Thursday, November 12, 2015

बिहार की हार

           बिहार की हार   
                  १
                
लोग लाख कहते थे ,कि दम  है बन्दे में ,
           हार कर बिहार लेकिन बन्दे की साख गई
चींखें भी,चिघाड़े भी शेर से दहाड़े भी ,
           शोर हुआ इतना कि जनता थी जाग गई
लोग तो ये कहते है ,छुरी मारी अपनों ने ,
            बड़ी बड़ी बातें थी ,लेकिन कट नाक गई 
 घूमता परदेश रहे ,इज्जत कमाने को ,
               पर घर की बेटी ही ,गैरों संग भाग गई     
                       २
 मोदीजी की रैलियों में ,रेला तो उमडा  था बहुत ,
                 वोट कम क्यों,पता ये कारण लगाना चाहिए
कोई कहता मिडिया है,कुछ कहे अंतर्कलह ,
               कुछ कहे मंहगाई बढ़ती ,अब घटाना  चाहिए
मोदीजी तो जा रहे लंदन है मिलने क़्वीन से,
          हमको भी थोड़े दिनों ,अब मुंह  छुपाना चाहिए
हमको भी इस हार के ,सब कारणों को जानने ,
            आत्मचिंतन के लिए,   'बैंकॉक' जाना  चाहिए  

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

लक्ष्मीजी की पीड़ा

       लक्ष्मीजी की पीड़ा 

दिवाली की रात लक्ष्मी माई
मेरे सपनो में आई
मैं हतप्रभ चकराया
मैंने ना पूजा की ना प्रसाद चढ़ाया
बस एक आस्था का,
 छोटा सा दीपक जलाया
फिर भी इस वैभव की देवी को ,
इस अकिंचन का ख्याल कैसे आया
मुझे विस्मित देख कर ,
लक्ष्मी माता मुस्कराई
बोली इस तरह क्यों चकरा रहे हो भाई
तुमने सच्चे मन से याद किया ,
मैं  इसलिए तुम्हारे यहाँ आई
लोग इतनी रौशनी करते है ,
आतिशबाजी चलाते है
मनो तेल के लाखों दीपक जलाते है
लेकिन उनको  ये समझ नहीं आता है
 मेरी पूजा अमावस को इसलिए होती है,
क्योंकि मेरे  वाहन उल्लू को,
अंधियारे में ही ठीक से नज़र आता है
 वो उजाले से घबराता है
तुम्हारे यहां अँधियारा दिखलाया
इसीलिये वो मुझे  यहाँ पर ले आया
 मुझे एक बात और चुभती है
दिवाली पर जितना तेल ,
लोग दियों  में जलाते है ,
उतने में कई गरीबों को ,
चुपड़ी हुई रोटी मिल सकती है
मेरी पूजा और आगमन की चाह में ,
मुझी को पानी की तरह बहाना ,
मेरे साथ नाइंसाफी है
मुझे प्रसन्न करने के लिए तो,
श्रद्धा से जलाया ,एक दीपक ही काफी है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'