज्यादा आवश्यक है ,बात बनाना
तो भक्तों की भीड़ नहीं बिलकुल थमने की
सभी योग्यताएं है तुम में बाबा बनने की
,पुत्र चाहिए,बाबाजी के आश्रम आओ
परेशानियाँ,चिंताओं से मुक्ति पाओ
नयी नौकरी,या मनचाहा जीवन साथी
होंगे पूर्ण मनोरथ,कृपा अगर बाबा की
तुम भविष्य बतलाओगे जितने लोगों का
प्रोबेलिटी है,सच होगा ,आधे लोगों का
उतने निश्चित भक्त तुम्हारे बन जायेंगे
हो मुरीद,कितने ही भक्तों को लायेंगे
बाबा गिरी का धंधा फिर बस चल निकलेगा
दिन दूना और रात चौगुना नाम बढेगा
शोहरत,दौलत,सब चूमेगी,कदम तुम्हारे
हो जायेगे,बस तुम्हारे,वारे न्यारे
बाबा गिरी में ,ख्याल मगर तुम ,इतना रखना
गिरी हुई हरकत करने से ,बिलकुल बचना
अगर गए जो पकडे तुम जो किसी खेल में
बदनामी होगी और जीवन कटे जेल में

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

 

हंसी खो गयी

  हंसी खो गयी
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जंजालों में जीवन के इस कदर फंसे है
अरसा बीता,हम खुल कर के नहीं हँसे है
थे बचपन के  दिन वो कितने सुन्दर ,प्यारे
किलकारी गूंजा करती थी ,घर में सारे
खेल कूद,खाना पीना और पढना,लिखना
था आनंद बसा जीवन में हर पल कितना
आई जवानी प्यार हुआ तुमसे जब गहरा
आती थी मुस्कान देख तुम्हारा चेहरा
मन में मोहक छवि तुम्हारी ,सिर्फ बसी थी
जीवन में बस प्रेम भरा था ,हंसी ख़ुशी थी
और फिर ऐसा दौर आया ,मेरे जीवन में
दब कर ही रह गयी सभी खुशियाँ इस मन में
परेशानियाँ,चिंताओं ने ऐसा घेरा
दूर हुई सारी खुशियाँ,रह गया अँधेरा
कभी बिमारी ,कभी उधारी,कोर्ट,मुकदमा
कभी टूटना दिल का या लग जाना सदमा
चिंताओं में डूबे रहतें हैं हम सब की
जाने कहाँ ,हो गयी गम मुस्कानें लब की
और शिकंजा ,परेशानियाँ,खड़ी कसे है
अरसा बीता,हमको,खुल कर नहीं हंसें है

मदन मोहन बहेती 'घोटू'

फूल खिले मेरे जीवन में

फूल खिले मेरे जीवन में
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जब से तुम आई जीवन में फूल खिल गए
मेरे सोये अरमानो को पंख मिल गए
सूखी थी जीवन बगिया ,गुलजार हो गयी
जीवन में सतरंगों की बोछार हो गयी
थी गर्मी की तपन,कभी सर्दी की ठिठुरन
मेरे मन को चुभते रहते थे सब मौसम
तुम जब आई वासंती मधुमास आगया
मेरे जीवन, सांसों में उच्छ्वास आगया
फूल खिले जीवन बगिया में ,मै हूँ,तू है
और प्यार की ,सभी तरफ फैली खुशबू है

मदन मोहन बहेती'घोटू'